Nitish Kumar: कब से अब तक बिहार के CM रहे नीतीश कुमार? पहली बार महज सात दिन के लिए कुर्सी पर बैठे थे
Bihar News: आज, इस बार इस्तीफे के साथ लगता है कि बिहार की आदत बदल जाएगी। नीतीश कुमार बिहार की पहचान और आदत बन गए थे। सबसे ज्यादा समय तक सीएम रहे। सबसे ज्यादा बार शपथ। सबसे ज्यादा जन-यात्राएं।
विस्तार
जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली थी तो 'बिहारी' गाली थी। बिहार को डर का पर्याय माना जाता था। 2005 में अचानक बहुत कुछ बदला। तब से बदलता ही गया। नीतीश कुमार उसके पहले भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके थे। लेकिन, महज सात दिन ही सीएम की कुर्सी पर बैठे थे। दूसरी बार जब मुख्यमंत्री बने तो फिर किसी ने उनके कदम नहीं रोके। जनता के बीच यात्राएं कीं। जब-जब लोग यह मानने लगे कि नीतीश कुमार इस बार गलती कर गए, तब-तब वह बदलाव के साथ आगे बढ़ते गए। आज उनके इस्तीफे के बाद पहली बार लग रहा है कि वह बिहार की राजनीति में अब वापसी नहीं करेंगे। ऐसे में उनके कार्यकाल से लेकर उनकी यात्राओं के बारे में जानना रोचक है।
Bihar CM : नीतीश कुमार के बाद बिहार में नई सरकार में किसकी कुर्सी बदलेगी? जो पांच नाम तय, उनकी वजह समझिए
पहली बार चुनाव लड़े तो हार गए, 23 साल बाद मुख्यमंत्री बने
- नीतीश ने पहली बार 1977 का बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 1985 में फिर से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 1987 में लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष बने।
- 1989 में बिहार की बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। अप्रैल 1990 से नवंबर 1990 तक केंद्रीय कृषि और सहकारिता मंत्री रहे। 1991 में दूसरी बार सांसद चुने गए।
- 1995 में बिहार विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ लड़ाई लड़ी। जॉर्ज फर्नांडीस के साथ समता पार्टी की शुरुआत की। तब चुनाव में उनकी पार्टी केवल छह सीटें ही जीत सकी थी।
- 1996 में लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री, भूतल परिवहन मंत्री और कृषि मंत्री रहे।
- दो अगस्त 1999 में गैसल ट्रेन दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने केंद्रीय रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। नीतीश के रेल मंत्री रहते हुए ही टिकटों की तत्काल बुकिंग की सुविधा शुरू की गई थी।
नीतीश कुमार के दो दशकों के राजनीतिक सफर, पहली बार कब सीएम बनें...
2000: पहली बार सिर्फ सात दिन के लिए सीएम बने नीतीश
- नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, बहुमत न जुटा पाने की वजह से उन्हें 10 मार्च 2000 को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद बिहार में 2005 में हुए चुनाव में नीतीश भाजपा के समर्थन से दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए। 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर जनता ने नीतीश को ही सीएम बनाया।
2014: हार की जिम्मेदारी ले छोड़ा पद
- लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ पार्टी के खराब प्रदर्शन की वजह से उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। इस दौरान उन्होंने जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री पद सौंपा। हालांकि, 2015 में जब पार्टी में अंदरुनी कलह शुरू हुई तो नीतीश ने मांझी को हटाकर एक बार फिर खुद सीएम पद ग्रहण किया।
2015: महागठबंधन के साथ दर्ज की जीत
- 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन) की एनडीए के खिलाफ जीत के बाद नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने। यह कुल पांचवीं बार रहा, जब नीतीश ने सीएम पद की शपथ ली।
2017: तेजस्वी पर लगे आरोप, महागठबंधन छोड़ एनडीए से जुड़े
- राजद और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया। उन्होंने जुलाई 2017 में ही पद से इस्तीफा दिया और एक बार फिर एनडीए का दामन थाम कर सीएम पद संभाला।
2020: जदयू की कम सीटें, फिर भी बने सीएम
- 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने जीत हासिल की। हालांकि, जदयू की सीटें भाजपा के मुकाबले काफी घट गईं। इसके बावजूद नीतीश कुमार ने सीएम पद की शपथ ली। हालांकि, भाजपा में उनके मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय तक पसोपेश की स्थिति रही। अब नीतीश ने एनडीए से अलग होने का एलान कर एक बार फिर इस्तीफा दे दिया है।
2022: महागठबंधन में लौटे, बने 8वीं बार सीएम
- एनडीए से अलग होने के एलान के ठीक बाद नीतीश कुमार ने राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से जुड़ने का एलान कर दिया। इसी के साथ यह तय हो गया कि नीतीश कुमार अब आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। मंगलवार शाम तक शपथग्रहण के समय का एलान भी हो गया। बुधवार को उन्होंने आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
2024: महागठबंधन का साथ छोड़कर एनडीए में गए
- जनवरी 2024 में, भ्रष्टाचार की बात कह सीएम नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़ दिया। महागठबंधन और खासकर तेजस्वी यादव पर गड़बड़ करने का आरोप लगाया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर महाएनडीए में शामिल हो गए और नौंवी बार उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
2025: दसवीं बार नीतीश कुमार ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
- नवंबर 2025, में बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड जीत मिलने के बाद एक बार फिर नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 14 अप्रैल 2026 को उन्होंने इस्तीफा दिया। कारण उनका राज्यसभा जाना बना। वह बिहार में सबसे लंबे समय तक सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री भी रहे। बिहार में अभी तक किसी भी मुख्यमंत्री का कार्यकाल इतना लंबा नहीं रहा। इस तरह वह बिहार के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए, जिन्होंने 10 बार सीएम पद की शपथ ली है। उनके नाम बिहार में सबसे लंबे समय पर सत्ता में रहने का रिकॉर्ड पहले से ही है।
कौन हैं नीतीश कुमार, परिवार के बारे में भी जानें
नीतीश कुमार का जन्म एक मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में हुआ था। इस वक्त उनकी उम्र 75 साल है। उनकी मां का नाम परमेश्वरी देवी था। पिता राम लखन सिंह आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। कुर्मी (पिछड़ी) जाति से आने वाले नीतीश की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई। बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकैनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद नीतीश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में काम करने लगे। इसी बीच जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े और राजनीति में आ गए। नीतीश कुमार की शादी 22 फरवरी 1973 को मंजू कुमारी सिन्हा से हुई थी। मंजू बिहार में सरकारी स्कूल टीचर थीं। खुद मंजू ने भी इंजीनियरिंग की थी। वहीं, नीतीश कुमार की पत्नी मंजू का 2007 में निधन हो चुका है। नीतीश और मंजू का एक बेटा है निशांत कुमार। निशांत ने बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसी महीने आठ मार्च को उन्होंने जदयू की सदस्यता ग्रहण की। नीतीश कुमार के परिवार में पांच भाई-बहन हैं। नीतीश के बड़े भाई सतीश कुमार किसान हैं। इसके अलावा नीतीश की तीन छोटी बहनें उषा देवी, इंदु देवी और प्रभा देवी हैं। सतीश की तरह बहनें भी राजनीति से दूर हैं।
Bihar CM : 146 दिन सीएम रहे नीतीश कुमार, एक मंत्री ने 26 दिन में छोड़ी थी कुर्सी; सबसे छोटा कार्यकाल कब रहा?
25 से 30 नहीं रहे क्यों नीतीश? विपक्ष का दावा सही
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में '25 से 30 पिर से नीतीश' का नारा जदयू ने दिया था। मतदाताओं में कोई संशय नहीं रहे, इसलिए भाजपा समेत एनडीए के सभी दलों ने अंत-अंत तक यह नारा स्वीकार कर लिया। लेकिन, विपक्ष लगातार कह रहा था कि नीतीश कुमार का सिर्फ इस्तेमाल किया जा रहा है और चुनाव के बाद उन्हें हटा दिया जाएगा। वही हो रहा है। इसलिए, विपक्ष अपने दावे के यकीन में बदलने पर खुश भी है और याद भी दिला रहा है। दरअसल, बिहार में भाजपा लंबे समय से सत्ता के केंद्र में है, लेकिन अब तक कुर्सी पर अपना सीएम नहीं बैठा सकी थी। 2020 के चुनाव में भाजपा-जदयू में बड़ा-छोटा भाई की लड़ाई थी, जिसमें चिराग पासवान ने निर्णायक भूमिका निभाई। 2025 के चुनाव में वोटरों ने जदयू को छोटा भाई बना दिया। ऐसे में भाजपा अपना सीएम लाएगी, यह तय हो गया था। राजनीतिक विश्लेषकों के बताए समय से यह पहले हो गया, यही बात एक नई है।
