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ओडिशा DGP की कुर्सी पर घमासान: सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को 18 अगस्त तक नाम तय करने से रोका, क्या है पूरा मामला?
Thu, 13 Aug 2026 04:12 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 13 Aug 2026 04:12 PM IST
सार
ओडिशा के नए डीजीपी की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यूपीएससी को नाम तय करने से रोक दिया है। 18 अगस्त की सुनवाई अहम होगी, क्योंकि इसी में पैनल और कनिष्ठ अधिकारी को शामिल करने के आरोप पर स्थिति साफ हो सकती है। क्या है पूरा मामला? विस्तार से जानिए...
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी से कहा है कि वह 18 अगस्त तक डीजीपी पद के संभावित अधिकारियों के नाम अंतिम रूप न दे। अदालत ने यह निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओडिशा सरकार डीजीपी पद के लिए एक कनिष्ठ अधिकारी को संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल करने की कोशिश कर रही है। याचिकाकर्ता ने इसे 2006 के प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन बताया है।
क्या 18 अगस्त तक नाम तय नहीं करेगा यूपीएससी?
सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी के वकील से साफ कहा कि अगली सुनवाई तक नाम अंतिम रूप न दिए जाएं। अदालत ने कहा, 'हम 18 अगस्त को इस मामले को सुनेंगे। उस दिन हमारी सहायता कीजिए, लेकिन तब तक नाम अंतिम रूप न दें।' अदालत को यह भी कहा कि यूपीएससी की गुरुवार को इस मुद्दे पर बैठक होनी थी। इसके बाद यूपीएससी की ओर से कहा गया कि अगली सुनवाई तक इस मामले में कोई बैठक नहीं होगी। पीठ ने मामले को 18 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
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विवाद आखिर किस बात पर है?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने अदालत को बताया कि बुधवार को ओडिशा में एडीजीपी स्तर के एक अधिकारी को पदोन्नत किया गया है। उनका आरोप है कि इसी अधिकारी को अब नए पैनल में शामिल करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले से प्रभावित किसी अधिकारी ने अब तक सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है।
राज्य सरकार के वकील ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। लेकिन प्रकाश सिंह मामले में अदालत की सहायता कर रहे न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने याचिका में उठाई गई चिंता का समर्थन किया। सर्वोच्च अदालत ने राज्य से इस पर स्पष्टीकरण मांगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर बैक डोर एंट्री है, तो यह स्वीकार्य नहीं है। जब राज्य की ओर से कहा गया कि नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, तब शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायमित्र ने भी चिंता जताई है। इसलिए राज्य को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: 'स्वास्थ्य से ऊपर कारोबारी हित नहीं': पैकेज्ड फूड लेबलिंग पर 'सुप्रीम' फटकार, केंद्र-FSSAI से मांगा जवाब
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
प्रकाश सिंह मामले में क्या था सुप्रीम कोर्ट का निर्देश?
साल 2006 के प्रकाश सिंह फैसले और बाद के निर्देशों में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट व्यवस्था दी थी। इसके अनुसार, राज्य का डीजीपी विभाग के तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से चुना जाना चाहिए। इन अधिकारियों का यूपीएससी की ओर से उस पद के लिए पैनल तैयार किया जाना जरूरी है। इसके लिए सेवा अवधि, बहुत अच्छा सेवा रिकॉर्ड और पुलिस बल का नेतृत्व करने का अनुभव देखा जाता है। अदालत ने यह भी कहा था कि चुने गए डीजीपी को कम से कम दो साल का कार्यकाल मिलना चाहिए। उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख इस न्यूनतम कार्यकाल को प्रभावित नहीं करेगी।
क्या पहले भी पैनल को लेकर विवाद हुआ था?
पी चिदंबरम ने 11 अगस्त को हुई सुनवाई में कहा था कि ओडिशा सरकार एक अयोग्य अधिकारी को यूपीएससी को भेजे जाने वाले पैनल में शामिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया था कि यूपीएससी को सात अगस्त को ओडिशा के डीजीपी पद के लिए तीन पात्र डीजीपी स्तर के अधिकारियों के पैनल पर विचार करना था। लेकिन राज्य सरकार ने अधिकारियों की सूची वापस ले ली।
चिदंबरम के मुताबिक, ओडिशा सरकार ने अप्रैल में भी एक पैनल भेजा था। बाद में इसे वापस ले लिया गया। मई में भेजे गए दूसरे पैनल में तीन डीजीपी और आठ एडीजीपी शामिल थे। मामला अब 18 अगस्त को फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने होगा। तब अदालत यह देखेगी कि डीजीपी चयन में तय नियमों का पालन हुआ है या नहीं।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओडिशा सरकार डीजीपी पद के लिए एक कनिष्ठ अधिकारी को संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल करने की कोशिश कर रही है। याचिकाकर्ता ने इसे 2006 के प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन बताया है।
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क्या 18 अगस्त तक नाम तय नहीं करेगा यूपीएससी?
सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी के वकील से साफ कहा कि अगली सुनवाई तक नाम अंतिम रूप न दिए जाएं। अदालत ने कहा, 'हम 18 अगस्त को इस मामले को सुनेंगे। उस दिन हमारी सहायता कीजिए, लेकिन तब तक नाम अंतिम रूप न दें।' अदालत को यह भी कहा कि यूपीएससी की गुरुवार को इस मुद्दे पर बैठक होनी थी। इसके बाद यूपीएससी की ओर से कहा गया कि अगली सुनवाई तक इस मामले में कोई बैठक नहीं होगी। पीठ ने मामले को 18 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
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विवाद आखिर किस बात पर है?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने अदालत को बताया कि बुधवार को ओडिशा में एडीजीपी स्तर के एक अधिकारी को पदोन्नत किया गया है। उनका आरोप है कि इसी अधिकारी को अब नए पैनल में शामिल करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले से प्रभावित किसी अधिकारी ने अब तक सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है।
राज्य सरकार के वकील ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। लेकिन प्रकाश सिंह मामले में अदालत की सहायता कर रहे न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने याचिका में उठाई गई चिंता का समर्थन किया। सर्वोच्च अदालत ने राज्य से इस पर स्पष्टीकरण मांगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर बैक डोर एंट्री है, तो यह स्वीकार्य नहीं है। जब राज्य की ओर से कहा गया कि नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, तब शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायमित्र ने भी चिंता जताई है। इसलिए राज्य को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: 'स्वास्थ्य से ऊपर कारोबारी हित नहीं': पैकेज्ड फूड लेबलिंग पर 'सुप्रीम' फटकार, केंद्र-FSSAI से मांगा जवाब
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- 16 अगस्त: मौजूदा डीजीपी वाई बी खुरानिया पद से हटेंगे।
- 18 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई करेगा।
- यूपीएससी: तब तक संभावित अधिकारियों के नाम अंतिम रूप नहीं देगा।
- याचिका: कनिष्ठ अधिकारी को पैनल में शामिल करने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।
- प्रकाश सिंह मामला: डीजीपी चयन के लिए वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और अनुभव से जुड़े नियम लागू हैं।
प्रकाश सिंह मामले में क्या था सुप्रीम कोर्ट का निर्देश?
साल 2006 के प्रकाश सिंह फैसले और बाद के निर्देशों में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट व्यवस्था दी थी। इसके अनुसार, राज्य का डीजीपी विभाग के तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से चुना जाना चाहिए। इन अधिकारियों का यूपीएससी की ओर से उस पद के लिए पैनल तैयार किया जाना जरूरी है। इसके लिए सेवा अवधि, बहुत अच्छा सेवा रिकॉर्ड और पुलिस बल का नेतृत्व करने का अनुभव देखा जाता है। अदालत ने यह भी कहा था कि चुने गए डीजीपी को कम से कम दो साल का कार्यकाल मिलना चाहिए। उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख इस न्यूनतम कार्यकाल को प्रभावित नहीं करेगी।
क्या पहले भी पैनल को लेकर विवाद हुआ था?
पी चिदंबरम ने 11 अगस्त को हुई सुनवाई में कहा था कि ओडिशा सरकार एक अयोग्य अधिकारी को यूपीएससी को भेजे जाने वाले पैनल में शामिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया था कि यूपीएससी को सात अगस्त को ओडिशा के डीजीपी पद के लिए तीन पात्र डीजीपी स्तर के अधिकारियों के पैनल पर विचार करना था। लेकिन राज्य सरकार ने अधिकारियों की सूची वापस ले ली।
चिदंबरम के मुताबिक, ओडिशा सरकार ने अप्रैल में भी एक पैनल भेजा था। बाद में इसे वापस ले लिया गया। मई में भेजे गए दूसरे पैनल में तीन डीजीपी और आठ एडीजीपी शामिल थे। मामला अब 18 अगस्त को फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने होगा। तब अदालत यह देखेगी कि डीजीपी चयन में तय नियमों का पालन हुआ है या नहीं।