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बंगाल में केंद्रीय बलों की संख्या में कटौती: 500 कंपनियों से 10000 जवान हटाए गए, समीक्षा के बाद हुआ निर्णय

डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Mon, 18 May 2026 11:29 AM IST
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Centre Removes 10,000 CAPF Troops from West Bengal After Security Assessment
केंद्रीय अर्धसैनिक बल - फोटो : आईएएनएस
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की पांच सौ कंपनियों को तैनात किया गया था। गत सप्ताह राज्य के वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य की गहन समीक्षा की गई है। इसके बाद निर्णय लिया गया कि राज्य से अब केंद्रीय बलों की कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से हटा लिया जाए। पहले चरण में सौ कंपनियों यानी 10 हजार जवानों की पश्चिम बंगाल से वापसी हो गई है। आगामी दिनों में राज्य में बाकी बची केंद्रीय बलों की 400 कंपनियों को विभिन्न चरणों में हटा लिया जाएगा। 


गृह मंत्रालय की तरफ से बंगाल सरकार को संदेश 
केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को संदेश भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' की कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से हटा लिया जाए। राज्य में चुनाव संपन्न होने के बाद केंद्रीय बलों के सभी जवानों को वहां से नहीं हटाया गया था। पिछली बार चुनाव होने के बाद राज्य के कई भागों में हिंसा की घटनाएं देखने को मिली थी। इस बार वैसी घटनाएं न हों, इसके लिए चुनाव संपन्न होने के बाद भी बंगाल में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 500 कंपनियां तैनात की गई थीं। 
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सीआरपीएफ व बीएसएफ सहित इन बलों की तैनाती 
बंगाल में दोनों चरणों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद सीआरपीएफ की 200, बीएसएफ की 150, सीआईएसएफ की 50, आईटीबीपी की 50 और एसएसबी की 50 कंपनियों को कानून व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी में लगाया गया था। अब राज्य के वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा की गई है। इसमें पश्चिम बंगाल के गृह विभाग के अलावा केंद्रीय एजेंसियां भी शामिल रही हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर खुफिया एजेंसी से भी विशेष रिपोर्ट मांगी गई थी। समीक्षा बैठक में सामने आया कि चुनाव के बाद अब राज्य में शांति है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं का उग्र प्रदर्शन, ये सब फिलहाल बंद है। पश्चिम बंगाल से लगती बांग्लादेश की सीमा पर विशेष चौकसी बरती जा रही है। घुसपैठियों पर सीमा सुरक्षा बल की पैनी नजर है। 


पहले चरण में सौ कंपनियों की वापसी 
केंद्रीय बलों की पांच सौ कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण के तहत सौ कंपनियों को बंगाल से हटा लिया गया है। इनमें सीआरपीएफ की 40, बीएसएफ की 30, सीआईएसएफ की 10, आईटीबीपी की 10 और एसएसबी की 10 कंपनियों को बंगाल से वापस बुलाया गया है। 15 मई से ये कंपनियां, कानून व्यवस्था की ड्यूटी पर नहीं रहेंगी। फिलहाल बंगाल में केंद्रीय बलों की चार सौ कंपनियां तैनात रहेंगी। 

तेज होगा फैंसिंग लगाने का काम 
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के बाद बीएसएफ को 450 किलोमीटर खुले बॉर्डर पर फैंसिंग लगाने के लिए जमीन अलॉट करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कैबिनेट की पहली बैठक में बीएसएफ को फेंसिंग के लिए जमीन अलॉट करने की घोषणा की है। जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी होगी। राज्य के मुख्य सचिव और भूमि एवं राजस्व सचिव की देखरेख में यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके तहत पश्चिम बंगाल से लगती बांग्लादेश की सीमा पर 450 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को फेंसिंग के जरिए कवर किया जाएगा, जो अभी तक खुला पड़ा है। लगभग 30 किमी पर एक बटालियन हेडक्वार्टर बनेगा। यानी 1000 जवान तैनात होंगे। 

गुंडागर्दी और धार्मिक नारेबाजी  
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार, खुले बॉर्डर पर फैंसिंग के लिए जमीन नहीं दे रही। जब कभी फेंसिंग लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो टीएमसी के कार्यकर्ता गुंडागर्दी और धार्मिक नारेबाजी करने लगते हैं। पश्चिम बंगाल में 2216 किलोमीटर लंबी सीमा, बांग्लादेश से सटी हुई है। इसमें से 1653 किलोमीटर लंबे बॉर्डर पर फेंसिंग लग चुकी है। लगभग 563 किलोमीटर लंबा बॉर्डर आज भी खुला है। इसमें से 112 किलोमीटर क्षेत्र में नदी, नाले व ऊँचाई वाली जगह हैं। यहां पर भी फेंसिंग का प्रयास किया गया है, लेकिन 450 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग होना बाकी है। गत वर्षों में  केंद्रीय गृह सचिव और बंगाल के मुख्य सचिव के बीच आधा दर्जन से ज्यादा बार मीटिंग हुई थीं। 
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