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डिजिटल जनगणना में बड़ी चूक: पोर्टल पर अरुणाचल की जगह चीन का नाम, अधिकारियों ने मैपिंग सिस्टम पर उठाए सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Sun, 19 Apr 2026 04:06 PM IST
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सार
Census Portal Error India: डिजिटल जनगणना पोर्टल पर अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट को चीन के मेडोग के नाम से दिखाए जाने पर विवाद हो गया। रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी ने इस गलती को उजागर किया, जिसके बाद सरकार ने तुरंत इसे ठीक किया। सरकार ने इसे तकनीकी त्रुटि बताया।
जनगणना पोर्टल पर चूक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश में पहली बार डिजिटल जनगणना की तैयारी के बीच एक बड़ी तकनीकी गलती ने विवाद खड़ा कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट शहर को जनगणना के सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर चीन के शहर मेडोग के नाम से दिखाया गया। इस घटना के सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई और इसे देश की संप्रभुता से जोड़कर देखा जाने लगा।
यह मामला तब सामने आया जब रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी मोहोंतो पांगिंग पाओ ने इस गलती को सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर पासीघाट की लोकेशन गलत दिख रही थी, जिससे वह अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। उनके पोस्ट के बाद यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
क्या थी पूरी गलती और क्यों बढ़ा विवाद?
पोर्टल पर अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट को मेडोग दिखाया गया, जो चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र में आता है। यह वही इलाका है जिसे लेकर चीन बार-बार दावा करता रहा है। ऐसे में इस गलती को सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि संवेदनशील मुद्दा माना गया और लोगों ने इसे “वर्चुअल तरीके से जमीन छोड़ने” जैसा बताया।
ये भी पढ़ें- महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: 'प्रधानमंत्री मोदी ने देश को किया गुमराह', सीएम ममता बनर्जी का केंद्र पर आरोप
क्या सरकार ने इस पर तुरंत कार्रवाई की?
मामला सामने आने के कुछ ही घंटों में जनगणना अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने बताया कि यह समस्या मैप सेवा देने वाली कंपनी के साथ समन्वय करके उसी दिन ठीक कर दी गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक तकनीकी मैपिंग एरर थी।
क्या डिजिटल जनगणना में नई चुनौतियां सामने आईं?
यह घटना ऐसे समय आई है जब भारत पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की ओर बढ़ रहा है। इस बार लोग खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। लेकिन इस तकनीकी गलती ने यह भी दिखाया कि डिजिटल सिस्टम में छोटी चूक भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है।
चीन के दावे से जुड़ा है यह मामला
चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर दावा करता रहा है और कई जगहों के नाम बदलने की कोशिश भी करता है। भारत सरकार ने हमेशा इन दावों को खारिज किया है और साफ कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में इस तरह की गलती ने संवेदनशीलता और बढ़ा दी। सरकार ने कहा है कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए तकनीकी सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही मैप सेवाओं की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी ताकि देश की सीमाओं और पहचान से जुड़ी कोई भी चूक न हो।
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यह मामला तब सामने आया जब रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी मोहोंतो पांगिंग पाओ ने इस गलती को सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर पासीघाट की लोकेशन गलत दिख रही थी, जिससे वह अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। उनके पोस्ट के बाद यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
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क्या थी पूरी गलती और क्यों बढ़ा विवाद?
पोर्टल पर अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट को मेडोग दिखाया गया, जो चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र में आता है। यह वही इलाका है जिसे लेकर चीन बार-बार दावा करता रहा है। ऐसे में इस गलती को सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि संवेदनशील मुद्दा माना गया और लोगों ने इसे “वर्चुअल तरीके से जमीन छोड़ने” जैसा बताया।
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क्या सरकार ने इस पर तुरंत कार्रवाई की?
मामला सामने आने के कुछ ही घंटों में जनगणना अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने बताया कि यह समस्या मैप सेवा देने वाली कंपनी के साथ समन्वय करके उसी दिन ठीक कर दी गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक तकनीकी मैपिंग एरर थी।
क्या डिजिटल जनगणना में नई चुनौतियां सामने आईं?
यह घटना ऐसे समय आई है जब भारत पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की ओर बढ़ रहा है। इस बार लोग खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। लेकिन इस तकनीकी गलती ने यह भी दिखाया कि डिजिटल सिस्टम में छोटी चूक भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है।
चीन के दावे से जुड़ा है यह मामला
चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर दावा करता रहा है और कई जगहों के नाम बदलने की कोशिश भी करता है। भारत सरकार ने हमेशा इन दावों को खारिज किया है और साफ कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में इस तरह की गलती ने संवेदनशीलता और बढ़ा दी। सरकार ने कहा है कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए तकनीकी सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही मैप सेवाओं की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी ताकि देश की सीमाओं और पहचान से जुड़ी कोई भी चूक न हो।
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