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Explainer: आधार मान्य नहीं, पासपोर्ट से पहचान नहीं, फिर भारतीयता का सबूत क्या; बाकी दस्तावेजों की जरूरत क्यों?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 25 Jun 2026 02:41 PM IST
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सार

विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, ये सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है। 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस सरकार ने कहा कि पासपोर्ट केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा के लिए जारी किया जाता है। विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद से ही देश में इस बात को लेकर चर्चाएं जारी हैं कि अगर विदेश में किसी के भारतीय होने का प्रमाण माना जाने वाला पासपोर्ट भी नागरिकता साबित करने के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता तो आखिर किसी का भारतीय होना सिद्ध कैसे होगा? आइये जानते हैं इसका जवाब...

Citienship Proof in India Passport valid Aadhaar PAN Card Voter ID Birth Certificate Birth in India Illegal
पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

'भारत में नागरिकता का प्रमाण कैसे दिया जा सकता है?' बुधवार को जब विदेश मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी कर यह कहा कि पासपोर्ट सिर्फ यात्रा का दस्तावेज है और यह देश की नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस मच गई। आम लोगों से लेकर संगीतकार जावेद अख्तर और विपक्ष के कई नेताओं ने भी नागरिकता के सबूत को लेकर सवाल पूछे। हालांकि, कहीं भी यह साफ नहीं हो सका कि आखिर देश का कानून नागरिकता पर क्या कहता है और किन दस्तावेजों को इसका प्रमाण माना जा सकता है। 


आइये जानते हैं कि विदेश मंत्रालय का पूरा बयान क्या रहा है, जिसे लेकर देश में नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों पर बहस छिड़ गई है? अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता तो फिर भारतीयता का सबूत क्या हो सकता है? इससे जुड़ा कानून क्या कहता है? 
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पहले जानें- क्या है विदेश मंत्रालय का पूरा बयान?

  • विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। 
  • विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
  • मंत्रालय ने अपने बयान में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का हवाला दिया। इस प्रावधान के तहत केंद्र सरकार अगर जरूरी समझे तो सार्वजनिक हित में किसी गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है। इसी कानूनी स्थिति के कारण एक पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का पूर्ण या अचूक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
  • विदेश मंत्रालय ने कहा कि कानूनी रूप से भारतीय नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है, जबकि पासपोर्ट शुरुआत से ही पासपोर्ट अधिनियम के तहत आते हैं।

ये भी पढ़ें: Passport: 'पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा', सरकार ने 56 साल पुराने कानून का क्यों दिया हवाला?

Citienship Proof in India Passport valid Aadhaar PAN Card Voter ID Birth Certificate Birth in India Illegal
पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं। - फोटो : अमर उजाला

अगर विदेश में पासपोर्ट ही पहचान बताता है तो भारत में यह नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं?

विदेश में भारतीय पासपोर्ट किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता और पहचान स्थापित करता है, लेकिन भारत के अंदर इसे कानूनी रूप से नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाता। इसकी तीन बड़ी वजहें हैं...

1. गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करने का प्रावधान

पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के तहत, केंद्र सरकार के पास यह विशेष अधिकार है कि वह सार्वजनिक हित में किसी ऐसे व्यक्ति को भी भारतीय पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है, जो भारत का नागरिक नहीं है इसलिए पासपोर्ट का होना नागरिकता का अचूक और अंतिम प्रमाण नहीं हो सकता। सीधे शब्दों में समझें तो आम परिस्थितियों में पासपोर्ट विदेश और देश दोनों में ही नागरिकता साबित कर सकता है, लेकिन अगर भारत में किसी व्यक्ति की नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाए तो सिर्फ पासपोर्ट ही अंतिम प्रमाण नहीं होगा। इसके लिए अन्य साक्ष्यों की जरूरत भी पड़ेगी। 
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2. नागरिकता नहीं, विदेश यात्रा के लिए जारी होता है पासपोर्ट

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना।
 
इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है। 

3. पासपोर्ट के लिए अलग, नागरिकता के लिए अलग कानून

  • पासपोर्ट, भारत में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत आते हैं, जबकि भारतीय नागरिकता का निर्धारण पूरी तरह से नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के आधार पर होता है।इस कानून के तहत नागरिकता सिर्फ जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण यानी एक लंबी अवधि तक भारत में रहने के बाद या किसी क्षेत्र के भारत में शामिल होने के आधार पर ही मिलती है। अदालतें स्पष्ट कर चुकी हैं कि नागरिकता केवल किसी एक दस्तावेज के होने से नहीं, बल्कि इन कानूनी योग्यताओं के आधार पर तय होती है।
  • पासपोर्ट अधिनियम की धारा पांच के तहत, पासपोर्ट आमतौर पर उचित जांच के बाद भारतीय नागरिकों को ही जारी किए जाते हैं। इस वजह से पासपोर्ट को नागरिकता का एक बहुत मजबूत सबूत माना जाता है, लेकिन यह हर परिस्थिति में अपने आप में निर्णायक प्रमाण नहीं है और इस प्रमाण को चुनौती दी सकती है।

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भारत में नागरिकता साबित करने के तरीके। - फोटो : अमर उजाला

अगर पासपोर्ट प्रमाण नहीं, तो फिर भारतीयता का सबूत क्या हो सकता है? 

सच्चाई यह है कि भारत में ऐसा कोई भी एक यूनिवर्सल या एकल दस्तावेज नहीं है, जो हर नागरिक के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण हो। नागरिकता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आपने इसे कैसे हासिल किया है और आपका जन्म कब-कहां हुआ है।


1. क्या है नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण?

कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

2. जन्म से नागरिकों के लिए क्या है प्रमाण? 

ज्यादातर भारतीयों को नागरिकता जन्म या वंश के आधार पर मिलती है। ऐसे मामलों में नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता के दस्तावेजों के संयोजन की जरूरत होती है, जो अलग-अलग समय के कानूनों पर निर्भर करता है।

26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच जन्मे लोग
इनके लिए केवल जन्म प्रमाण पत्र ही पूर्ण प्रमाण है, क्योंकि इस दौरान भारत की धरती पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति स्वतः ही भारतीय नागरिक माना जाता था।

1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे लोग
इनके लिए जन्म प्रमाण पत्र के साथ यह साबित करना जरूरी है कि जन्म के समय माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक था।

3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोग 
इन्हें जन्म प्रमाण पत्र के साथ यह साबित करना होता है कि माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हैं या कोई एक भारतीय नागरिक है और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं है।


3. अन्य सहायक या विरासती दस्तावेज

जब नागरिकता पर विवाद होता है तो अदालतों और ट्रिब्यूनलों की तरफ से नागरिकता साबित करने के लिए पुराने या विरासती दस्तावेजों को सबूत माना जाता है।  जैसा कि असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) बनाने के दौरान हुआ। इनमें पुराने भूमि रिकॉर्ड, पैतृक संपत्ति के कागजात, पुरानी मतदाता सूचियां, और पुराने स्कूल प्रमाण पत्र शामिल हैं, जो समय के साथ भारत में निवास और पारिवारिक संबंधों को स्थापित करते हैं।

तो फिर आधार, पैन, वोटर आईडी कार्ड का क्या; अदालतों का क्या रुख?

भारत सरकार और अदालतों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड भारतीय नागरिकता के निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। इन दस्तावेजों को कुछ खास मकसदों और सेवाओं के लिए जारी किया जाता है, न कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने के लिए। 

1. आधार कार्ड की क्या स्थिति?

  • आधार कार्ड सिर्फ व्यक्ति की पहचान स्पष्ट करने और भारत में निवास का प्रमाण है। इससे नागरिकता या राष्ट्रीयता साबित नहीं होती और अगर किसी की नागरिकता को चुनौती दी जाती है तो सिर्फ आधार के जरिए इसे साबित नहीं किया जा सकता। 
  • कोई भी व्यक्ति, यहां तक कि विदेशी नागरिक भी, जो आवेदन की तारीख से ठीक पहले 12 महीनों में 182 दिन या उससे अधिक समय तक भारत में रहा हो, वह आधार कार्ड प्राप्त करने का पात्र हो जाता है।

कोर्ट ने क्या कहा: साल 2025 में बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से यह निर्देश देने से इनकार कर दिया था कि आधार को नागरिकता के एकमात्र प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए। अदालत का कहना था कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान साबित करने के लिए किया जा सकता है, नागरिकता साबित करने के लिए नहीं।

2. पैन कार्ड

पैन कार्ड (परमानेंट अकाउंट नंबर) एक वित्तीय और टैक्स पहचान दस्तावेज है। आयकर विभाग इसे भारत में टैक्स देने वाली किसी भी इकाई को जारी करता है। यानी सीधे तौर पर जो भी व्यक्ति या संस्थान भारत में टैक्स संबंधित मामलों से जुड़ा होगा, वह पैन का हकदार होगा। इसमें विदेशी नागरिक, अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) और विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। 

कोर्ट ने क्या कहा: पैन कार्ड केवल यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति भारत में आय अर्जित कर रहा है या टैक्स चुका रहा है; यह न तो नागरिकता का प्रमाण है और न ही भारत में निवास का। 2020 में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने भी अपने एक फैसले में स्पष्ट किया था कि पैन कार्ड और बैंक के दस्तावेज भारतीय नागरिकता सिद्ध नहीं करते।

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भारत में पहचान और आवास के प्रमाण। - फोटो : अमर उजाला

3. वोटर आईडी कार्ड

वोटर आईडी कार्ड मुख्य रूप से मतदाता सूची में नाम दर्ज होने और पहचान का प्रमाण है। इसमें एक पेच यह हैं कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही वोट देने का अधिकार है, लेकिन मतदाता सूची में धोखाधड़ी या गलती से भी नाम दर्ज हो सकता है। ऐसे में अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो वोटर आईडी कार्ड को चुनौती दी जा सकती है और रद्द भी किया जा सकता है।

कोर्ट ने क्या कहा: 2025 में एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल वोटर आईडी या आधार कार्ड रखने से किसी को खुद-ब-खुद नागरिकता नहीं मिल जाती है। ये दस्तावेज नागरिकता अधिनियम के बुनियादी नियमों को नहीं बदल सकते। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब नागरिकता खत्म होना नहीं है, इसलिए इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

साल 2020 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद (राज्यसभा) में एक सवाल के जवाब में साफ कर दिया था कि सरकार आधार, पासपोर्ट, वोटर आईडी और पैन कार्ड में से किसी को भी नागरिकता सिद्ध करने का अंतिम या पूर्ण दस्तावेज नहीं मानती है। ये दस्तावेज सिर्फ सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने या अलग-अलग कार्यों- (जैसे वोट देने या टैक्स भरने) के लिए हैं। किसी भी व्यक्ति की नागरिकता का कानूनी निर्धारण केवल नागरिकता अधिनियम, 1955 और जन्म या वंश से जुड़ी योग्यताओं के आधार पर ही होता है।
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