{"_id":"695fb5e304dfd95e96073713","slug":"economy-united-nations-has-acknowledged-that-india-s-gdp-will-grow-at-a-rate-of-6-6-percent-2026-01-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Economy: UN ने माना, 6.6 फीसदी की दर से बढ़ेगी भारत की जीडीपी, दुनिया की विकास दर 2.7 पर रहने का अनुमान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Economy: UN ने माना, 6.6 फीसदी की दर से बढ़ेगी भारत की जीडीपी, दुनिया की विकास दर 2.7 पर रहने का अनुमान
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 08 Jan 2026 07:19 PM IST
विज्ञापन
भारतीय अर्थव्यवस्था।
- फोटो : amarujala
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.6 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ सकती है। पहले के अनुमान की तुलना में यह कुछ कम है, लेकिन इसके बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके पहले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने भी अनुमान लगाया था कि भारत 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ सकती है। इस दौरान दुनिया की औसत विकास दर 2.7 रहने वाली है।
भारत की यह विकास दर इस अर्थ में महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारी टैरिफ लगाने के कारण भारत का विदेश निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में निर्यात में गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन अंततः नीतियों में बदलाव करते हुए और अधिक कर छूट देकर भारत ने इस टैरिफ वॉर से निकलने का रास्ता निकाल लिया।
दुनिया के सुस्त विकास की चिंता
संयुक्त राष्ट्र की गुरुवार को जारी हुई रिपोर्ट 'विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2026' में कहा गया है कि आने वाले समय में दुनिया को सुस्त विकास का सामना करना पड़ सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि दुनिया के अनेक देश तमाम कारणों से विकास करने में पीछे छूट गए हैं। इससे इन क्षेत्रों में मांग में कमी बनी रह सकती है जिसका असर दुनिया के व्यापार पर पड़ेगा। अनेक देशों और समाजों में आ रही आर्थिक विषमता भी विकास दर को सुस्त बनाने में प्रभावी कारण बन सकती है।
इस समय दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को संकट में डाला है। ईरान की अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है। दुनिया के कई अन्य देश तेज महंगाई और मंदी का सामना कर रहे हैं। इसका वैश्विक विकास पर असर पड़ सकता है और दुनिया मंदी की मार झेल सकती है।
सभी प्रमुख एजेंसियों की रिपोर्ट में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत
संयुक्त राष्ट्र ही नहीं, इसके पहले आईएमएफ ने भी 2026 के लिए भारत के 6.2 प्रतिशत की दर से तेज विकास करने का अनुमान लगाया था। विश्व बैंक का अनुमान है कि भारत 2026 में 6.5 प्रतिशत की दर से जीडीपी वृद्धि हासिल कर सकता है। इसी तरह ओईसीडी ने 6.2 प्रतिशत,एसएंडपी ने 6.5 प्रतिशत, एशियाई विकास बैंक ने 2025 में 7.2 प्रतिशत और फिच ने 2026 में भारत के 7.4 प्रतिशत की दर से विकास करने का अनुमान लगाया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी अनुमान लगाया था कि भारत 7.3 प्रतिशत की दर से विकास कर सकता है।
ये भी पढ़ें: बजट 1 या 2 फरवरी को: 1 को रविवार होने से बढ़ी आशंका, संसदीय समिति के प्रस्ताव के बाद अंतिम फैसले पर सबकी नजर
तेज विकास का कारण
दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएं महंगाई और मंदी की दोहरी मार झेल रही हैं। वहीं, भारत लगातार तेज विकास की गति बनाए हुए है। टैरिफ वॉर के साथ-साथ घरेलू मोर्चे पर भी उसे कई अवरोधों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने तमाम अवरोधों को पीछे छोड़ते हुए अच्छी विकास दर हासिल करने में सफलता हासिल की है।
आर्थिक विश्लेषक मानते हैं कि केंद्र सरकार ने टैक्स दरों में भारी छूट देकर आम आदमी के हाथों में पैसा छोड़ने की रणनीति अपनाई है। इसी तरह तमाम टैक्स कम कर व्यापार को बढ़ावा देने का काम किया गया है। केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं के सहारे शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के हाथों में पैसा पहुंचाया है। इससे आम उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता में सात प्रतिशत का सुधार हुआ है। इसका असर हुआ है कि लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। मांग और आपूर्ति के इस तेज प्रवाह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया है।
Trending Videos
भारत की यह विकास दर इस अर्थ में महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारी टैरिफ लगाने के कारण भारत का विदेश निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में निर्यात में गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन अंततः नीतियों में बदलाव करते हुए और अधिक कर छूट देकर भारत ने इस टैरिफ वॉर से निकलने का रास्ता निकाल लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
दुनिया के सुस्त विकास की चिंता
संयुक्त राष्ट्र की गुरुवार को जारी हुई रिपोर्ट 'विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2026' में कहा गया है कि आने वाले समय में दुनिया को सुस्त विकास का सामना करना पड़ सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि दुनिया के अनेक देश तमाम कारणों से विकास करने में पीछे छूट गए हैं। इससे इन क्षेत्रों में मांग में कमी बनी रह सकती है जिसका असर दुनिया के व्यापार पर पड़ेगा। अनेक देशों और समाजों में आ रही आर्थिक विषमता भी विकास दर को सुस्त बनाने में प्रभावी कारण बन सकती है।
इस समय दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को संकट में डाला है। ईरान की अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है। दुनिया के कई अन्य देश तेज महंगाई और मंदी का सामना कर रहे हैं। इसका वैश्विक विकास पर असर पड़ सकता है और दुनिया मंदी की मार झेल सकती है।
सभी प्रमुख एजेंसियों की रिपोर्ट में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत
संयुक्त राष्ट्र ही नहीं, इसके पहले आईएमएफ ने भी 2026 के लिए भारत के 6.2 प्रतिशत की दर से तेज विकास करने का अनुमान लगाया था। विश्व बैंक का अनुमान है कि भारत 2026 में 6.5 प्रतिशत की दर से जीडीपी वृद्धि हासिल कर सकता है। इसी तरह ओईसीडी ने 6.2 प्रतिशत,एसएंडपी ने 6.5 प्रतिशत, एशियाई विकास बैंक ने 2025 में 7.2 प्रतिशत और फिच ने 2026 में भारत के 7.4 प्रतिशत की दर से विकास करने का अनुमान लगाया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी अनुमान लगाया था कि भारत 7.3 प्रतिशत की दर से विकास कर सकता है।
ये भी पढ़ें: बजट 1 या 2 फरवरी को: 1 को रविवार होने से बढ़ी आशंका, संसदीय समिति के प्रस्ताव के बाद अंतिम फैसले पर सबकी नजर
तेज विकास का कारण
दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएं महंगाई और मंदी की दोहरी मार झेल रही हैं। वहीं, भारत लगातार तेज विकास की गति बनाए हुए है। टैरिफ वॉर के साथ-साथ घरेलू मोर्चे पर भी उसे कई अवरोधों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने तमाम अवरोधों को पीछे छोड़ते हुए अच्छी विकास दर हासिल करने में सफलता हासिल की है।
आर्थिक विश्लेषक मानते हैं कि केंद्र सरकार ने टैक्स दरों में भारी छूट देकर आम आदमी के हाथों में पैसा छोड़ने की रणनीति अपनाई है। इसी तरह तमाम टैक्स कम कर व्यापार को बढ़ावा देने का काम किया गया है। केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं के सहारे शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के हाथों में पैसा पहुंचाया है। इससे आम उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता में सात प्रतिशत का सुधार हुआ है। इसका असर हुआ है कि लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। मांग और आपूर्ति के इस तेज प्रवाह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया है।