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Supreme Court: 'हवाई किराये में बढ़ोतरी की शीर्ष स्तर पर चल रही जांच', सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 23 Feb 2026 05:57 PM IST
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सार
Supreme Court: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि त्योहारों और छुट्टियों में निजी एयरलाइंस की ओर से अस्थिर हवाई किराये और अतिरिक्त शुल्क के मामलों को शीर्ष स्तर पर देखा जा रहा है। कोर्ट ने किराये में उतार-चढ़ाव को बेहद गंभीर मामला बताया। पढ़ें रिपोर्ट-
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान निजी एयरलाइंस की ओर से वसूले जा रहे अस्थिर हवाई किराये और अतिरिक्त शुल्क के मामले को उच्चतम स्तर पर देखा जा रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस विक्रम मेहता की बेंच एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में भारत के विमानन क्षेत्र में कथित तौर पर अस्पष्ट, शोषणकारी और एल्गोरिदम-आधारिक मूल्य निर्धारण प्रथाओं और यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन सीमा सामान की सीमा घटाने को चुनौती दी गई है।
केंद्र को चार हफ्ते के भीतर देना होगा जवाब
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक पेश हुए। उन्होंने शीर्ष कोर्ट से कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए सरकार के शीर्ष स्तर पर चर्चा जारी है। उन्होंने बताया कि सॉलिसिटर जनरल (एसजी) ने भी बैठक बुलाई है।
एएसजी कौशिक ने कोर्ट से आग्रह किया कि चार हफ्ते का समय दिया जाए, ताकि केंद्र अपना जवाब पेश कर सके।शीर्ष कोर्ट ने केंद्र को चार हफ्ते का समय दिया और इस मामले को 23 मार्च को आगे विचार के लिए सूचीबद्ध किया।
किराये में उतार-चढ़ाव बहुत गंभीर चिंता का विषय: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने कहा कि हवाई किराये में उतार-चढ़ाव और पीक यात्रा समय में अतिरिक्त शुल्क लगाना बहुत गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने कहा, यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। अन्यथा हम अनुच्छेद 32 की याचिकाओं पर विचार नहीं करते।
भारतीय एयरलाइंस संघ की याचिका खारिज
शीर्ष कोर्ट ने भारतीय एयरलाइंस संघ (एफआईए) की इस याचिका को भी खारिज किया कि उन्हें मामले में जोड़ा जाए। एफआईए ने यह कहते हुए उसे मामले में जोड़ने का आग्रह किया था कि नीति बनाने से पहले केंद्र सभी हितधारकों से परामर्श करेगा।
ये भी पढ़ें: 'थाईलैंड में फंसे ओडिशा के श्रमिकों की कैसे कर सकते हैं मदद', एनएचआरसी ने MEA की टिप्पणी मांगी
याचिका में क्या कहा गया है?
सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की ओर से नवंबर 2025 में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। इस याचिका में कहा गया है कि हवाई यात्रा अनियंत्रित, अप्रत्याशित और शोषणकारी किराया प्रणाली के कारण महंगी हो गई, जो कि अनिवार्य सेवाओं में आती है।
याचिका में कहा गया कि अचानक किराया बढ़ जाना, कभी-कभी घंटों में दोगुना या तिगुना हो जाना, आपातकाल, त्योहार या पीक यात्रा समय में यात्रियों को अत्यधिक प्रभावित करता है, जो चिकित्सा, शिक्षा या रोजगार के कारण यात्रा करने पर मजबूर हैं। इसके अलावा, एयरलाइंस ने मुफ्त चेक-इन सामान की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी है, जिससे पहले शामिल सेवा अब अतिरिक्त शुल्क का माध्यम बन गई है।
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याचिका में भारत के विमानन क्षेत्र में कथित तौर पर अस्पष्ट, शोषणकारी और एल्गोरिदम-आधारिक मूल्य निर्धारण प्रथाओं और यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन सीमा सामान की सीमा घटाने को चुनौती दी गई है।
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केंद्र को चार हफ्ते के भीतर देना होगा जवाब
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक पेश हुए। उन्होंने शीर्ष कोर्ट से कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए सरकार के शीर्ष स्तर पर चर्चा जारी है। उन्होंने बताया कि सॉलिसिटर जनरल (एसजी) ने भी बैठक बुलाई है।
एएसजी कौशिक ने कोर्ट से आग्रह किया कि चार हफ्ते का समय दिया जाए, ताकि केंद्र अपना जवाब पेश कर सके।शीर्ष कोर्ट ने केंद्र को चार हफ्ते का समय दिया और इस मामले को 23 मार्च को आगे विचार के लिए सूचीबद्ध किया।
किराये में उतार-चढ़ाव बहुत गंभीर चिंता का विषय: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने कहा कि हवाई किराये में उतार-चढ़ाव और पीक यात्रा समय में अतिरिक्त शुल्क लगाना बहुत गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने कहा, यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। अन्यथा हम अनुच्छेद 32 की याचिकाओं पर विचार नहीं करते।
भारतीय एयरलाइंस संघ की याचिका खारिज
शीर्ष कोर्ट ने भारतीय एयरलाइंस संघ (एफआईए) की इस याचिका को भी खारिज किया कि उन्हें मामले में जोड़ा जाए। एफआईए ने यह कहते हुए उसे मामले में जोड़ने का आग्रह किया था कि नीति बनाने से पहले केंद्र सभी हितधारकों से परामर्श करेगा।
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याचिका में क्या कहा गया है?
सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की ओर से नवंबर 2025 में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। इस याचिका में कहा गया है कि हवाई यात्रा अनियंत्रित, अप्रत्याशित और शोषणकारी किराया प्रणाली के कारण महंगी हो गई, जो कि अनिवार्य सेवाओं में आती है।
याचिका में कहा गया कि अचानक किराया बढ़ जाना, कभी-कभी घंटों में दोगुना या तिगुना हो जाना, आपातकाल, त्योहार या पीक यात्रा समय में यात्रियों को अत्यधिक प्रभावित करता है, जो चिकित्सा, शिक्षा या रोजगार के कारण यात्रा करने पर मजबूर हैं। इसके अलावा, एयरलाइंस ने मुफ्त चेक-इन सामान की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी है, जिससे पहले शामिल सेवा अब अतिरिक्त शुल्क का माध्यम बन गई है।