CWC बैठक: वंदे मातरम पर नहीं बदला कांग्रेस का रुख, पहले दो पद गाएगी; चंदा चोरी पर देशभर में प्रदर्शन का एलान
कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम पर 1937 का अपना रुख बरकरार रखा है। पार्टी के कार्यक्रमों में अब सिर्फ पहले दो पद गाए जाएंगे। वहीं, CWC ने राम मंदिर चंदे के मुद्दे को लेकर देशभर में प्रदर्शन का फैसला किया है।
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कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में वंदे मातरम को लेकर पार्टी ने अपना पुराना रुख साफ कर दिया। कांग्रेस ने 1937 के फैसले को बरकरार रखते हुए तय किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के सिर्फ पहले दो पद ही गाए जाएंगे। वहीं, बैठक में राम मंदिर चंदे के मुद्दे को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ और इसे देशभर में जमीनी स्तर तक ले जाने की रणनीति तय की गई।
1937 में कांग्रेस ने क्या फैसला लिया था?
सूत्रों के मुताबिक, CWC की बैठक में वंदे मातरम के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दौरान कई नेताओं ने 1937 में अपनाए गए पार्टी के रुख को दोहराया। कांग्रेस के अनुसार, उसका फैसला अक्तूबर 1937 में CWC की ओर से पारित प्रस्ताव पर आधारित है। उस समय पार्टी ने राष्ट्रीय सभाओं में वंदे मातरम के सिर्फ पहले दो पद गाने का निर्णय लिया था।
राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर क्या फैसला हुआ?
सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने राम मंदिर से जुड़े ‘चंदा चोरी’ के मुद्दे को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का इस्तेमाल लोगों को ध्रुवीकृत करने वाले लोग अब पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। वेणुगोपाल के मुताबिक, कांग्रेस इस मुद्दे को जमीनी स्तर तक ले जाएगी। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस समितियों को गांव और पंचायत स्तर पर इसे उठाने का निर्देश दिया गया है। वेणुगोपाल के मुताबिक, सीडब्ल्यूसी ने प्रदेश कांग्रेस समितियों को राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर पूरे देश में प्रदर्शन करने का निर्देश दिया है।
CWC बैठक में क्या हुआ?
नई दिल्ली के इंदिरा भवन में हुई सीडब्ल्यूसी बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। बैठक में पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बैठक में 88 नेताओं ने हिस्सा लिया, जबकि 33 नेताओं ने चर्चा में अपनी बात रखी। बैठक में कार्यसमिति के सदस्यों के साथ स्थायी और विशेष आमंत्रित सदस्य तथा कांग्रेस के चार मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। सीडब्ल्यूसी बैठक में वरिष्ठ नेताओं के अलावा कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। इनमें तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी, केरल के वी.डी. सतीशन, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार शामिल रहे।
पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस क्या करेगी?
वेणुगोपाल ने कहा कि बैठक में पेपर लीक और इसके खिलाफ देश में हुए आंदोलनों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन आंदोलनों से जिस तरह निपटा, उस पर भी सीडब्ल्यूसी में विचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि संसद के मानसून सत्र में विपक्ष सफल रहा और सरकार दबाव में रही।
शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव चाहती है कांग्रेस?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से शिक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने को कहा है। इसका उद्देश्य शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव के लिए एक रोडमैप तैयार करना है। मुख्यमंत्रियों से इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर खरगे को सौंपने को कहा गया है। कांग्रेस ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को आगे जारी रखने का फैसला किया है। पार्टी के मुताबिक, ऐसे कार्यक्रम अब 800 शहरों में आयोजित किए जाएंगे। इनमें से कुछ कार्यक्रमों का नेतृत्व राहुल गांधी खुद करेंगे।
अरुणाचल प्रदेश में चीन के मुद्दे पर क्या कहा?
सीडब्ल्यूसी बैठक में अरुणाचल प्रदेश में ‘चीनी घुसपैठ’ के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में ‘सरेंडर पॉलिसी’ अपना रही है। पार्टी ने इस मुद्दे को भी सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाया है।
महिला आरक्षण और शुद्धीकरण पर कांग्रेस ने क्या कहा?
वेणुगोपाल ने बताया कि CWC में महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख दोहराया गया। पार्टी की मांग है कि महिलाओं को आरक्षण लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही लागू किया जाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उत्तराखंड में खरगे के कार्यक्रम के बाद हुए कथित ‘शुद्धीकरण’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश से माफी मांगने की मांग की।
जातीय जनगणना के फॉर्म में OBC कॉलम नहीं होने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
केसी वेणुगोपाल ने जातीय जनगणना के प्रश्नावली में OBC कॉलम नहीं होने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पहले भी चर्चा कर चुकी है और पार्टी अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और सरकार से पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब चाहती है।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि OBC के लिए अलग कॉलम नहीं होने से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि इससे ऐसा लगता है कि सरकार जातीय जनगणना को ही विफल करना चाहती है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जातीय जनगणना में इस तरह की स्थिति क्यों पैदा की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को एक बार फिर उठाएगी।