DNPA Conclave 2026: अश्विनी वैष्णव ने सूचनाओं के सत्यापन पर दिया जोर, कहा- मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर टिका
DNPA Conclave 2026: डिजिटल मीडिया के दौर में समाचार माध्यमों की भूमिका कैसी होनी चाहिए? सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट की होड़ के बीच तथ्यात्मक और प्रामाणिक सूचनाओं और समाचार के लिए कैसे उपाय किए जाने चाहिए? डीएनपीए कॉन्क्लेव के शुरुआती वक्तव्य में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऐसे तमाम बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इस कॉन्क्लेव में अमर उजाला के एमडी तन्मय माहेश्वरी ने भी अपने विचार रखे। कॉन्क्लेव में किसने क्या कुछ कहा? जानिए इस खबर में
विस्तार
भारत के शीर्ष प्रकाशक समूहों की डिजिटल इकाइयों के संगठन डीएनपीए द्वारा डीएनपीए कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन गुरुवार को किया गया। डिजिटल मीडिया के दौर में समाचार माध्यमों की भूमिका कैसी हो? इस विषय पर यहां विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पूरी दुनिया के मीडिया जगत के लिए यह महत्वपूर्ण दौर है। यह सही निर्णय लेने का समय है। यह जरूरी है कि आम सहमति बने, अच्छे विकल्प सामने आएं और अच्छी सिफारिशें मिलें ताकि भविष्य की नीतियों को आकार दिया जा सके।
मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर टिका है
बदलते दौर में समाचार माध्यमों की भूमिका पर केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि पूरा मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर टिका है। यह भरोसा परिवार से शुरू होता है और सामाजिक पहचान, न्यायपालिका, मीडिया, विधायिका जैसी संस्थाओं तक जाता है। समाज के अलग-अलग अंग और संस्थाएं विश्वास के सिद्धांत पर काम करती हैं। मीडिया घरानों के लिए भी बुनियादी सिद्धांत यही रहता है कि वह निष्पक्ष और जिम्मेदार रहें। मीडिया के समक्ष खतरे भी मौजूद हैं। जैसे- डीप फेक, गलत सूचनाओं का प्रवाह। हर समाज इस तरह के खतरों से जूझ रहा है। जो संस्थाएं शताब्दियों से मौजूद हैं, उन्हें इन खतरों से कैसे बचाए रखा जाए, यह बड़ी चुनौती है। ऑनलाइन सेफ्टी इसके लिए बहुत जरूरी है। खबरों की प्रामाणिकता, बच्चों की सुरक्षा, सिंथेटिक कंटेंट से बचाव भी जरूरी है और इसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।
'सत्यापन का ध्यान रखना जरूरी'
वैष्णव ने कहा कि उदाहरण के लिए होटल में आने वाले ग्राहक का होटल प्रबंधन सत्यापन करता है, उसी तरह ऑनलाइन मंचों को भी सत्यापन का ध्यान रखना होगा ताकि कंटेंट का इस्तेमाल करने वालों को किसी तरह का नुकसान न हो। कंटेंट किस तरह वायरल हो जाता है, यह हम सभी जानते हैं। कुछ घंटों में वायरल कंटेंट लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में जिम्मेदारी रखना बहुत जरूरी है। नागरिकों को खतरों से बचाना, उनकी ऑनलाइन सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
'रेवेन्यू भी निष्पक्ष तरीके से साझा किया जाए'
उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां और न्यायपालिका भी लोगों के सामने मौजूद खतरों को लेकर चिंतित हैं। अगर किसी यूजर की कोई शिकायत है, तो उसे कैसे सुना जाए और उनकी हिफाजत करने का तंत्र क्या होगा, इस पर चर्चा जरूरी है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को रेवेन्यू भी निष्पक्ष तरीके से साझा करना चाहिए, चाहे फिर वह कमाई खबरें बनाने वालों से जुड़ी हो, परंपरागत मीडिया से जुड़ी हो, या फिर वह इन्फ्लुएंसर्स या शोधार्थियों का योगदान हो। इसके लिए नीति बनाना जरूरी है। जिनके पास कॉपीराइट है, जिनके पास मौलिक कंटेंट है, वह उनकी बौद्धिक संपदा है, जिसका सम्मान होना चाहिए। बौद्धिक संपदा का सम्मान नहीं होगा, तो समाज का विकास भी नहीं हो सकेगा।
अमर उजाला के एमडी बोले- कई कंपनियां कंटेंट माफिया की तरह काम कर रहीं
इस कॉन्क्लेव में अमर उजाला समूह के प्रबंध निदेशक (एमडी) तन्मय माहेश्वरी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने एक जिम्मेदार समाचार माध्यम की वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'हम सभी यहां पर समन्वय करने और मिलकर कुछ नया रचने के लिए इकट्ठा हुए हैं। हाल ही में हुई एआई समिट में हमने डिजिटल मीडिया में मौजूद कई तरह की परतों (लेयर) पर एआई जगत की प्रमुख हस्तियों से बात की थी। आखिरकार कंटेंट ही डिजिटल इंजन का ऑयल है। इस पर एआई समिट में मौजूद शीर्ष विशेषज्ञों का कहना था कि कंटेंट की परत में कुछ बड़ा होगा, इसकी संभावना नहीं दिखती, लेकिन सवाल यह है कि नए मॉडल किस तरह काम करते हैं। असल में कई तरह की कंपनियां मौजूद हैं, जो कंटेंट माफिया की तरह काम करती हैं, जो हमारे बनाए कंटेंट का अपने अल्गोरिदम में इस्तेमाल करती हैं।'
हमारी प्रतिस्पर्धा आखिर किससे है?'
उन्होंने कहा, 'मेरा सभी से एक सवाल है- हम आखिर किससे प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं? ...दो साल पहले तक हम एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। अब हम प्रतिस्पर्धा कर रहे किसी व्यक्ति की रील से, मीम्स से भरे वेब पेजेस से, एआई से बने किरदार, जो संविधान पढ़ते हैं, उनसे और बेशक परिवार के किसी एक ऐसे व्यक्ति से, जो किसी घटना के घटित होने से पहले ही वॉट्सएप पर खबरें ब्रेक कर देता है। इससे भी ज्यादा बड़ी बात है कि हम अनजाने में फेक न्यूज से भी प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर हैं। ध्यान आकर्षित करना नया 'ऑयल' है। दुर्भाग्य से यह अल्गोरिदम, डीप फेक और क्लिक बेट से चलता है। भारतीय संदर्भ में 80 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं। 60 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं। दुनिया का सबसे सस्ता डेटा यहां मौजूद है। भारत सभी तरह के प्रयोगों के लिए उपयुक्त जगह है।'
देश के लोगों को विश्वसनीय और प्रमाणिक कंटेंट मिले
तन्मय माहेश्वरी ने कहा, 'ये देखना अच्छा है कि तकनीकी कंपनियां भी इस मुद्दे को उठा रही हैं और इस दिशा में छोटे कदम उठा रही हैं, लेकिन पत्रकारिता ने हर चुनौती का सामना किया है। प्रिंटिंग प्रेस ने कभी राजाओं को हिला दिया था। टीवी ने राजनीति को विचलित कर दिया था। डिजिटल ने भी दो दौर में विज्ञापन जगत को हिलाकर रख दिया। अब एआई ने हर किसी को विचलित कर दिया है, लेकिन पत्रकारिता ऐसी चीज है, जिसने 'डिसरप्शन' के हर दौर में खुद को जिंदा रखा है। यह हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है कि इस देश के लोगों के पास सच्ची और सत्यापित खबरों का एक्सेस रहे और वे सही और फेक में अंतर कर पाएं।'
क्या है इस साल के कॉन्क्लेव की थीम?
इस वर्ष की थीम 'द न्यू वर्ल्ड ऑर्डर ऑफ न्यूज: रिराइटिंग द प्लेबुक फॉर ए रिजिलिएंट डिजिटल फ्चूयर' है, जिसमें मीडिया, प्रौद्योगिकी, नीतियों और व्यवसाय जगत में हो रहे महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर चर्चा हुई। कॉन्क्लेव में प्रकाशन जगत, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स और अलग-अलग एजेंसियों का वरिष्ठ नेतृत्व एक मंच पर है ताकि नियमन, बदलते हुए मुद्रीकरण मॉडल, रणनीतिक साझेदारियों और समाचारों के भविष्य को आकार देने में एआई की बढ़ती भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की जा सके।
क्या है डीएनपीए
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) भारत की एक प्रमुख उद्योग संस्था है, जो देश भर के अग्रणी मीडिया संगठनों की डिजिटल इकाइयों का प्रतिनिधित्व करती है। यह विश्वसनीय पत्रकारिता को सुदृढ़ करने, नैतिक मानकों को बनाए रखने और डिजिटल खबरों के पारिस्थितिकी तंत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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