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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; पूर्व CJI को 'बचाने' के लिए ₹1 करोड़ फीस मांगने वाली याचिका खारिज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Thu, 12 Mar 2026 03:38 PM IST
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सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें वकील ने दावा किया था कि उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को बचाने के लिए कई मुकदमे दायर किए थे। वकील ने अपनी मांग में सरकार के एक करोड़ रुपये की फीस मांगी थी। पढ़ें, क्या है पूरा मामला..
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक वकील की तरफ से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया गया, जिसमें 2018 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को बचाने के लिए छह मामले दायर करने के एवज में केंद्र सरकार से एक करोड़ रुपये का शुल्क और खर्च देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिका को पूरी तरह से गलत बताया।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ ने भी खारिज की थी याचिका
यह मामला लखनऊ के वकील अशोक पांडे की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के पिछले साल मार्च के एक आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने भी वकील की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें केंद्र सरकार से उनके द्वारा दायर छह मामलों के लिए एक करोड़ रुपये शुल्क और खर्च देने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
वकील का दावा और पीठ की प्रतिक्रिया
वकील अशोक पांडे ने शीर्ष अदालत को बताया कि उन्होंने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश मिश्रा का बचाव करने के लिए ये छह मामले दायर किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इन मामलों में मुकदमेबाजी पर 2 लाख रुपये का खर्च आया था और इसके लिए उन्होंने अपनी बेटी से पैसे लिए थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, 'न्यायाधीशों के खिलाफ तरह-तरह के आरोप लगाने के बाद, आप अब 'माननीय' शब्द का प्रयोग क्यों कर रहे हैं?' वकील ने जनवरी 2018 में शीर्ष अदालत के तत्कालीन चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों द्वारा मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना नियमों के विरुद्ध था।
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सामाजिक सेवा हमेशा अनमोल होती है- सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने वकील की दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'आपने संस्था के लिए सामाजिक सेवा प्रदान की। सामाजिक सेवा हमेशा अनमोल होती है। इसे एक करोड़ या दो करोड़ रुपये में कैसे आंका जा सकता है?' पीठ ने आगे कहा कि वकील ने सामाजिक सेवा की है और यदि वह सराहना चाहते हैं, तो 'हम इसके लिए आपकी सराहना करते हैं।' शीर्ष अदालत ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले, वकील ने कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जुलाई 2024 में जारी एक आदेश को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके तहत तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को बचाने के लिए छह मामले दायर करने के एवज में एक करोड़ रुपये शुल्क और खर्च के भुगतान के उनके दावे को अस्वीकार कर दिया गया था।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ ने भी खारिज की थी याचिका
यह मामला लखनऊ के वकील अशोक पांडे की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के पिछले साल मार्च के एक आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने भी वकील की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें केंद्र सरकार से उनके द्वारा दायर छह मामलों के लिए एक करोड़ रुपये शुल्क और खर्च देने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
वकील का दावा और पीठ की प्रतिक्रिया
वकील अशोक पांडे ने शीर्ष अदालत को बताया कि उन्होंने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश मिश्रा का बचाव करने के लिए ये छह मामले दायर किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इन मामलों में मुकदमेबाजी पर 2 लाख रुपये का खर्च आया था और इसके लिए उन्होंने अपनी बेटी से पैसे लिए थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, 'न्यायाधीशों के खिलाफ तरह-तरह के आरोप लगाने के बाद, आप अब 'माननीय' शब्द का प्रयोग क्यों कर रहे हैं?' वकील ने जनवरी 2018 में शीर्ष अदालत के तत्कालीन चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों द्वारा मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना नियमों के विरुद्ध था।
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सामाजिक सेवा हमेशा अनमोल होती है- सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने वकील की दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'आपने संस्था के लिए सामाजिक सेवा प्रदान की। सामाजिक सेवा हमेशा अनमोल होती है। इसे एक करोड़ या दो करोड़ रुपये में कैसे आंका जा सकता है?' पीठ ने आगे कहा कि वकील ने सामाजिक सेवा की है और यदि वह सराहना चाहते हैं, तो 'हम इसके लिए आपकी सराहना करते हैं।' शीर्ष अदालत ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले, वकील ने कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जुलाई 2024 में जारी एक आदेश को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके तहत तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को बचाने के लिए छह मामले दायर करने के एवज में एक करोड़ रुपये शुल्क और खर्च के भुगतान के उनके दावे को अस्वीकार कर दिया गया था।
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