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Hindi News ›   India News ›   Death certificates not issued for three out of every four deaths in india true cause of death remains unknown

India: देश में हर चार में तीन मौतों का नहीं बनता मृत्यु प्रमाणपत्र, मौत की असली वजह नहीं आ पाती है सामने

Thu, 23 Jul 2026 07:24 AM IST
प्रशांत तिवारी अजीत खरे, अमर उजाला।
अजीत खरे, अमर उजाला। Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 23 Jul 2026 07:24 AM IST
सार

महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में देश में दर्ज 89.38 लाख मौतों में से केवल 23.1% मामलों में ही डॉक्टरों ने मृत्यु के कारण का चिकित्सीय प्रमाणन किया। गोवा में सभी मौतों का प्रमाणन होता है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में यह आंकड़ा बेहद कम है।

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विस्तार

देश में दर्ज होने वाली हर चार मौतों में से सिर्फ एक मौत का ही डॉक्टर द्वारा प्रमाणित मृत्यु प्रमाणपत्र बन पाता है। यानी चार में से तीन मौतों की वजह का कोई पुख्ता चिकित्सीय रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो पाता। गोवा में दर्ज सभी मौतों का चिकित्सीय प्रमाणन होता है, जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 44%, उत्तर प्रदेश में 6.7% और बिहार में केवल 3.6% है।

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आखिर मौतों का सही रिकॉर्ड तैयार करने में देश क्यों पीछे है?
महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, देश में मौत के कारणों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था में अभी काफी सुधार की जरूरत है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024 में देशभर में 89,38,301 मौतें दर्ज की गईं। इनमें से केवल 23.1% मामलों में ही डॉक्टरों ने मृत्यु के कारण का चिकित्सीय प्रमाणन किया। राज्यों की बात करें तो पुडुचेरी में 91%, लक्षद्वीप में 98.5%, पश्चिम बंगाल में 40%, तमिलनाडु में 38.7% और तेलंगाना में 38.3% मौतों का चिकित्सीय प्रमाणन हुआ। वहीं बिहार में यह आंकड़ा केवल 3.6%, हरियाणा में 6.4% और अरुणाचल प्रदेश में 8.7% रहा।
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रिपोर्ट में और कौन-कौन से अहम तथ्य सामने आए?

  • प्रमाणित मौतों में 5.1% एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं की थीं।
  • शिशुओं की 66.7% मौतें प्रसव के दौरान या जन्म के तुरंत बाद हुईं।
  • कुल प्रमाणित मौतों में 58.6% पुरुष और 41.4% महिलाएं थीं।
  • प्रत्येक 1,000 पुरुष मौतों पर 706 महिलाओं की मौत दर्ज की गई।


क्या है नियम?
जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर डॉक्टर के लिए उसकी मृत्यु के कारण और संबंधित बीमारी का पूरा विवरण दर्ज करते हुए चिकित्सा मृत्यु प्रमाणपत्र निःशुल्क रजिस्ट्रार को उपलब्ध कराना अनिवार्य है। यदि किसी व्यक्ति की मौत अस्पताल के बाहर होती है, लेकिन उसकी अंतिम बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर ने किया था, तो उस डॉक्टर के लिए भी मृत्यु के कारण का चिकित्सा प्रमाणपत्र जारी करना जरूरी होता है।

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किन बीमारियों से होती हैं सबसे ज्यादा प्रमाणित मौतें?
डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित 90.4% मौतों का कारण नौ प्रमुख बीमारियां हैं। इनमें सबसे अधिक 38.8% मौतें हृदय और रक्त संचार तंत्र से जुड़ी बीमारियों के कारण हुईं। इसके बाद 11% मौतें श्वसन संबंधी बीमारियों, 8.3% संक्रामक और परजीवी रोगों, 5% कैंसर, 4.4% किडनी और मूत्र-जननांग संबंधी बीमारियों, 4.3% पाचन तंत्र के रोगों तथा 4% चोट या अन्य कारणों से हुईं। शेष 10.7% मौतें अन्य कारणों के अंतर्गत दर्ज की गईं।

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