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NSA: दिल्ली पुलिस की एनएसए के तहत हिरासत में लेने की अवधि बढ़ी, क्या अब और सख्त होगी कार्रवाई?
Thu, 23 Jul 2026 03:15 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 23 Jul 2026 03:15 PM IST
सार
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। एनएसए के तहत पुलिस को मिली एहतियाती हिरासत की शक्ति अब 18 अक्तूबर तक जारी रहेगी। यह फैसला ऐसे समय हुआ है, जब राजधानी में सीजेपी का प्रदर्शन जारी है और पहले संसद मार्च के दौरान हिंसा भी हुई थी। पढ़िए रिपोर्ट-
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दिल्ली पुलिस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
उपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत किसी व्यक्ति को एहतियातन हिरासत में लेने की शक्ति को 18 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है। एक आधिकारिक अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने इस बात को खारिज किया है कि पेपर लीक के खिलाफ राजधानी में चल रहे प्रदर्शनों में शामिल लोगों को हिरासत में लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत उसे नई शक्तियां दी गई हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह आदेश एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया नवीनीकरण है, जो कई वर्षों से लागू है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है। कुछ दिन पहले ही हजारों लोगों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस मार्च के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
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गृह विभाग की अधिसूचना में क्या कहा गया?
दिल्ली सरकार के गृह विभाग की ओर से 15 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, शहर के पुलिस आयुक्त को एनएसए की धारा 3 की उपधारा (2) के तहत हिरासत में लेने की शक्ति दी गई है। यह शक्ति 18 अक्तूबर तक प्रभावी रहेगी।
एनएसए क्या है?
ये भी पढ़ें: सरकार का दावा- कॉकरोच जनता पार्टी ने ठुकराया बातचीत का प्रस्ताव; अब केंद्र के पास क्या है विकल्प?
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि एनएसए के तहत हिरासत में लेने की शक्ति को हर तीन महीने में सामान्य रूप से बढ़ाया जाता है और इस मामले में कोई विशेष अनुरोध नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह शक्ति 1980 के दशक से दी जाती रही है। कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून को जंतर-मंतर से अपना प्रदर्शन शुरू किया था।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद दिल्ली पुलिस को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। कॉकरोच जनता पार्टी ने दावा किया था कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और खून से लथपथ हो गए।
वहीं, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर 'अनियंत्रित, आक्रामक और हिंसक व्यवहार' करने का आरोप लगाया था। पुलिस का दावा था कि प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिसकर्मियों पर पत्थरों से हमला किया और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की। पुलिस ने कहा कि हिंसक प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों समेत 118 पुलिसकर्मी घायल हुए।
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दिल्ली पुलिस ने इस बात को खारिज किया है कि पेपर लीक के खिलाफ राजधानी में चल रहे प्रदर्शनों में शामिल लोगों को हिरासत में लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत उसे नई शक्तियां दी गई हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह आदेश एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया नवीनीकरण है, जो कई वर्षों से लागू है।
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यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है। कुछ दिन पहले ही हजारों लोगों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस मार्च के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
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गृह विभाग की अधिसूचना में क्या कहा गया?
दिल्ली सरकार के गृह विभाग की ओर से 15 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, शहर के पुलिस आयुक्त को एनएसए की धारा 3 की उपधारा (2) के तहत हिरासत में लेने की शक्ति दी गई है। यह शक्ति 18 अक्तूबर तक प्रभावी रहेगी।
एनएसए क्या है?
- एनएसए केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे लोगों को हिरासत में रखने का अधिकार देता है, ताकि वे भारत की सुरक्षा के लिए नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां न कर सकें।
- एनएसए के तहत हिरासत की अवधि तीन से 12 महीने तक हो सकती है, हालांकि इसे इससे पहले भी खत्म किया जा सकता है।
- यह एहतियाती हिरासत होती है, गिरफ्तारी नहीं, इसलिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करना कानूनी रूप से जरूरी नहीं होता।
ये भी पढ़ें: सरकार का दावा- कॉकरोच जनता पार्टी ने ठुकराया बातचीत का प्रस्ताव; अब केंद्र के पास क्या है विकल्प?
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि एनएसए के तहत हिरासत में लेने की शक्ति को हर तीन महीने में सामान्य रूप से बढ़ाया जाता है और इस मामले में कोई विशेष अनुरोध नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह शक्ति 1980 के दशक से दी जाती रही है। कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून को जंतर-मंतर से अपना प्रदर्शन शुरू किया था।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद दिल्ली पुलिस को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। कॉकरोच जनता पार्टी ने दावा किया था कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और खून से लथपथ हो गए।
वहीं, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर 'अनियंत्रित, आक्रामक और हिंसक व्यवहार' करने का आरोप लगाया था। पुलिस का दावा था कि प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिसकर्मियों पर पत्थरों से हमला किया और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की। पुलिस ने कहा कि हिंसक प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों समेत 118 पुलिसकर्मी घायल हुए।