{"_id":"6a7da06f4fc17b261201943e","slug":"ed-punjab-industrial-plots-allotted-to-ineligible-beneficiaries-officials-associates-allegedly-favored-2026-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"ED: तकनीकी उद्योग का अनुभव नहीं, फिर भी पंजाब में मिले इंडस्ट्रियल प्लॉट; अफसरों के करीबियों पर मेहरबानी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ED: तकनीकी उद्योग का अनुभव नहीं, फिर भी पंजाब में मिले इंडस्ट्रियल प्लॉट; अफसरों के करीबियों पर मेहरबानी
Thu, 13 Aug 2026 04:16 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 13 Aug 2026 04:16 PM IST
विज्ञापन
ED
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच के सिलसिले में पिछले सप्ताह चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में 11 जगहों पर छापेमारी की थी। पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन (पीएसआईईसी) के ऑफिस में सर्वे किया। यह जांच पीएसआईईसी अधिकारियों द्वारा अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और अन्य सहयोगियों के नाम पर इंडस्ट्रियल प्लॉट के गैर-कानूनी आवंटन से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के संबंध में की गई। ईडी ने तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं।
नकली फर्म और नकली पतों का इस्तेमाल
ईडी ने विजिलेंस ब्यूरो पुलिस स्टेशन द्वारा कई पीएसआईईसी अधिकारियों और अन्य निजी व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988 (पीसी अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित) और भारतीय दंड संहिता (असईपीसी), 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि इंडस्ट्रियल प्लॉट ऐसे लोगों को दिए गए थे, जिन्हें टेक्निकल इंडस्ट्रीज के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। प्राइवेट लोगों ने इंडस्ट्रियल प्लॉट के लिए अप्लाई करते समय नकली फर्म और नकली पतों का इस्तेमाल किया। पीएसआईईसी अधिकारियों के साथ करीबी संबंधों के कारण ये प्लॉट उन्हें दे दिए गए।
अलॉटमेंट की तारीखों को कई साल आगे बढ़ाया
प्लॉट का कब्जा भी तय समय पर नहीं दिया गया और इसमें कई वर्षों की देरी हुई। बीच के समय को 'ज़ीरो पीरियड' माना गया और पेमेंट प्लान के लिए अलॉटमेंट की तारीखों को कई साल आगे बढ़ा दिया गया। इसके चलते उस बीच के समय के लिए कोई ब्याज नहीं लिया गया। जांच से पता चला है कि ये गैर-कानूनी अलॉटमेंट भारी रिश्वत के बदले किए गए थे, जो अधिकारियों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कैश ट्रांज़ैक्शन और जटिल फाइनेंशियल व्यवस्थाओं के जरिए मिली थी। कई अलॉटमेंट, शेल कंपनियों और नकली फ़र्मों के नाम पर किए गए थे। बाद में इनका इस्तेमाल अलॉट किए गए प्लॉट को मौजूदा मार्केट रेट पर बाहरी लोगों को बेचने के लिए किया गया। इससे आरोपियों को भारी कमाई करने का अवसर मिल गया।
विज्ञापन
इंडस्ट्री की जगह पर रेजिडेंशियल प्लाटिंग
इसके अलावा, यह भी पता चला कि इंडस्ट्री लगाने के लिए अलॉट किए गए प्लॉट को बांटकर रेजिडेंशियल/कमर्शियल प्लॉटिंग के लिए इस्तेमाल किया गया। तलाशी के दौरान कई अहम सबूत इकट्ठा किए गए और 12,15,000 रुपये का बिना हिसाब-किताब वाला कैश बरामद और ज़ब्त किया गया। साथ ही, पीएसआईईसी के रिटायर्ड चीफ जनरल मैनेजर सुरिंदर पाल सिंह और रिटायर्ड जनरल मैनेजर जसविंदर सिंह रंधावा के बैंक अकाउंट में मौजूद लगभग 4.01 करोड़ रुपये भी फ्रीज़ किए गए।
विज्ञापन
नकली फर्म और नकली पतों का इस्तेमाल
ईडी ने विजिलेंस ब्यूरो पुलिस स्टेशन द्वारा कई पीएसआईईसी अधिकारियों और अन्य निजी व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988 (पीसी अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित) और भारतीय दंड संहिता (असईपीसी), 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि इंडस्ट्रियल प्लॉट ऐसे लोगों को दिए गए थे, जिन्हें टेक्निकल इंडस्ट्रीज के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। प्राइवेट लोगों ने इंडस्ट्रियल प्लॉट के लिए अप्लाई करते समय नकली फर्म और नकली पतों का इस्तेमाल किया। पीएसआईईसी अधिकारियों के साथ करीबी संबंधों के कारण ये प्लॉट उन्हें दे दिए गए।
विज्ञापन
अलॉटमेंट की तारीखों को कई साल आगे बढ़ाया
प्लॉट का कब्जा भी तय समय पर नहीं दिया गया और इसमें कई वर्षों की देरी हुई। बीच के समय को 'ज़ीरो पीरियड' माना गया और पेमेंट प्लान के लिए अलॉटमेंट की तारीखों को कई साल आगे बढ़ा दिया गया। इसके चलते उस बीच के समय के लिए कोई ब्याज नहीं लिया गया। जांच से पता चला है कि ये गैर-कानूनी अलॉटमेंट भारी रिश्वत के बदले किए गए थे, जो अधिकारियों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कैश ट्रांज़ैक्शन और जटिल फाइनेंशियल व्यवस्थाओं के जरिए मिली थी। कई अलॉटमेंट, शेल कंपनियों और नकली फ़र्मों के नाम पर किए गए थे। बाद में इनका इस्तेमाल अलॉट किए गए प्लॉट को मौजूदा मार्केट रेट पर बाहरी लोगों को बेचने के लिए किया गया। इससे आरोपियों को भारी कमाई करने का अवसर मिल गया।
विज्ञापन
इंडस्ट्री की जगह पर रेजिडेंशियल प्लाटिंग
इसके अलावा, यह भी पता चला कि इंडस्ट्री लगाने के लिए अलॉट किए गए प्लॉट को बांटकर रेजिडेंशियल/कमर्शियल प्लॉटिंग के लिए इस्तेमाल किया गया। तलाशी के दौरान कई अहम सबूत इकट्ठा किए गए और 12,15,000 रुपये का बिना हिसाब-किताब वाला कैश बरामद और ज़ब्त किया गया। साथ ही, पीएसआईईसी के रिटायर्ड चीफ जनरल मैनेजर सुरिंदर पाल सिंह और रिटायर्ड जनरल मैनेजर जसविंदर सिंह रंधावा के बैंक अकाउंट में मौजूद लगभग 4.01 करोड़ रुपये भी फ्रीज़ किए गए।