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Army: 20 हजार फीट की ऊंचाई पर अब ड्रोन पहुंचाएंगे हथियार और राशन? सेना करने जा रही सबसे बड़ी लॉजिस्टिक्स डील

Fri, 07 Aug 2026 06:07 AM IST
Ashutosh Bhatia आशुतोष भाटिया
Updated Fri, 07 Aug 2026 06:07 AM IST
सार

भारतीय सेना चीन और पाकिस्तान सीमा पर तैनात जवानों के लिए 2,500 से अधिक लॉजिस्टिक्स ड्रोन खरीदने जा रही है। ये ड्रोन 20,000 फीट की ऊंचाई तक हथियार, राशन और दवाइयां पहुंचाने में सक्षम होंगे।

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Drones Deliver Weapons and Supplies at 20000 Feet Indian Army Plans Biggest Logistics Drone Deal
सप्लाई चेन को मिलेगी नई मजबूती - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी

विस्तार

चीन और पाकिस्तान से सटी दुर्गम सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाने का तरीका अब पूरी तरह बदलने वाला है। रक्षा मंत्रालय 2,500 से अधिक लॉजिस्टिक्स ड्रोन खरीदने की तैयारी में है। इस पहल के बाद सियाचिन ग्लेशियर, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात जवानों तक राशन, हथियार और जीवनरक्षक दवाइयां पहले से अधिक तेजी और आसानी से पहुंचाई जा सकेंगी। युद्ध जैसी परिस्थितियों में गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरण भी कम समय में मोर्चे तक पहुंचाए जा सकेंगे।

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तीन अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए खरीदे जाएंगे ड्रोन

भारतीय सेना ने लॉजिस्टिक्स ड्रोन खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी कर दी है। योजना के तहत तीन श्रेणियों के ड्रोन खरीदे जाएंगे, जो अलग-अलग ऊंचाई वाले इलाकों में संचालन करने में सक्षम होंगे। इनमें 6,000 फीट तक, 6,000 से 12,000 फीट तक और 12,000 से 20,000 फीट तक उड़ान भरने वाले ड्रोन शामिल होंगे। सबसे ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले ड्रोन को 19,000 फीट की ऊंचाई से टेकऑफ करने और माइनस 30 डिग्री सेल्सियस से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम करने में सक्षम होना होगा।

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10 से 20 किलोमीटर तक पहुंचा सकेंगे जरूरी सामान

हर ड्रोन 10 से 20 किलोमीटर तक की एकतरफा दूरी में हथियार, गोला-बारूद, राशन और अन्य आवश्यक सामग्री ले जाने में सक्षम होगा। इनमें जीपीएस, भारतीय नेविगेशन प्रणाली 'नैविक', बाधा पहचान सेंसर, डे-नाइट कैमरे और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन जैसी आधुनिक तकनीकें मौजूद होंगी। इन्हें स्वायत्त, मैनुअल और 'रिटर्न-टू-होम' मोड में संचालित किया जा सकेगा।

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'ऑपरेशन सिंदूर' से मिले अनुभव के बाद उठाया गया कदम

भारतीय सेना ने यह पहल 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन के व्यापक इस्तेमाल से मिले अनुभवों के आधार पर शुरू की है। सेना चाहती है कि नए ड्रोन एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग तकनीक से लैस हों, ताकि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी वे प्रभावी ढंग से अपना काम कर सकें।

सेना की सप्लाई चेन को मिलेगी नई मजबूती

लॉजिस्टिक्स ड्रोन सेना के लिए कई मायनों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। ये खतरनाक इलाकों में सैनिकों को जोखिम में डाले बिना जरूरी सामान तेजी से पहुंचाने में सक्षम होंगे। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और युद्ध क्षेत्र में, जहां पारंपरिक वाहन नहीं पहुंच पाते, वहां भी ये आसानी से पहुंच बना सकेंगे। इनके उपयोग से समय और लागत दोनों की बचत होगी, जबकि सैन्य अभियानों की दक्षता भी बढ़ेगी। रात के समय और खराब मौसम में भी ये ड्रोन प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे, जिससे सेना की सप्लाई चेन पहले से अधिक सुरक्षित, मजबूत और तेज हो जाएगी।

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