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ईडी-IPAC विवाद: क्या है पूरा मामला, TMC कटघरे में क्यों? बंगाल में छापेमारी के दौरान ED को क्या मिला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 14 Apr 2026 01:35 PM IST
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सार
ईडी के मुताबिक अब तक की गई जांच में आईपीएसी द्वारा वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न तरीकों के कई उदाहरण सामने आए हैं। इनमें हिसाब-किताब वाले और बिना हिसाब-किताब वाले फंड के मिलने, बिना किसी व्यावसायिक प्रमाण पत्र के असुरक्षित ऋण प्राप्त करना, फर्जी बिल और चालान जारी करना, तीसरे पक्ष से धन प्राप्त करना और अंतरराष्ट्रीय हवाला सहित हवाला चैनलों के माध्यम से नकदी का लेन-देन शामिल है।
प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को दावा किया कि इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपीएसी) के ठिकानों पर मारे गए छापों के दौरान बरामद दस्तावेजी सबूत एक राजनीतिक दल के कार्यालय में भी मिले हैं। ईडी की रिमांड कॉपी के अनुसार यह भी आरोप लगाया गया है कि तलाशी के तुरंत बाद आईपीएसी कर्मचारियों के खातों से संवेदनशील ईमेल हटा दिए गए थे।
एजेंसी ने 50 प्रतिशत चेक भुगतान के मामलों को भी उजागर किया, जो बैंकिंग चैनलों के जरिए आंशिक लेनदेन का संकेत देते हैं। इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने कथित कोयला तस्करी मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के संबंध में आईपीएसी के निदेशक विनेश चंदेल को 10 दिनों के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया।
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10 दिनों की ईडी की हिरासत में आईपीएसी के निदेशक
ईडी की विशेष इकाई ने चंदेल को 13 अप्रैल को दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। वह आईपीएसी के संस्थापक, निदेशक और 33 प्रतिशत शेयरधारक हैं।
ईडी ने दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। एजेंसी के अनुसार, अब तक की जांच में कंपनी से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न तरीकों के कई मामले सामने आए हैं। इनमें हिसाब में दर्ज और बिना हिसाब के धन मिलने, व्यावसायिक साख के बिना असुरक्षित ऋण, फर्जी बिलों और चालानों का जारी होना, तीसरे पक्ष के माध्यम से पैसे लेना और हवाला चैनलों के जरिए नकदी का आवागमन शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि कंपनी पर करोड़ों रुपये की अपराध आय के धनशोधन करने का संदेह है, जिसमें जांच के दौरान अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये का पता चला है।
इन्हें जारी किया पेशी का समन
प्रवर्तन निदेशालय ने आईपीएसी मामले से जुड़े हवाला लेनदेन के संबंध में पुलकित जैन और प्रतीक जैन की पत्नी बार्बी जैन को 15 अप्रैल को दिल्ली स्थित मुख्यालय में तलब किया है। अधिकारियों के अनुसार, पुलकित जैन, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपीएसी) के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन के भाई हैं।
छापेमारी में क्या-क्या किया जब्त?
जांच के दौरान लेनदेन से जुड़े अलग-अलग व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए और कई स्थानों पर तलाशी ली गई, जिससे आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई। ईडी ने कहा कि कथित अपराध में चंदेल की भूमिका सामने आई है और कानून के तहत, कंपनी के निदेशकों को उन अपराधों के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है जो उनकी सहमति, मिलीभगत या लापरवाही के कारण होते हैं।
ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में सियासत: रायगंज की चुनावी रैली में राहुल गांधी बोले- भाजपा और आरएसएस लोकतंत्र को कमजोर कर रहे
इससे पहले 2 अप्रैल को एजेंसी ने हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, विजयवाड़ा और रांची में 11 स्थानों पर तलाशी ली थी, जिसमें आई-पैक के कार्यालय, उसके निदेशकों के आवास और संबंधित संस्थाओं के परिसर शामिल थे। इन तलाशी में भी कथित मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन से संबंधित सामग्री बरामद हुई थी।
विनेश चंदेल की गिरफ्तारी पर क्या बोली टीएमसी?
आईपीएसी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी पर टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, "हम विनेश चंदेल की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं। हम मांग करते हैं कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों को बंगाल से वापस बुलाया जाए। चलिए उस संगठन की बात करते हैं जिसने कल रात अपना नया नाम घोषित किया है। यह संगठन पहले ईडी के नाम से जाना जाता था। अब उन्होंने अपना नाम बदलकर 'अत्यंत हताश' रख लिया है।"
टीएमसी नेता ने कहा, "मतदान से 10 दिन पहले की कार्रवाई कानून प्रवर्तन नहीं है, बल्कि चुनावी धांधली है। ईडी के बारे में, पीएमएलए के तहत, हमने यह बात पहले भी कही है, लेकिन हम इसे फिर से दोहरा रहे हैं। केवल 0.1% मामलों में ही दोष सिद्ध होता है। भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे 25 विपक्षी नेताओं में से 23 पर निरमा का प्रभाव है। भाजपा में शामिल होते ही उन्हें निरमा का एक पैकेट दे दिया जाता है और वे सब साफ हो जाते हैं। इसलिए यह एक राजनीतिक हथियार है, यह हम सब जानते हैं।"
क्या बोले अभिषेक बनर्जी?
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि इस गिरफ्तारी से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। उन्होंने कहा, "बंगाल चुनावों से ठीक 10 दिन पहले आईपीएसी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के विचार को ही हिला देती है।"
उन्होंने आगे कहा, "ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की ओर बढ़ना चाहिए, इस तरह की कार्रवाई एक भयावह संदेश देती है: अगर आप विपक्ष के साथ काम करते हैं, तो अगला नंबर आपका हो सकता है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि धमकी है।" बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज में "दोहरे मापदंड" का भी आरोप लगाया था।
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एजेंसी ने 50 प्रतिशत चेक भुगतान के मामलों को भी उजागर किया, जो बैंकिंग चैनलों के जरिए आंशिक लेनदेन का संकेत देते हैं। इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने कथित कोयला तस्करी मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के संबंध में आईपीएसी के निदेशक विनेश चंदेल को 10 दिनों के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया।
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10 दिनों की ईडी की हिरासत में आईपीएसी के निदेशक
ईडी की विशेष इकाई ने चंदेल को 13 अप्रैल को दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। वह आईपीएसी के संस्थापक, निदेशक और 33 प्रतिशत शेयरधारक हैं।
ईडी ने दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। एजेंसी के अनुसार, अब तक की जांच में कंपनी से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न तरीकों के कई मामले सामने आए हैं। इनमें हिसाब में दर्ज और बिना हिसाब के धन मिलने, व्यावसायिक साख के बिना असुरक्षित ऋण, फर्जी बिलों और चालानों का जारी होना, तीसरे पक्ष के माध्यम से पैसे लेना और हवाला चैनलों के जरिए नकदी का आवागमन शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि कंपनी पर करोड़ों रुपये की अपराध आय के धनशोधन करने का संदेह है, जिसमें जांच के दौरान अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये का पता चला है।
इन्हें जारी किया पेशी का समन
प्रवर्तन निदेशालय ने आईपीएसी मामले से जुड़े हवाला लेनदेन के संबंध में पुलकित जैन और प्रतीक जैन की पत्नी बार्बी जैन को 15 अप्रैल को दिल्ली स्थित मुख्यालय में तलब किया है। अधिकारियों के अनुसार, पुलकित जैन, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपीएसी) के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन के भाई हैं।
छापेमारी में क्या-क्या किया जब्त?
जांच के दौरान लेनदेन से जुड़े अलग-अलग व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए और कई स्थानों पर तलाशी ली गई, जिससे आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई। ईडी ने कहा कि कथित अपराध में चंदेल की भूमिका सामने आई है और कानून के तहत, कंपनी के निदेशकों को उन अपराधों के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है जो उनकी सहमति, मिलीभगत या लापरवाही के कारण होते हैं।
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इससे पहले 2 अप्रैल को एजेंसी ने हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, विजयवाड़ा और रांची में 11 स्थानों पर तलाशी ली थी, जिसमें आई-पैक के कार्यालय, उसके निदेशकों के आवास और संबंधित संस्थाओं के परिसर शामिल थे। इन तलाशी में भी कथित मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन से संबंधित सामग्री बरामद हुई थी।
विनेश चंदेल की गिरफ्तारी पर क्या बोली टीएमसी?
आईपीएसी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी पर टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, "हम विनेश चंदेल की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं। हम मांग करते हैं कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों को बंगाल से वापस बुलाया जाए। चलिए उस संगठन की बात करते हैं जिसने कल रात अपना नया नाम घोषित किया है। यह संगठन पहले ईडी के नाम से जाना जाता था। अब उन्होंने अपना नाम बदलकर 'अत्यंत हताश' रख लिया है।"
टीएमसी नेता ने कहा, "मतदान से 10 दिन पहले की कार्रवाई कानून प्रवर्तन नहीं है, बल्कि चुनावी धांधली है। ईडी के बारे में, पीएमएलए के तहत, हमने यह बात पहले भी कही है, लेकिन हम इसे फिर से दोहरा रहे हैं। केवल 0.1% मामलों में ही दोष सिद्ध होता है। भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे 25 विपक्षी नेताओं में से 23 पर निरमा का प्रभाव है। भाजपा में शामिल होते ही उन्हें निरमा का एक पैकेट दे दिया जाता है और वे सब साफ हो जाते हैं। इसलिए यह एक राजनीतिक हथियार है, यह हम सब जानते हैं।"
क्या बोले अभिषेक बनर्जी?
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि इस गिरफ्तारी से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। उन्होंने कहा, "बंगाल चुनावों से ठीक 10 दिन पहले आईपीएसी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के विचार को ही हिला देती है।"
उन्होंने आगे कहा, "ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की ओर बढ़ना चाहिए, इस तरह की कार्रवाई एक भयावह संदेश देती है: अगर आप विपक्ष के साथ काम करते हैं, तो अगला नंबर आपका हो सकता है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि धमकी है।" बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज में "दोहरे मापदंड" का भी आरोप लगाया था।
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