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'ये बंगाल की परंपरा, विवाद कैसा': मंत्री ने बागेश्वर बाबा को घेरा, दुर्गा पूजा से पहले मांसाहार पर बवाल क्यों?
Tue, 08 Sep 2026 03:04 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 08 Sep 2026 03:04 PM IST
सार
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की दुर्गा पूजा में मांसाहार छोड़ने की अपील के बाद बंगाल में विवाद बढ़ा। मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान बकरे का मांस प्रसाद के रूप में खाने की परंपरा रही है। उन्होंने लोगों को अपनी पसंद का खाना चुनने की आजादी देने की बात कही। साथ ही घोष ने दुर्गा पूजा में सरकारी पैसे और 11 हाथ वाली दुर्गा प्रतिमा के विवाद पर भी सरकार को घेरा।
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दिलीप घोष , मंत्री, पश्चिम बंगाल
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी खाना खाने को लेकर विवाद छिड़ गया है। इसकी शुरुआत बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान से हुई। उन्होंने बंगाल के लोगों से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी खाना छोड़ने की अपील की थी। उन्होंने धार्मिक मौकों पर मांस खाने वालों को ‘पाखंडी’ भी बताया था। इसके बाद बंगाल की सियासत में इस बयान को लेकर प्रतिक्रिया शुरू हो गई। भाजपा की राज्य इकाई ने भी ऐसे बयानों से दूरी बनाने की कोशिश की है, जिन्हें बंगाल की पारंपरिक खान-पान की आदतों पर किसी तरह का निर्देश माना जा सकता है।
बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान मांस खाना कोई विवाद का विषय नहीं है। उन्होंने बंगाल की परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि दुर्गा पूजा में कई जगह बकरे की बलि दी जाती है और उसका मांस प्रसाद के तौर पर खाया जाता है।
घोष ने कहा कि वह खुद मछली के अलावा कुछ नहीं खाते। लेकिन जिसे जो खाना है, उसे खाने की आजादी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संत अपने नजरिए से बात करते हैं और स्वास्थ्य के लिहाज से शाकाहारी भोजन को अच्छा बताते हैं।
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क्या बंगाल में धार्मिक परंपराओं से जुड़ा रहा है मांसाहारी भोजन?
दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल में लंबे समय से कई धार्मिक परंपराओं में मांसाहारी भोजन का संबंध रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कथन का भी जिक्र किया। घोष ने दावा किया कि विवेकानंद ने कहा था कि जब तक देश रहेगा, मां काली बकरे का मांस खाएंगी और शिव डमरू बजाएंगे।
दिलीप घोष ने यह भी कहा कि जो लोग बागेश्वर बाबा के पास जाते हैं, क्या वे पूरे भरोसे से कह सकते हैं कि वे मछली या मांस नहीं खाते? उन्होंने कहा कि किसी संत की बात उनके अपने नजरिए से हो सकती है, लेकिन इससे बंगाल की पारंपरिक खान-पान की आदतें नहीं बदल जातीं।
दिलीप घोष ने टीएमसी और सरकार पर क्या आरोप लगाए?
दिलीप घोष ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी लोगों के खान-पान को लेकर निर्देश देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी के दौर में यह कहा जाने लगा था कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। घोष ने कहा कि लोगों को अपनी पसंद के मुताबिक खाने की आजादी मिलनी चाहिए।
उन्होंने दुर्गा पूजा के आयोजन में सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। घोष ने कहा कि पूजा मुख्य रूप से समाज को मिलकर आयोजित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा पहले राजा और जमींदारों के आयोजन से आगे बढ़कर सामुदायिक त्योहार बनी है, ऐसे में सरकार को इसमें नियंत्रण की भूमिका नहीं निभानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि जिन गांवों में पूजा समितियों के पास वास्तव में संसाधनों की कमी है, वहां सरकार मदद कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के लोगों के पास पैसे की कमी नहीं है, लेकिन राजनेता समस्याएं पैदा करते हैं।
यह भी पढ़ें: ‘नाराज फूफा’ के बाद अब ‘झूठ की गूंज’: पीएम मोदी ने विपक्ष को फिर घेरा, और क्या-क्या कहा?
11 हाथ वाली दुर्गा प्रतिमा के विवाद पर क्या बोले?
भाजपा नेता दिलीप घोष ने एक सरकारी कार्यक्रम में 11 हाथ वाली दुर्गा प्रतिमा को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। यह विवाद उस समय सामने आया, जब राज्य के पर्यटन वीडियो में पश्चिम बंगाल की किसी पहचान वाली जगह को शामिल नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे। घोष ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ऐसा किसने किया। उन्होंने संभावना जताई कि शायद यह किसी पुरानी परंपरा के तहत किया गया हो। उन्होंने संबंधित विभाग के मंत्री और अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह दी।
इस मामले में सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने माफी मांगी थी। सरकारी विज्ञापन में मां दुर्गा की पारंपरिक 10 भुजाओं की जगह 11 भुजाओं वाली तस्वीर प्रकाशित हो गई थी। मुख्यमंत्री ने माफी मांगकर विवाद खत्म करने की कोशिश की थी।
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बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान मांस खाना कोई विवाद का विषय नहीं है। उन्होंने बंगाल की परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि दुर्गा पूजा में कई जगह बकरे की बलि दी जाती है और उसका मांस प्रसाद के तौर पर खाया जाता है।
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घोष ने कहा कि वह खुद मछली के अलावा कुछ नहीं खाते। लेकिन जिसे जो खाना है, उसे खाने की आजादी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संत अपने नजरिए से बात करते हैं और स्वास्थ्य के लिहाज से शाकाहारी भोजन को अच्छा बताते हैं।
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क्या बंगाल में धार्मिक परंपराओं से जुड़ा रहा है मांसाहारी भोजन?
दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल में लंबे समय से कई धार्मिक परंपराओं में मांसाहारी भोजन का संबंध रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कथन का भी जिक्र किया। घोष ने दावा किया कि विवेकानंद ने कहा था कि जब तक देश रहेगा, मां काली बकरे का मांस खाएंगी और शिव डमरू बजाएंगे।
दिलीप घोष ने यह भी कहा कि जो लोग बागेश्वर बाबा के पास जाते हैं, क्या वे पूरे भरोसे से कह सकते हैं कि वे मछली या मांस नहीं खाते? उन्होंने कहा कि किसी संत की बात उनके अपने नजरिए से हो सकती है, लेकिन इससे बंगाल की पारंपरिक खान-पान की आदतें नहीं बदल जातीं।
दिलीप घोष ने टीएमसी और सरकार पर क्या आरोप लगाए?
दिलीप घोष ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी लोगों के खान-पान को लेकर निर्देश देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी के दौर में यह कहा जाने लगा था कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। घोष ने कहा कि लोगों को अपनी पसंद के मुताबिक खाने की आजादी मिलनी चाहिए।
उन्होंने दुर्गा पूजा के आयोजन में सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। घोष ने कहा कि पूजा मुख्य रूप से समाज को मिलकर आयोजित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा पहले राजा और जमींदारों के आयोजन से आगे बढ़कर सामुदायिक त्योहार बनी है, ऐसे में सरकार को इसमें नियंत्रण की भूमिका नहीं निभानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि जिन गांवों में पूजा समितियों के पास वास्तव में संसाधनों की कमी है, वहां सरकार मदद कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के लोगों के पास पैसे की कमी नहीं है, लेकिन राजनेता समस्याएं पैदा करते हैं।
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11 हाथ वाली दुर्गा प्रतिमा के विवाद पर क्या बोले?
भाजपा नेता दिलीप घोष ने एक सरकारी कार्यक्रम में 11 हाथ वाली दुर्गा प्रतिमा को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। यह विवाद उस समय सामने आया, जब राज्य के पर्यटन वीडियो में पश्चिम बंगाल की किसी पहचान वाली जगह को शामिल नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे। घोष ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ऐसा किसने किया। उन्होंने संभावना जताई कि शायद यह किसी पुरानी परंपरा के तहत किया गया हो। उन्होंने संबंधित विभाग के मंत्री और अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह दी।
इस मामले में सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने माफी मांगी थी। सरकारी विज्ञापन में मां दुर्गा की पारंपरिक 10 भुजाओं की जगह 11 भुजाओं वाली तस्वीर प्रकाशित हो गई थी। मुख्यमंत्री ने माफी मांगकर विवाद खत्म करने की कोशिश की थी।