Jairam Ramesh: खनन नीति में हुए बदलाव की कांग्रेस ने की आलोचना, जयराम रमेश बोले- ये मोदी सरकार का नया झटका
कांग्रेस ने गैर-कोयला खनन परियोजनाओं से जुड़े पर्यावरण मंजूरी नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि नए नियमों के तहत अब भूमि अधिग्रहण से पहले ही पर्यावरण मंजूरी ली जा सकेगी, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कमजोर होगा।
विस्तार
कांग्रेस ने गैर-कोयला खनन परियोजनाओं से संबंधित पर्यावरण मंजूरी नियमों में बदलाव को लेकर सरकार की आलोचन की है। पर्यावरण मंत्रालय के हालिया ज्ञापन के अनुसार, गैर-कोयला खनन परियोजना विकासकर्ताओं को पर्यावरण मंजूरी के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। अब तक, मंत्रालय को भूमि अधिग्रहण का प्रमाण चाहिए होता था। कांग्रेस ने कहा कि यह जिम्मेदार पर्यावरण प्रशासन के लिए मोदी सरकार द्वारा एक और झटका है।
कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा, "गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए नीति यह रही है कि पहले कानून के अनुसार भूमि अधिग्रहण पूरा किया जाए। उसके बाद ही पर्यावरण संबंधी मंजूरी मांगी जा सकती है। हालांकि, 18 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा इस नीति में बदलाव किया गया और अब गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले पर्यावरण संबंधी मंजूरी मांगी जा सकती है।"
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पूरी जानकारी के बिना सार्थक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कैसे?- रमेश
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि गैर-कोयला खनन परियोजना के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र की पूरी जानकारी के बिना सार्थक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कैसे किया जा सकता है, यह समझना बहुत मुश्किल है। रमेश ने कहा, "यह नीतिगत बदलाव देश में जिम्मेदार और जवाबदेह पर्यावरण प्रशासन के लिए मोदी सरकार द्वारा लगाया गया एक और झटका है।" पूर्व के नियम पर पुनर्विचार किया गया क्योंकि यह अनुरोध किया गया था कि गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी (ईसी) प्रदान करते समय भूस्वामियों की सहमति पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण की स्थिति को मंजूरी प्रदान करने से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
मंत्रालय के एक आधिकारिक ज्ञापन में क्या कहा है?
मंत्रालय के एक आधिकारिक ज्ञापन में कहा गया "मामले को गैर-कोयला खनन विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) के विचारार्थ भेजा गया था। विचार-विमर्श के बाद क्षेत्रीय ईएसी ने पाया कि गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए ईसी प्रदान करते समय भूस्वामियों से सहमति को अलग करने का अनुरोध उचित प्रतीत होता है और इसे स्वीकार किया जा सकता है। इसमें आगे कहा गया है, "ईएसी ने अन्य बातों के अलावा यह भी पाया कि कई खनन परियोजनाएं ऐसी हैं जहां ईसी मिलने के बाद खनन कार्य शुरू हो चुका है और आवश्यकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से भूमि अधिग्रहण अभी भी जारी है।"
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आदेश में कहा गया है कि "गैर-कोयला खनन ईएसी की सिफारिशों की जांच की गई और 7 अक्टूबर, 2014 के संशोधित कार्यालय ज्ञापन (ओएम) की अन्य क्षेत्रों पर प्रयोज्यता के संबंध में टिप्पणियां और सुझाव मांगे गए। प्राप्त सुझावों के आधार पर यह पाया गया कि ईसी के मूल्यांकन के समय भूमि अधिग्रहण दस्तावेजों पर जोर देना कुछ अन्य परियोजनाओं के लिए व्यावहारिक नहीं हो सकता है।"
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