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Chhota Udaipur Assembly Seat: यहां भाजपा ने कांग्रेस को जीत की हैट्रिक लगाने से रोका, जानें पुराने नतीजे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 21 Dec 2022 05:12 PM IST
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सार
भाजपा के उम्मीदवार राजेंद्रसिंह मोहनसिंह राठवा ने कांग्रेस के संग्रामसिंह नारणभाई राठवा को 29,450 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 75,129 वोट जबकि कांग्रेस को यहां 45,679 वोट मिले। तीसरे नंबर पर आप रही, इसके प्रत्याशी प्रोफेसर अर्जुन राठवा को 43,880 को वोट मिले।
Gujarat Election- संग्राम राठवा और राजेन्द्र राठवा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर आ गई। मतलब कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, इस बार सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए। एक सीट पर सपा उम्मीदवार विजयी हुए तो बाकी तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।
छोटा उदेपुर जिले की छोटा उदेपुर विधानसभा सीट से भाजपा ने राजेंद्रसिंह मोहनसिंह राठवा को उतरा था। उनके सामने कांग्रेस के संग्रामसिंह नारणभाई राठवा थे। इस चुनाव के नतीजे की बात करें तो यहां भाजपा के उम्मीदवार राजेंद्रसिंह मोहनसिंह राठवा ने कांग्रेस के संग्रामसिंह नारणभाई राठवा को 29,450 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 75,129 वोट जबकि कांग्रेस को यहां 45,679 वोट मिले। तीसरे नंबर पर आप रही, इसके प्रत्याशी प्रोफेसर अर्जुन राठवा को 43,880 को वोट मिले जो कुल वोट का 25.25 फीसदी रहा। इसके अलावा दो उम्मीदवार ऐसे भी रहे जिनकी जमानत भी जब्त हो गई। नोटा को यहां 5,093 वोट मिले।
2017 में कांग्रेस को मिली थी जीत
छोटा उदेपुर विधानसभा सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने मोहन भाई रठावा को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भाजपा के जशुभाई रठावा को महज 1093 वोटों से हराया था। यहां इस कुल चार उम्मीदवार मैदान में थे। इन दोनों के अलावा बाकी दो उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 2012 में भी इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। वहीं, इससे पहले 2002 और 2007 में यहां से भाजपा जीती थी। अब तक हुए 14 चुनावों में 11 बार छोटा उदेपुर सीट कांग्रेस के खाते में गई है। वहीं, तीन बार भाजपा को जीत मिली है। एक बार स्वतंत्र पार्टी तो एक बार कांग्रेस (ओ) को जीत मिली है।
आदिवासी बाहुल्य छोटा उदेपुर जिले में कांग्रेस का रहा है दबदबा
आदिवासी बहुल सीट छोटा उदयपुर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मानी जाती रही है। 2017 के चुनावों में भाजपा ने संखेड़ा और कांग्रेस ने छोटा उदयपुर और जेतपुर में जीत हासिल की थी। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनावों में इन एसटी सीटों पर आदिवासियों के वास्तविक मुद्दे गौण रहे हैं। अब तक कांग्रेस ने यहां मोहनभाई और नारायण भाई के कारण इस पूरे आदिवासी बेल्ट पर राज किया। इस जोड़ी के टूटने से कांग्रेस की पारंपरिक आदिवासी सीटों पर टूट का असर देखने को मिला और यहां भाजपा को जीत मिली।
यहां दोस्त ही दोस्त का सियासी दुश्मन था
गुजरात की आदिवासी बहुल सीट छोटा उदेपुर इस चुनाव में अनोखा मुकाबला देखने को मिला। दो राठवा उम्मीदवारों की आपसी लड़ाई में कांग्रेस को नुकसान हुआ गई। एक को टिकट मिला था, तो दूसरे ने हाथ का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। कभी कांग्रेस से टिकट मांगने वाले दोनों राठवा चुनावी मैदान में आमने-सामने रहे। कहानी यहीं पूरी नहीं हुई थी। आम आदमी पार्टी ने भी इसी सरनेम वाले उम्मीदवार पर दांव लगा दिया था। राजेंद्र राठवा 10 बार कांग्रेस के विधायक रहे मोहन सिंह भाई राठवा के पुत्र हैं।
दरअसल, मोहन भाई अपने पुत्र के लिए कांग्रेस से ही टिकट चाहते थे। कांग्रेस ने मोहन के पुत्र पर भरोसा करने के बजाए राज्यसभा सांसद नारायण भाई राठवा के पुत्र संग्राम को टिकट दे दिया था। मोहन सिंह भाई और नारायण भाई राठवा छोटा उदेपुर और पूरे आदिवासी बेल्ट में कांग्रेस के चेहरे ही नहीं, आपस में अच्छे दोस्त के रूप में भी जाने जाते हैं। इस तरह भाजपा और कांग्रेस का चुनावी मुकाबला छोटा उदेपुर में आपस में ही दोस्त रहे दो नेताओं के बीच केंद्रित हो गया था।
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छोटा उदेपुर जिले की छोटा उदेपुर विधानसभा सीट से भाजपा ने राजेंद्रसिंह मोहनसिंह राठवा को उतरा था। उनके सामने कांग्रेस के संग्रामसिंह नारणभाई राठवा थे। इस चुनाव के नतीजे की बात करें तो यहां भाजपा के उम्मीदवार राजेंद्रसिंह मोहनसिंह राठवा ने कांग्रेस के संग्रामसिंह नारणभाई राठवा को 29,450 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 75,129 वोट जबकि कांग्रेस को यहां 45,679 वोट मिले। तीसरे नंबर पर आप रही, इसके प्रत्याशी प्रोफेसर अर्जुन राठवा को 43,880 को वोट मिले जो कुल वोट का 25.25 फीसदी रहा। इसके अलावा दो उम्मीदवार ऐसे भी रहे जिनकी जमानत भी जब्त हो गई। नोटा को यहां 5,093 वोट मिले।
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2017 में कांग्रेस को मिली थी जीत
छोटा उदेपुर विधानसभा सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने मोहन भाई रठावा को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भाजपा के जशुभाई रठावा को महज 1093 वोटों से हराया था। यहां इस कुल चार उम्मीदवार मैदान में थे। इन दोनों के अलावा बाकी दो उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 2012 में भी इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। वहीं, इससे पहले 2002 और 2007 में यहां से भाजपा जीती थी। अब तक हुए 14 चुनावों में 11 बार छोटा उदेपुर सीट कांग्रेस के खाते में गई है। वहीं, तीन बार भाजपा को जीत मिली है। एक बार स्वतंत्र पार्टी तो एक बार कांग्रेस (ओ) को जीत मिली है।
आदिवासी बाहुल्य छोटा उदेपुर जिले में कांग्रेस का रहा है दबदबा
आदिवासी बहुल सीट छोटा उदयपुर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मानी जाती रही है। 2017 के चुनावों में भाजपा ने संखेड़ा और कांग्रेस ने छोटा उदयपुर और जेतपुर में जीत हासिल की थी। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनावों में इन एसटी सीटों पर आदिवासियों के वास्तविक मुद्दे गौण रहे हैं। अब तक कांग्रेस ने यहां मोहनभाई और नारायण भाई के कारण इस पूरे आदिवासी बेल्ट पर राज किया। इस जोड़ी के टूटने से कांग्रेस की पारंपरिक आदिवासी सीटों पर टूट का असर देखने को मिला और यहां भाजपा को जीत मिली।
यहां दोस्त ही दोस्त का सियासी दुश्मन था
गुजरात की आदिवासी बहुल सीट छोटा उदेपुर इस चुनाव में अनोखा मुकाबला देखने को मिला। दो राठवा उम्मीदवारों की आपसी लड़ाई में कांग्रेस को नुकसान हुआ गई। एक को टिकट मिला था, तो दूसरे ने हाथ का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। कभी कांग्रेस से टिकट मांगने वाले दोनों राठवा चुनावी मैदान में आमने-सामने रहे। कहानी यहीं पूरी नहीं हुई थी। आम आदमी पार्टी ने भी इसी सरनेम वाले उम्मीदवार पर दांव लगा दिया था। राजेंद्र राठवा 10 बार कांग्रेस के विधायक रहे मोहन सिंह भाई राठवा के पुत्र हैं।
दरअसल, मोहन भाई अपने पुत्र के लिए कांग्रेस से ही टिकट चाहते थे। कांग्रेस ने मोहन के पुत्र पर भरोसा करने के बजाए राज्यसभा सांसद नारायण भाई राठवा के पुत्र संग्राम को टिकट दे दिया था। मोहन सिंह भाई और नारायण भाई राठवा छोटा उदेपुर और पूरे आदिवासी बेल्ट में कांग्रेस के चेहरे ही नहीं, आपस में अच्छे दोस्त के रूप में भी जाने जाते हैं। इस तरह भाजपा और कांग्रेस का चुनावी मुकाबला छोटा उदेपुर में आपस में ही दोस्त रहे दो नेताओं के बीच केंद्रित हो गया था।