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CRPF: क्यों चर्चा में हैं सीआरपीएफ के तीन अफसरों का मणिपुर तबादला, परिजनों के प्रदर्शन में भाग लेने की सजा!
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सार
सीआरपीएफ के तीन अधिकारियों के मणिपुर तबादले पर हंगामा हो गया है। दरअसल आरोप है कि इन अधिकारियों के परिजनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लिया। हालांकि सीआरपीएफ महानिदेशालय से इन तबादलों का कारण प्रशासनिक बताया गया है।
पुलिस अफसरों के तबादले।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में एकाएक तीन कैडर अफसरों का 'मणिपुर' में हुआ तबादला, चर्चा का विषय बना हुआ है। बल के पूर्व कैडर अफसरों का आरोप है कि सीआरपीएफ महानिदेशालय उन कैडर अफसरों और जवानों को टारगेट कर रहा है, जिनके परिजनों ने सीएपीएफ के नए कानून के विरोध में और लंबित पड़ी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से किए गए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। सीआरपीएफ महानिदेशालय ने इन तीनों अफसरों के ट्रांसफर ऑर्डर को लेकर तर्क दिया है कि ये तबादले 'प्रशासनिक' कारणों से किए गए हैं।
पिछले सप्ताह हुआ तीन टूआईसी का तबादला
सीआरपीएफ के टूआईसी प्रमोद चौधरी, जो 208 बटालियन 'कोबरा' में तैनात थे, उन्हें प्रशासनिक कारणों के चलते मणिपुर स्थित 69वीं बटालियन में भेजा गया है। दीपेंद्र सिंह राजपूत, टूआईसी को 23वीं बटालियन से 58वीं बटालियन में ट्रांसफर किया गया है। यह बटालियन भी मणिपुर में है। तीसरे टूआईसी नरेंद्र यादव हैं, जिन्हें बल मुख्यालय से मणिपुर की 87वीं बटालियन में भेजा गया है। इन तीनों अफसरों के ट्रांसफर ऑर्डर पर 'डीआईजी' पर्स के हस्ताक्षर हैं। ट्रांसफर ऑर्डर में इनके तबादले का कारण 'प्रशासनिक' बताया गया है।
11 साल में ऐसा पहली बार हुआ है
'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि 11 साल में सीएपीएफ जवानों की लंबित पड़ी मांगों को लेकर सैंकड़ों बार धरना प्रदर्शन हुआ है, लेकिन सरकार ने कभी बदले की भावना से कार्रवाई नहीं की। अब ये पहली बार देखने को मिल रहा है, जब सीआरपीएफ महानिदेशालय उन जवानों और अफसरों के परिजनों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से किए गए प्रदर्शन में भाग लिया था। रणबीर सिंह ने एक्स पर लिखा, भगवान उन बाबूओं को सद्बुद्धि दे जो वीरांगनाओं के फोटो मिलान कर चिह्नित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी आधार पर कैडर ऑफिसर्स की पोस्टिंग हो रही है। पूर्व अर्धसैनिक परिवार इसकी कड़ी भर्त्सना करते हैं।
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सीएपीएफ में ये चुनिंदा कथित दंडात्मक तबादले 16 मई को हुए हैं। तीन वरिष्ठ कैडर अफसरों के ये तबादले, बल के सामान्य ग्रीष्मकालीन तबादलों का हिस्सा नहीं हैं। ये लक्षित तबादले हैं। वजह, इन अधिकारियों के परिजनों ने राजघाट पर सीएपीएफ कर्मियों के लिए न्याय की मांग करते हुए एक शांतिपूर्ण और कानूनी मार्च में भाग लिया था।
कानून के दायरे में अपनी मांग रखी है
सीआरपीएफ के पूर्व आईजी केके शर्मा बताते हैं कि वे अपनी मांग कानून के दायरे में रख रहे हैं। वे एक अनुशासित बल के सदस्य रहे हैं। पूर्व कैडर अफसरों ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं दी हैं। बॉर्डर पर दुश्मन को धूल चटाई है। देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए केंद्रीय बलों के जांबाजों ने कुर्बानी दी है। मौजूदा समय में कैडर अफसरों को 15 साल में पहली पदोन्नति नहीं मिल रही। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन बहाली का आदेश दिया तो सरकार, उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। अब कैडर अफसरों के परिजन शांतिपूर्ण तरीके से और कानून के दायरे में रहते हुए अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं तो उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
मनोबल गिराने वाली रणनीति
बीएसएफ के पूर्व कमांडेंट रतन चंद शर्मा ने एक्स पर लिखा, ऐसे उपाय उन लोगों द्वारा अपनाए जाते हैं, जिनमें नेतृत्व के गुण नहीं होते। जो अधीनस्थों का सम्मान और विश्वास अर्जित करने में असमर्थ होते हैं। संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करने वाले जीवनसाथी के कार्य के लिए अधीनस्थ को कैसे दंडित किया जा सकता है। ये कमजोर और गैर-पेशेवर लोगों द्वारा अपनाई गई मनोबल गिराने वाली रणनीति है।
9 अप्रैल को राजघाट पर एकत्रित हुए थे परिजन
'सीएपीएफ बिल' को लेकर 9 अप्रैल को दिल्ली में राजघाट पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व अफसरों और जवानों के परिजनों के विरोध की गूंज सुनाई दी थी। महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026 का विरोध किया गया। पूर्व अफसरों एवं उनके परिजनों ने इस बिल को काले कानून की संज्ञा दी। हालांकि इससे पहले उस बिल को संसद ने मंजूरी दे दी थी। उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से मांग की थी कि इस बिल को खत्म किया जाए। जवानों से लेकर कैडर अफसर, ये सभी पदोन्नति में पिछड़ रहे हैं। अगर सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो सीएपीएफ कार्मिकों के परिजन 15 जून को इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक कूच करेंगे। राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर उनसे केंद्रीय बलों के जांबाज कैडर अफसरों और जवानों के करियर को खराब होने से बचाने की गुहार लगाई जाएगी।
पिछले सप्ताह हुआ तीन टूआईसी का तबादला
सीआरपीएफ के टूआईसी प्रमोद चौधरी, जो 208 बटालियन 'कोबरा' में तैनात थे, उन्हें प्रशासनिक कारणों के चलते मणिपुर स्थित 69वीं बटालियन में भेजा गया है। दीपेंद्र सिंह राजपूत, टूआईसी को 23वीं बटालियन से 58वीं बटालियन में ट्रांसफर किया गया है। यह बटालियन भी मणिपुर में है। तीसरे टूआईसी नरेंद्र यादव हैं, जिन्हें बल मुख्यालय से मणिपुर की 87वीं बटालियन में भेजा गया है। इन तीनों अफसरों के ट्रांसफर ऑर्डर पर 'डीआईजी' पर्स के हस्ताक्षर हैं। ट्रांसफर ऑर्डर में इनके तबादले का कारण 'प्रशासनिक' बताया गया है।
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11 साल में ऐसा पहली बार हुआ है
'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि 11 साल में सीएपीएफ जवानों की लंबित पड़ी मांगों को लेकर सैंकड़ों बार धरना प्रदर्शन हुआ है, लेकिन सरकार ने कभी बदले की भावना से कार्रवाई नहीं की। अब ये पहली बार देखने को मिल रहा है, जब सीआरपीएफ महानिदेशालय उन जवानों और अफसरों के परिजनों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से किए गए प्रदर्शन में भाग लिया था। रणबीर सिंह ने एक्स पर लिखा, भगवान उन बाबूओं को सद्बुद्धि दे जो वीरांगनाओं के फोटो मिलान कर चिह्नित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी आधार पर कैडर ऑफिसर्स की पोस्टिंग हो रही है। पूर्व अर्धसैनिक परिवार इसकी कड़ी भर्त्सना करते हैं।
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कानून के दायरे में अपनी मांग रखी है
सीआरपीएफ के पूर्व आईजी केके शर्मा बताते हैं कि वे अपनी मांग कानून के दायरे में रख रहे हैं। वे एक अनुशासित बल के सदस्य रहे हैं। पूर्व कैडर अफसरों ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं दी हैं। बॉर्डर पर दुश्मन को धूल चटाई है। देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए केंद्रीय बलों के जांबाजों ने कुर्बानी दी है। मौजूदा समय में कैडर अफसरों को 15 साल में पहली पदोन्नति नहीं मिल रही। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन बहाली का आदेश दिया तो सरकार, उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। अब कैडर अफसरों के परिजन शांतिपूर्ण तरीके से और कानून के दायरे में रहते हुए अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं तो उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
मनोबल गिराने वाली रणनीति
बीएसएफ के पूर्व कमांडेंट रतन चंद शर्मा ने एक्स पर लिखा, ऐसे उपाय उन लोगों द्वारा अपनाए जाते हैं, जिनमें नेतृत्व के गुण नहीं होते। जो अधीनस्थों का सम्मान और विश्वास अर्जित करने में असमर्थ होते हैं। संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करने वाले जीवनसाथी के कार्य के लिए अधीनस्थ को कैसे दंडित किया जा सकता है। ये कमजोर और गैर-पेशेवर लोगों द्वारा अपनाई गई मनोबल गिराने वाली रणनीति है।
9 अप्रैल को राजघाट पर एकत्रित हुए थे परिजन
'सीएपीएफ बिल' को लेकर 9 अप्रैल को दिल्ली में राजघाट पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व अफसरों और जवानों के परिजनों के विरोध की गूंज सुनाई दी थी। महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026 का विरोध किया गया। पूर्व अफसरों एवं उनके परिजनों ने इस बिल को काले कानून की संज्ञा दी। हालांकि इससे पहले उस बिल को संसद ने मंजूरी दे दी थी। उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से मांग की थी कि इस बिल को खत्म किया जाए। जवानों से लेकर कैडर अफसर, ये सभी पदोन्नति में पिछड़ रहे हैं। अगर सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो सीएपीएफ कार्मिकों के परिजन 15 जून को इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक कूच करेंगे। राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर उनसे केंद्रीय बलों के जांबाज कैडर अफसरों और जवानों के करियर को खराब होने से बचाने की गुहार लगाई जाएगी।