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'लोकतंत्र पर करारा प्रहार': SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर माकपा ने उठाए सवाल, चलाएंगे देशव्यापी अभियान

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Thu, 28 May 2026 06:40 PM IST
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सार

माकपा ने मतदाता सूची संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। पार्टी का आरोप है कि इससे गरीबों और अल्पसंख्यकों के वोट के अधिकार छीने जा रहे हैं। माकपा ने इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने का फैसला किया है।

CPIM Criticizes Supreme Court SIR Verdict: voter list revision democracy rights nrc election commission
CPI (M) - फोटो : ANI
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विस्तार

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने इसे 'न्याय का मजाक' और 'लोकतंत्र पर गहरा प्रहार' बताया है। पार्टी के पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक बयान में दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को सही ठहराकर उस चीज को संवैधानिक वैधता दे दी है, जिसे पार्टी ने कमजोर नागरिकों के बड़े पैमाने पर वोट देने के अधिकार छीनने, उन्हें बाहर करने और उन्हें डराने-धमकाने जैसा बताया था।


पार्टी ने क्या कहा?
पार्टी का कहना है कि इस फैसले से सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि क्या वोट देने के अधिकार को नौकरशाही के संदेह और दस्तावेजों की जांच के अधीन रखा जा सकता है। माकपा का आरोप है कि इस संशोधन प्रक्रिया ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत को कमजोर किया है। इसके कारण गरीब, प्रवासी, अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं क्योंकि उनके पास मांगे गए जरूरी दस्तावेज नहीं थे।
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पार्टी ने पारदर्शिता की कमी का लगाया आरोप
पार्टी ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। बयान में कहा गया कि कोर्ट ने उन रिपोर्टों को नजरअंदाज कर दिया जिनमें बिना किसी उचित नोटिस के वैध मतदाताओं के नाम हटाने की बात कही गई थी। पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए माकपा ने कहा कि वहां बिना जांचे गए सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम के आधार पर 'तार्किक विसंगति' की अवधारणा पेश की गई। राज्य में एक करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को संदिग्ध श्रेणी में डाल दिया गया। इनमें से 27 लाख लोगों ने कानूनी मदद लेने के बावजूद अपना वोट देने का अधिकार खो दिया।
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माकपा ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश पर भी आपत्ति जताई है जिसमें चुनाव आयोग को हटाए गए मतदाताओं के नाम नागरिकता जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को सौंपने को कहा गया है। पार्टी का तर्क है कि यह कदम पिछले दरवाजे से नेशनल रजिस्ट्री ऑफ सिटीजन्स (NRC) को लागू करने जैसा है। पार्टी ने यह भी कहा कि यह फैसला चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर जनता के गिरते भरोसे को बहाल करने में नाकाम रहा है।

पार्टी ने देशव्यापी अभियान शुरू करने का किया एलान
अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया में माकपा ने घोषणा की है कि वह वोट के अधिकार की रक्षा और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर देशव्यापी अभियान शुरू करेगी। पार्टी की हालिया केंद्रीय समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस संघर्ष में माकपा समान विचारधारा वाले दलों और ताकतों को भी साथ जोड़ने की कोशिश करेगी।
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