सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Daughter-in-law demands gold worth Rs 170 crore from in-laws, claim rejected in high-profile domestic violence

Supreme Court: बहू ने ससुराल वालों से मांगा 170 करोड़ का सोना, घरेलू हिंसा के हाईप्रोफाइल केस में दावा खारिज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Tue, 14 Apr 2026 09:33 AM IST
विज्ञापन
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 170 करोड़ रुपये के सोने के दावे वाले वैवाहिक विवाद में महिला का घरेलू हिंसा केस खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना ठोस और स्पष्ट आरोपों के ऐसे मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता और यह कानून का दुरुपयोग है। आइए विस्तार से जानते हैं।

Daughter-in-law demands gold worth Rs 170 crore from in-laws, claim rejected in high-profile domestic violence
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 170 करोड़ रुपये के सोने के दावे से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल वैवाहिक विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए महिला की ओर से दायर घरेलू हिंसा केस को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस और विशिष्ट आरोपों के दर्ज ऐसे मामलों को शुरुआती स्तर पर ही समाप्त कर देना चाहिए। 
Trending Videos


न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि सिर्फ परिवार के सदस्यों के नाम लेकर, बिना उनके किसी प्रत्यक्ष भूमिका के आरोप लगाए, आपराधिक मुकदमा चलाना कानून का दुरुपयोग होगा। अदालत ने इस मामले को गढ़ा गया बताते हुए कड़ी टिप्पणी की। 
विज्ञापन
विज्ञापन

170 करोड़ के सोने का दावा साबित नहीं

मामले में महिला ने आरोप लगाया था कि तलाक समझौते के तहत उसे 120 करोड़ रुपये के गहने और 50 करोड़ रुपये के सोने के बिस्कुट दिए जाने का वादा किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि यह दावा किसी भी आधिकारिक समझौते या दस्तावेज में दर्ज नहीं था और बाद में शिकायत में जोड़ा गया। अदालत ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद माना। 

समझौते से पीछे हटने पर सवाल

कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मई 2024 में हुए समझौते के तहत 1.5 करोड़ रुपये के निपटान सहित कई वित्तीय और संपत्ति संबंधी प्रावधान तय हुए थे, जिन पर आंशिक अमल भी हो चुका था। इसके बावजूद महिला की ओर से तलाक की दूसरी अर्जी से पीछे हटना और बाद में घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करना उचित नहीं पाया गया। 

घरेलू हिंसा के आरोप अस्पष्ट 

अदालत ने कहा कि शिकायत में हिंसा के ठोस विवरण नहीं थे और आरोप सामान्य व अस्थिर थे। यह भी नोट किया गया कि लंबे वैवाहिक जीवन के दौरान पहले कभी ऐसे आरोप नहीं लगाए गए थे, बल्कि समझौते के बाद अचानक शिकायत दर्ज कराई गई। 

कानून के दुरुपयोग पर सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में भावनाओं के आधार पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करना न्याय प्रणाली के दुरुपयोग की ओर ले जाता है और इससे अनावश्यक उत्पीड़न होता है। 

अनुच्छेद 142 के तहत तलाक मंजूर

मामले में लंबे समय से अलग रह रहे दंपति के रिश्ते को 'पूरी तरह टूट चुका' मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह को समाप्त कर दिया। साथ ही, शेष भुगतान और संपत्ति हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। इस फैसले के साथ अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिना ठोस साक्ष्यों के आपराधिक कानून का सहारा लेना स्वीकार्य नहीं होगा और ऐसे मामलों पर शुरुआती स्तर पर ही रोक लगाई जानी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed