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'विरोध का अधिकार, लेकिन मर्यादा जरूरी': PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर क्या बोले इमाम इलियासी? छात्रों को दी नसीहत
Sun, 02 Aug 2026 10:24 AM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 02 Aug 2026 10:24 AM IST
सार
ऑल इंडिया इमाम संगठन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पीएम मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन उसकी अपनी मर्यादा होनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अभद्र भाषा के प्रयोग को अनुचित बताया।
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मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने जताई नाराजगी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
ऑल इंडिया इमाम संगठन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में अपशब्दों के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री हैं और अभिभावक के तौर पर हम उन्हें देखते हैं। ये अपशब्द सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए नहीं थे, बल्कि देश का भी अपमान हुआ है।
इमाम उमर अहमद इलियासी ने अपने एक वीडियो संदेश में कहा, "मेरी भी एक जिम्मेदारी है और एक इमाम के तौर पर मैं अपना फर्ज निभाना चाहता हूं। पिछले एक महीने में, पूरे देश और दुनिया ने 20 जुलाई से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों को देखा है। हर किसी को विरोध करने का अधिकार है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन यह सब शालीनता के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।"
नीट प्रदर्शन पर क्या बोले उमर अहमद इलियासी?
उन्होंने कहा, "विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। सरकारी बसों और गाड़ियों में आग लगा दी गई, सड़कें जाम कर दी गईं और आगजनी की घटनाएं हुईं। सरकारी संपत्ति हम सबकी है, इसलिए ऐसी हरकतें आखिरकार जनता का ही नुकसान करती हैं।"
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इमाम इलियासी ने कहा कि आंदोलन या विरोध करना चाहिए। परिवारों के अंदर भी विरोध और मतभेद होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि आप अपने बड़ों का अपमान करें। जिस तरह आंदोलन के अंदर बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शब्दों का इस्तेमाल किया, ये अमर्यादित थे। उन्हें और उनकी माता जी के लिए बुरा-भला कहा गया। यह सब देखकर बुरा लगा है। हमारी भारतीय संस्कृति है कि बड़ों का सम्मान करना चाहिए।
अभद्र भाषा पर उठाए सवाल, पीएम के अपमान पर क्या कहा?
उमर अहमद इलियासी ने आगे कहा, "नरेंद्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री हैं और अभिभावक के तौर पर हम उन्हें देखते हैं। आंदोलन में जिस तरह की चीजें पूरी दुनिया ने देखी, समझें कि ये अपशब्द सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए नहीं थे, बल्कि देश का भी अपमान हुआ है।"
उन्होंने यह भी कहा कि आज नरेंद्र मोदी हमारे देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं और उन्हें 37 देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिले हैं। यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। भारत के इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री को ऐसा सम्मान नहीं मिला है। जब आप उनका अपमान करते हैं और उनके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो क्या हमारे संस्कार हमें यही सिखाते हैं? क्या यही हमारी संस्कृति है? हम क्या संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं?
उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा, "मैं देख रहा था, जिस तरह आंदोलन हो रहा था। इसको लेकर मैं दुखी हूं। आपने प्रधानमंत्री का जिस तरह अपमान किया है, उससे भारत का भी अपमान हुआ है।"
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इमाम उमर अहमद इलियासी ने अपने एक वीडियो संदेश में कहा, "मेरी भी एक जिम्मेदारी है और एक इमाम के तौर पर मैं अपना फर्ज निभाना चाहता हूं। पिछले एक महीने में, पूरे देश और दुनिया ने 20 जुलाई से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों को देखा है। हर किसी को विरोध करने का अधिकार है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन यह सब शालीनता के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।"
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नीट प्रदर्शन पर क्या बोले उमर अहमद इलियासी?
उन्होंने कहा, "विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। सरकारी बसों और गाड़ियों में आग लगा दी गई, सड़कें जाम कर दी गईं और आगजनी की घटनाएं हुईं। सरकारी संपत्ति हम सबकी है, इसलिए ऐसी हरकतें आखिरकार जनता का ही नुकसान करती हैं।"
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इमाम इलियासी ने कहा कि आंदोलन या विरोध करना चाहिए। परिवारों के अंदर भी विरोध और मतभेद होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि आप अपने बड़ों का अपमान करें। जिस तरह आंदोलन के अंदर बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शब्दों का इस्तेमाल किया, ये अमर्यादित थे। उन्हें और उनकी माता जी के लिए बुरा-भला कहा गया। यह सब देखकर बुरा लगा है। हमारी भारतीय संस्कृति है कि बड़ों का सम्मान करना चाहिए।
अभद्र भाषा पर उठाए सवाल, पीएम के अपमान पर क्या कहा?
उमर अहमद इलियासी ने आगे कहा, "नरेंद्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री हैं और अभिभावक के तौर पर हम उन्हें देखते हैं। आंदोलन में जिस तरह की चीजें पूरी दुनिया ने देखी, समझें कि ये अपशब्द सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए नहीं थे, बल्कि देश का भी अपमान हुआ है।"
उन्होंने यह भी कहा कि आज नरेंद्र मोदी हमारे देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं और उन्हें 37 देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिले हैं। यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। भारत के इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री को ऐसा सम्मान नहीं मिला है। जब आप उनका अपमान करते हैं और उनके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो क्या हमारे संस्कार हमें यही सिखाते हैं? क्या यही हमारी संस्कृति है? हम क्या संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं?
उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा, "मैं देख रहा था, जिस तरह आंदोलन हो रहा था। इसको लेकर मैं दुखी हूं। आपने प्रधानमंत्री का जिस तरह अपमान किया है, उससे भारत का भी अपमान हुआ है।"