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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: 1200 करोड़ की संपत्तियां जब्त, हजारों करोड़ रुपये की हुई थी धो

डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Mon, 01 Jun 2026 07:42 PM IST
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ED Attaches rs 1200 Crore Assets in Chhattisgarh Liquor Scam Probe
प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : अमर उजाला
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने लगभग 1200 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। इस मामले में कमीशन के जरिए 2883 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई थी। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत तीन अस्थायी कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के संबंध में 200 करोड़ रुपये के विलेख मूल्य और 1000 करोड़ रुपये से अधिक के संयुक्त बाजार मूल्य वाली संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। 



ईडी की जांच, रायपुर स्थित ईओडब्ल्यू/एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। इससे पता चला है कि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा (सेवानिवृत्त आईएएस) के नेतृत्व वाले एक शराब सिंडिकेट ने वरिष्ठ राज्य अधिकारियों, शराब बनाने वाली भट्टियों के मालिकों और निजी संस्थाओं के साथ मिलीभगत करके 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ उत्पाद शुल्क तंत्र में व्यवस्थित रूप से हेरफेर किया था। इसके जरिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की आय अर्जित की गई। शराब की खरीद दरों में कृत्रिम वृद्धि, अवैध शराब के उत्पादन और पसंदीदा संस्थाओं को दिए गए एफएल-10ए लाइसेंसों के माध्यम से कमीशन की वसूली करके 2,883 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
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शराब बनाने वाली भट्टियों से भी कमीशन 
पहले पीएओ में विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से संबंधित अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है। विकास अग्रवाल इस सिंडिकेट के जमीनी स्तर के वित्तीय प्रबंधक के रूप में कार्य करते थे। वे शराब बनाने वाली भट्टियों और एफएल-10ए लाइसेंसधारियों से कमीशन वसूलते थे। वह राशि सीधे अनवर ढेबर को भेजी जाती थी। विकास अग्रवाल के परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों को उनकी अपराध से प्राप्त आय के बराबर मूल्य पर जब्त किया गया है। इसके अलावा, अनवर ढेबर की बेनामी संपत्तियां - जिनमें रायपुर स्थित ढेबर सिटी होम्स में कई भूखंड (उनके स्वामित्व वाली फर्म मेसर्स ए. ढेबर बिल्डकॉन के माध्यम से) और रायपुर में पांच भूखंड (शेल्फ कंपनियों मेसर्स शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन, मेसर्स मूनलाइट रियल एस्टेट, मेसर्स स्वर्ण इंफ्राबिल्ड और मेसर्स जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से) शामिल हैं, को भी शराब घोटाले के माध्यम से प्राप्त धन के रूप में जब्त कर लिया गया है। इस पीएओ के तहत कुल कुर्की लगभग 30 करोड़ रुपये है। 
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पूर्व सीएम के बेटे के इशारे पर पहुंचाई राशि 
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल से भी ईडी ने इस मामले में पूछताछ की है। दूसरे पीएओ के तहत होटल वेस्टिन गोवा (गांव अंजुना, उत्तरी गोवा) को अटैच किया गया है, जो मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर एक प्रीमियम होटल है, जिसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं। जांच में यह स्थापित हुआ कि होटल को पूरी तरह से अपराध की आय से लगभग 110 करोड़ रुपये में अधिग्रहित किया गया था, जिसका भुगतान शराब घोटाले से प्राप्त असंतुलित नकदी में किया गया था। चैतन्य बघेल के इशारे पर इसे भौतिक रूप से पहुंचाया गया था। 

आधा हिस्सा, सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर 
तीसरे पीएओ के तहत तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों - मेसर्स ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड - के बैंक खातों, शेयरों और म्यूचुअल फंडों को अटैच किया गया है, जिन्हें अपने मुनाफे का 50-60% हिस्सा सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया था। यह हिस्सा लगभग 51 करोड़ रुपये बनता है। ईडी ने रायपुर स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में अपनी छठी पूरक अभियोग शिकायत भी दायर की है, जिसमें चार नए आरोपियों को आरोपित किया गया है। इनमें विजय भाटिया (सिंडिकेट से घनिष्ठ संबंध रखने वाला व्यवसायी, जिसे दबाव में ओम साई बेवरेजेज में 52.5% बेनामी हिस्सेदारी हस्तांतरित की गई थी), टी. भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा (जिसने सिंडिकेट की ओर से करोड़ों रुपये नकद में पहुंचाए) और निखिल चंद्रकार शामिल हैं। इसके साथ ही पीएमएलए अभियोग में आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 85 हो गई है। 


 

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