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ED: 1500 से अधिक खरीदारों के साथ धोखा, रुपये लिए मगर फ्लैट/मकान नहीं दिए; 944 करोड़ की अचल संपत्तियां जब्त की

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Mon, 06 Apr 2026 08:03 PM IST
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ED Cracks Down on Massive Housing Scam, rs 944 Crore Assets Attached; 1500 Buyers Duped
ईडी - फोटो : ANI
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स पीयूष कॉलोनाइजर्स लिमिटेड, कंपनी के पूर्व प्रवर्तकों और उनसे संबंधित व्यावसायिक संस्थाओं/व्यक्तियों की लगभग 944 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। आरोप है कि उक्त संस्थाओं/व्यक्तियों ने 1500 से अधिक घर खरीदारों के साथ धोखा किया है। उनसे रुपये ले लिए गए, मगर फ्लैट/मकान नहीं दिए। जब्त संपत्तियों में फ्लैट, कृषि भूमि और व्यावसायिक स्थान शामिल हैं। ये संपत्तियां पलवल (लगभग 63 एकड़), भिवाड़ी (लगभग 62 एकड़), धारूहेड़ा (लगभग 7 एकड़) और लगभग 19000 वर्ग फुट की व्यावसायिक जगह, फरीदाबाद में बताई गई है। 

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ईडी ने 30 मार्च को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), गुरुग्राम के समक्ष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स पीयूष कॉलोनाइजर्स लिमिटेड के पूर्व प्रमोटर अमित गोयल और अन्य के खिलाफ अभियोग शिकायत भी दायर की है। हरियाणा पुलिस, नई दिल्ली स्थित ईओडब्ल्यू और सीबीआई द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार के आरोपों की जांच शुरू की थी। 
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इन अपराधों के परिणामस्वरूप पलवल, फरीदाबाद, रेवाड़ी और भिवाड़ी में स्थित पीयूष समूह की विभिन्न परियोजनाओं के खरीदारों को इकाइयां नहीं सौंपी गईं। लोगों को तय राशि जमा कराने के बावजूद उनके फ्लैट/मकान नहीं मिल सके। आरोप है कि पीयूष समूह की विभिन्न परियोजनाओं में 1500 से अधिक खरीदार थे। पीयूष समूह द्वारा प्राप्त धन को मौजूदा परियोजनाओं को पूरा किए बिना ही सहायक कंपनियों में लगा दिया गया। 

इसका मकसद, नई जमीनों में निवेश करना था। ईडी की जांच में पता चला है कि प्रमुख प्रमोटरों ने दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान खरीदारों से परियोजना की जमीनें हड़पने और उन्हें धोखा देने के लिए बिना किसी प्रतिफल के पूर्व प्रमोटरों के परिवार के सदस्यों को परियोजनाओं की जमीनों में हिस्सेदारी हस्तांतरित कर दी। पीयूष ग्रुप के इस कदम से विभिन्न परियोजनाओं का निष्पादन नहीं हो सका। मेसर्स पीयूष कॉलोनाइजर्स लिमिटेड ने वर्ष 2019 में कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में प्रवेश किया। हालांकि, इसके लिए समाधान योजना को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

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