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ED: अवैध सरोगेसी और बाल तस्करी में दंपतियों से वसूली मोटी रकम, ईडी ने जब्त की 29 करोड़ की 50 अचल संपत्तियां

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Tue, 10 Mar 2026 06:34 PM IST
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सार

ईडी ने हैदराबाद में डॉ. पचीपल्ली नम्रता के अवैध सरोगेसी रैकेट मामले में 29.76 करोड़ रुपये की 50 संपत्तियां जब्त की हैं। जांच में गरीब गर्भवती महिलाओं से बच्चों की तस्करी कर निःसंतान दंपतियों को बेचे जाने का खुलासा हुआ। 

ED Huge sums recovered couples involved illegal surrogacy child trafficking ED seizes 29 crore
ED - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

ईडी के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने डॉ. पचीपल्ली नम्रता उर्फ अथलुरी नम्रता द्वारा यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर के नाम से चलाए जा रहे अवैध अवैध सरोगेसी रैकेट के मामले में कार्रवाई की है। 29.76 करोड़ रुपये की पचास अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है। जब्त की गई संपत्तियां, जमीन के टुकड़े, फ्लैट और एक अस्पताल के रूप में हैं, जो डॉ. नम्रता और उनके बेटों के नाम पर हैं। इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 50 करोड़ रुपये बताया गया है।

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एजेंटों के साथ मिलकर सरोगेसी रैकेट

ईडी ने हैदराबाद के गोपालपुरम पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, अवैध सरोगेसी और बाल तस्करी के कई मामलों में दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की है। आरोपी डॉ. पचीपल्ली नम्रथा उर्फ अथलुरी नम्रथा (यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर) क्लिनिक के माध्यम से अपने कर्मचारियों और एजेंटों के साथ मिलकर सरोगेसी रैकेट चला रही थीं। इसके जरिए वह निःसंतान दंपतियों को नवजात शिशु मुहैया कराती थीं। 

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गर्भवती महिलाओं को पैसे का लालच 

पीएमएलए की जांच में पता चला है कि डॉ. नम्रता ने सरोगेट मां के जरिए बच्चा पैदा करवाने का वादा करके निःसंतान दंपतियों से मोटी रकम वसूली। प्रक्रिया को असली दिखाने के लिए, उनके युग्मकों को सरोगेट मां में प्रत्यारोपित करने के लिए एकत्र किया जाता था। हालांकि, नवजात शिशुओं को गरीब और कमजोर माता-पिता से प्राप्त किया जाता था, जो बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे। वे गर्भपात कराना चाहते थे। इस रैकेट में एजेंटों और उप-एजेंटों का एक नेटवर्क शामिल पाया गया, जो गरीब और जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को ढूंढकर उन्हें पैसे का लालच देकर बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसे त्यागने के लिए मजबूर करते थे। 

साढ़े तीन लाख में बच्ची तो साढ़े चार लाख में बच्चा 

जांच में यह भी पता चला कि डॉ. नम्रता एक बच्ची के लिए लगभग 3.5 लाख रुपये और एक बच्चे के लिए 4.5 लाख रुपये का भुगतान करती थीं। ये प्रसव उनके विशाखापत्तनम स्थित अस्पताल में किए जाते थे, क्योंकि उनके सिकंदराबाद अस्पताल का लाइसेंस अधिकारियों द्वारा रद्द कर दिया गया था। इसके अलावा, नगर निगम को भेजी गई जन्म रिपोर्टों में उन्होंने जैविक माता-पिता के बजाय निःसंतान दंपतियों के नाम दर्ज करवाए थे। ईडी की जांच में पता चला कि वह 2014 से इस रैकेट में शामिल थी। उसके खिलाफ कई मामले दर्ज होने और अधिकारियों द्वारा उसका मेडिकल लाइसेंस निलंबित किए जाने के बाद भी उसने फर्जी सरोगेसी रैकेट जारी रखा।

कई दंपतियों को ठगा गया 

ईडी के मुताबिक, कई दंपतियों को उपरोक्त तरीके से ठगा गया। उनसे चेक और नकद के रूप में भारी रकम वसूल की गई। इस रकम का कुछ हिस्सा एजेंटों/उप-एजेंटों को उनके कमीशन के रूप में और तस्करी किए गए शिशुओं के जैविक माता-पिता को दिया गया। डॉ. नम्रता द्वारा रखे गए बैंक खातों के विश्लेषण से इस कार्यप्रणाली की पुष्टि हुई, जिसमें पाया गया कि निःसंतान दंपतियों से एकत्र की गई धनराशि का उपयोग एजेंटों/उप-एजेंटों को भुगतान करने के लिए किया गया था। वहां से तस्करी किए गए शिशुओं के जैविक माता-पिता को आगे भुगतान किया गया। डॉ. नम्रता और उनके बेटों के नाम पर कई संपत्तियां पाई गईं हैं। इनमें से कई संपत्तियों के लिए किए गए भुगतान अपराध की आय से नकद में किए गए थे। ईडी ने डॉ. नम्रता को 12 फरवरी को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में हैं।

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