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Union Cabinet: दिल्ली-ग्रुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट तक रास्ता होगा आसान, एलिवेटेड रोड को दी हरी झंडी
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Tue, 10 Mar 2026 07:57 PM IST
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सार
केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को छह बड़े फैसले किए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि, कैबिनेट ने करीब 8,80,000 करोड़ रुपये के फैसलों को मंजूरी प्रदान की है।
अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में करीब 8.8 लाख करोड़ रुपये के छह बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, इनमें जल जीवन मिशन 2.0, मदुरै एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा, संतरागाछी-खड़गपुर और सैंथिया-पाकुड़ चौथी रेलवे लाइन, मध्य प्रदेश में बदनावर-थांदला-टिमरवानी हाईवे को चार लेन बनाना और फरीदाबाद से जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने की परियोजना शामिल हैं।
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आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना की संशोधित लागत 3631 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मोड पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बनाई जाएगी। 31.42 किमी लंबे इस कॉरिडोर से दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे एनसीआर में आर्थिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कॉरिडोर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे, यमुना एक्सप्रेस वे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से भी जुड़ेगा। इससे मल्टी मॉडल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना में करीब 11 किमी सड़क एलिवेटेड हाईवे के रूप में बनाई जाएगी। यह डीएनडी बल्लभगढ़ बाईपास से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक बनने वाली ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी का अहम हिस्सा होगा। इसे दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे से जोडा जाएगा। यह कॉरिडोर फरीदाबाद मास्टर प्लान 2031 के तहत तय किए गए विकास वाले क्षेत्र से होकर गुजरेगा। एलिवेटेड हिस्से की अतिरिक्त लागत 689.24 करोड़ रुपये है, जिसमें से हरियाणा सरकार 450 करोड़ रुपए देगी।
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मदुरै को मिला अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा
कैबिनेट ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने को मंजूरी दे दी। यह राज्य के सबसे पुराने एयरपोर्ट में शामिल है। दक्षिणी तमिलनाडु के लिए यह प्रवेश द्वार की तरह काम करता है। पर्यटन व तीर्थ यात्रा को बढ़ावा देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे पूरे क्षेत्र के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, मदुरै एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और इलाके के आर्थिक विकास को भी रफ्तार मिलेगी।
एमपी के धार और झाबुआ में बनेगा फोर लेन
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश के एनएच-752 डी के बदनावर,पेटलावद,थांदला और टिमरवानी सेक्शन पर 80.45 किमी लंबा चार लेन कॉरिडोर बनाने को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 3,839.42 करोड़ रुपये होगी। इसके बनने से उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के टिमरवानी इंटरचेंज तक बिना रुकावट चार लेन की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा आसान होगी और समय करीब एक घंटे तक कम होने की उम्मीद है। टिमरवानी, थांदला, पेटलावद, बदनावर, उज्जैन कॉरिडोर गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने का सबसे छोटा रास्ता है। टिमरवानी–बदनावर सेक्शन के अपग्रेड होने से राज्यों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाले ट्रैफिक को संभालना आसान होगा। यह सड़क धार और झाबुआ के आदिवासी इलाकों से होकर गुजरती है। इसके अपग्रेड होने से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे माल की आवाजाही आसान होगी। इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन और देवास के औद्योगिक क्षेत्रों को फायदा मिलेगा।
बंगाल-झारखंड में रेलवे की मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के पांच जिलों में दो रेलवे मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन शामिल हैं। इससे रेलवे नेटवर्क में करीब 192 किमी की बढ़ोतरी होगी। इसकी लागत 4,474 करोड़ रुपये है। इसे वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इन परियोजनाओं से रेल लाइनों की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों का संचालन बेहतर होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ये परियोजनाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य मल्टी मोडल कनेक्टिविटी बढ़ाना और लॉजिस्टिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इन रेल लाइन क्षमता बढ़ने से बोलपुर-शांतिनिकेतन, तारापीठ, नंदिकेश्वरी मंदिर जैसे पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा। साथ ही कोयला, सीमेंट, लोहा, खाद्यान्न और कंटेनर जैसे सामान के परिवहन में भी सुविधा मिलेगी। इससे हर साल करीब 31 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी।
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