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Bihar CM : नीतीश कुमार के बाद बिहार में नई सरकार में किसकी कुर्सी बदलेगी? जो पांच नाम तय, उनकी वजह समझिए
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सार
Bihar News : 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने इस बार पक्के तौर पर इस पद से इस्तीफा दिया है। इस इस्तीफे के साथ ही कुछ दिग्गजों की जिम्मेदारी बदलने की जमीन तैयार हो गई है। जो पांच नाम लगभग तय हैं, उनकी वजह समझाती रिपोर्ट पढ़ें।
24 घंटे में सबकुछ हो जाएगा साफ, नीतीश के इस्तीफे के बाद तेजी से बदलेगा बहुत कुछ।
- फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के पहले ही यह तय हो चुका था कि इस बार भारतीय जनता पार्टी अपना सीएम लाएगी। राज्य में पहली बार। लेकिन, नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देते ही और भी बातें साफ हो गई हैं। नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद बनकर केंद्र की राजनीति में वापसी कर रहे हैं। नए सीएम का नाम सम्राट चौधरी के रूप में सामने आ चुका है। वैसे देखा जाए तो इस इस्तीफे के साथ तय हो गया है कि कई दिग्गजों की कुर्सी बदलने वाली है। मंत्रिपरिषद् में कौन रहेंगे, इसकी चर्चा से अलग यह देखें कि किन पांच दिग्गजों की जिम्मेदारी पर नजर रहेगी।
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सम्राट चौधरी का पद-कद बदलेगा तो क्या-क्यों?
सम्राट चौधरी बिहार भाजपा के अध्यक्ष थे, जब 2020 के जनादेश पर बनी सरकार की वापसी कराते हुए 2024 में नीतीश कुमार ने एनडीए के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम बनाए गए। उसके बाद 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भी वह इस कुर्सी पर कायम रहे। पिछली सरकार में वित्त मंत्री थे तो इस बार गृह विभाग के मंत्री हैं। विभाग पहले बड़ा था, फिर नई सरकार में बेहद खास मिल गया। अब सम्राट चौधरी की कुर्सी बदल रही है। दूसरे दलों से घूमते हुए भाजपा में आने के बाद राज्य की राजनीति में ताकतवर हुए सम्राट चौधरी का नाम सीएम पद की रेस में सबसे आगे चल रहा था। अब वही नाम फाइनल रहा। क्योंकि, उन्हें विकल्पहीन तक कहा जा रहा था। भाजपा विकल्पों में से भी अलग नाम खोजने के लिए चर्चित है, लेकिन इस बार सचमुच विकल्प नहीं मिला। सीएम की कुर्सी पर नीतीश कुमार की भी भाजपाई पसंद भी सम्राट चौधरी ही थे।
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विजय सिन्हा की डिप्टी सीएम की कुर्सी जाएगी?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में भाजपा कोटे से सम्राट चौधरी के अलावा विजय कुमार सिन्हा उप मुख्यमंत्री रहे। अब चूंकि नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया है तो मंत्रिपरिषद् भी भंग हो गई। उप मुख्यमंत्री की कुर्सी जदयू के पास जा रही है, इसलिए माना जा रहा है कि विजय कुमार सिन्हा आगे केवल मंत्री ही रहेंगे। मंत्री रहेंगे, इसमें कोई शक नहीं क्योंकि 14 अप्रैल तक रही एनडीए सरकार में वह सबसे सक्रिय मंत्री हैं। जिन विभागों में हैं, वहां बड़े सुधार अभियान चलाकर चर्चित हैं। इसी चर्चा के कारण उनका भी नाम कई बार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आया, हालांकि बाद में उन्होंने खुद ही कह दिया कि वह रेस में नहीं हैं।
विजय कुमार चौधरी की जिम्मेदारी बदलेगी
नीतीश कुमार के वास्तव में सबसे करीबी मंत्री अगर कोई हैं तो वह जनता दल यूनाईटेड कोटे से मंत्री विजय कुमार चौधरी हैं। जदयू से अगर दो उप मुख्यमंत्री बनाए जाते हैं तो उनमें से एक विजय कुमार चौधरी हों तो आश्चर्य नहीं। अगर जदयू एक उप मुख्यमंत्री बनाए और निशांत कुमार अंतिम तक नहीं मानें तो भी विजय कुमार चौधरी का उप मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है। अगर जदयू एक ही उप मुख्यमंत्री बनाए और निशांत कुमार उसके लिए राजी हो गए तो विजय कुमार चौधरी के लिए दो विकल्प हो सकते हैं, उन्हें विधानसभा का अध्यक्ष बनाया जाए या गृह विभाग का मंत्री। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जीत के बाद भाजपा ने गृह विभाग सीएम नीतीश कुमार से लेकर सम्राट चौधरी को दिया था।
डॉ. प्रेम कुमार की भागदौड़ का फलाफल निकलेगा
अब तक का फॉर्मूला आगे कायम रहा तो एनडीए की नई सरकार में डॉ. प्रेम कुमार सबसे बड़ी मुसीबत में रहेंगे। वह उम्र के आधार पर मंत्रिपरिषद् से बाहर रखे गए और बाद में उन्हें बिहार विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया। डॉ. प्रेम कुमार का नाम भी मुख्यमंत्री की रेस में रहा है, लेकिन अगर वह इस रेस में वास्तव में पहले नंबर पर नहीं रहे तो विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी भी खतरे में रहेगी। नीतीश जब तक मुख्यमंत्री रहे, अपने साथ रहे सबसे बड़े दल को विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी देते रहे हैं। जब महागठबंधन में रहे तो कुर्सी उधर दी और एनडीए में भाजपा को। इस लिहाज से भाजपा पर दबाव रहेगा कि वह नैतिकता दिखाते हुए विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी जदयू को दे। सीएम की रेस में डॉ. प्रेम कुमार का नाम थोड़ा ही उछला, हालांकि उनके संघ मुख्यालय नागपुर जाने की चर्चा को भी इससे जोड़कर देखा गया।
निशांत कुमार अंतिम समय राजी हो भी सकते हैं
जदयू में बाहरी तौर पर 100 प्रतिशत और अंदरूनी तौर पर 60-70 प्रतिशत नेताओं का मानना है कि पार्टी को बचाने के लिए निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। पार्टी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी (राष्ट्रीय अध्यक्ष) नीतीश कुमार खुद निभा रहे हैं। ऐसे में निशांत को पार्टी की जगह सरकार में जिम्मेदारी दिलाने की तैयारी साफ-साफ दिख रही है। उन्हें सीएम बनाने की मांग भी उठी, लेकिन गंभीर चर्चा में जदयू के किसी दिग्गज ने ऐसा नहीं कहा। नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की बात पर पार्टी के वजूद को ध्यान में रखते हुए उन्हें जदयू की सदस्यता आननफानन में दिलाई गई।
ऐसे में अगर उन्हें पार्टी के दिग्गज नेता अंतिम समय में डिप्टी सीएम की कुर्सी संभालने के लिए राजी कर लें तो कोई आश्चर्य नहीं। निशांत न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद् के सदस्य हैं। वह अगर डिप्टी सीएम बनते हैं तो उन्हें छह महीने के अंदर दोनों में से किसी सदन की सदस्यता लेनी होगी। उनके पिता नीतीश कुमार विधान परिषद् से सदस्य थे तो निशांत को भी यह रास्ता दिखाया जा सकता है। हालांकि, कहा यह जा रहा है कि अगर वह डिप्टी सीएम बनते हैं तो विधानसभा उप चुनाव के रास्ते सदन जाने को तैयार होंगे।
