Cyber Crime: 23.61 लाख मामलों में साइबर ठगों से बचाए 8189 करोड़ रुपये, 12.21 लाख सिम कार्ड तो 3 लाख IMEI नंबर
केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने देश में साइबर अपराध की रोकथाम, उसका पता लगाने, जांच/अभियोजन के लिए एक ढांचा एवं प्रणाली विकसित करने के मकसद से वर्ष 2018 में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की थी। अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी अधिनियम के अंतर्गत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' को वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। मौजूदा समय में इस केंद्र के सार्थक नतीजे सामने आ रहे हैं। गत वर्ष 31 दिसंबर तक, साइबर अपराध की 23.61 लाख से अधिक शिकायतों में 8189 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाई जा चुकी है। पुलिस द्वारा रिपोर्ट किए गए मामलों में भारत सरकार ने 12.21 लाख से अधिक सिम कार्ड और 3.03 लाख आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए हैं।
ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज करने में सहायता देने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' चालू किया गया है। I4C ने बहुत ही कम समय में साइबर अपराधों से निपटने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय विकसित करने की राष्ट्र की सामूहिक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में काम किया है। 1 जुलाई, 2024 से I4C को गृह मंत्रालय के एक संबद्ध कार्यालय के रूप में स्थापित किया गया है। I4C नागरिकों के लिए साइबर अपराध से संबंधित सभी मुद्दों से निपटने पर ध्यान केंद्रित करता है। इसमें विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों और हितधारकों के बीच समन्वय में सुधार, क्षमता निर्माण व जागरूकता आदि शामिल हैं।
साइबर अपराधियों की पहचान करने वाले संदिग्धों का रजिस्टर I4C द्वारा बैंकों/वित्तीय संस्थानों के सहयोग से 10.09.2024 को शुरू किया गया है। 31.12.2025 तक, बैंकों से प्राप्त 21.65 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं का डेटा और 26.48 लाख लेयर 1 म्यूल खातों का डेटा संदिग्ध रजिस्टर में शामिल संस्थाओं के साथ साझा किया गया है। इसके चलते 9055.27 करोड़ रुपये के लेन-देन अस्वीकृत किए गए हैं। समन्वय प्लेटफॉर्म को प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) प्लेटफॉर्म, डेटा भंडार और साइबर अपराध डेटा साझाकरण और विश्लेषण के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करने के लिए चालू किया गया है।
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यह सेंटर विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराध शिकायतों में शामिल अपराधों और अपराधियों के बीच अंतरराज्यीय संबंधों का विश्लेषण-आधारित विवरण प्रदान करता है। 'प्रतिबिंब' मॉड्यूल अपराधियों और अपराध अवसंरचना के स्थानों को मानचित्र पर प्रदर्शित करता है, जिससे संबंधित अधिकारियों को केस से जुड़ी अहम जानकारी मिलती है। यह मॉड्यूल कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आई4सी और अन्य लघु एवं मध्यम उद्यमों से तकनीकी-कानूनी सहायता प्राप्त करने में भी सुविधा प्रदान करता है।
इस तकनीक के जरिए 20,853 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। साइबर जांच सहायता के लिए अभी तक 1,35,074 अनुरोध प्राप्त हुए हैं। केंद्र सरकार ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में ई-एफआईआर दर्ज करने की एक नई पहल शुरू की है। दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और गोवा में साइबर अपराध मामलों में एफआईआर दर्ज करने के लिए 'ई-एफआईआर' प्रणाली लागू की गई है। गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है।
