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तमिलनाडु: वीसीके ने AIADMK के बागी विधायकों को मंत्री बनाने के विचार पर जताया एतराज, उठाए ये सवाल

पीटीआई, चेन्नई। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 15 May 2026 02:36 PM IST
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सार

वीसीके महासचिव डी रविकुमार ने कहा कि एआईएडीएमके के 25 बागी विधायकों को मंत्री बनाने का विचार राजनीतिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि भले ही अभी कानूनी तौर पर रोक न हो, लेकिन ऐसे फैसले गलत संदेश देते हैं और दलबदल कानून के तहत कार्रवाई का आधार बन सकते हैं। पढ़िए रिपोर्ट-

VCK objects to appointing rebel AIADMK MLAs as ministers
डी रवि कुमार, वीसीके महासचिव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/डी रवि कुमार
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विस्तार

विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) महासचिव डी रवि कुमार ने शुक्रवार को एआईएडीएमके से अलग हुए विधायकों को मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की कैबिनेट में मंत्री बनाने के विचार पर एतराज जताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे ने राजनीति में नैतिकता और आचरण से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 
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डी रवि कुमार ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के महासचिव ईके पलानीस्वामी को पार्टी व्हिप नियुक्त करने का अधिकार है। पार्टी का आदेश विधायकों के लिए बाध्यकारी होता है। इसलिए जिन 25 विधायकों ने पार्टी के निर्देश के खिलाफ जाकर तमिलगाव वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार के पक्ष में वोट किया है, उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।
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'मंत्री बनना चाहते हैं तो विधायकी छोड़ें'
रवि कुमार ने एक्स पर लिखा, अभी कानूनन उन्हें मंत्री बनाने पर सीधी रोक नहीं है। लेकिन ऐसा करना राजनीतिक और नैतिक रूप से गलत होगा। उन्होंने कहा,अगर मुख्यमंत्री विजय उन्हें मंत्री बनाना चाहते हैं, तो सही तरीका यह होगा कि वे विधायक पद से इस्तीफा दें। फिर टीवीके में शामिल होकर जनता के बीच जाकर दोबारा चुनाव लड़ें।

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'दलबदलुओं को जनता स्वीकार नहीं करेगी'
उन्होंने यह भी कहा,असली सवाल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिकता का है कि क्या जनता ऐसे दलबदल करने वाले नेताओं को फिर से स्वीकार करेगी। उन्होंने कहा, 25 विधायकों का पार्टी व्हिप का उल्लंघन संविधान के तहत गंभीर मामला है और इस पर दलबदल कानून लागू हो सकता है।

रवि कुमार ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार व्हिप जारी करने का अधिकार राजनीतिक पार्टी के पास होता है। उसे मानना अनिवार्य होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी रूप से मंत्री नियुक्ति तब तक संभव है, जब तक विधायकों की अयोग्यता तय नहीं हो जाती। लेकिन लोकतांत्रिक नैतिकता सबसे बड़ा सवाल है।

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