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ED: 3000 करोड़ का छत्तीसगढ़ शराब घोटाला, क्या राजीव भवन में पूर्व खंजाची के इशारे पर पहुंचाया गया कैश?

Wed, 12 Aug 2026 04:30 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 12 Aug 2026 04:30 PM IST
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ED: rs3000 crore Chhattisgarh liquor scam, was cash delivered to Rajiv Bhavan at the behest of former treasure
ED - फोटो : ANI

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस द्वारा छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल अग्रवाल ईडी की हिरासत में हैं। करीब तीन हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच कर रही ईडी के पास सवालों की लंबी सूची है। ईडी का आरोप है कि अपराध की आय का एक हिस्सा पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के कहने पर राजीव भवन में पहुंचाया गया था। कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल तीन साल से फरार चल रहे थे। उन्होंने पिछले महीने रायपुर में आर्थिक अपराध शाखा के दफ्तर में पहुंचकर सरेंडर किया था। 

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चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल 
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ़्तार किया है। रामगोपाल अग्रवाल, जो रायपुर की सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी के तौर पर बंद थे, उन्हें 11 अगस्त गिरफ़्तार किया गया। रायपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए ने उन्हें 18 अगस्त तक के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया है। अग्रवाल, उस समय छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष थे। ईडी ने आर्थिक अपराध शाखा/एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज केस के आधार इस मामले की जांच शुरू की है। हालांकि ईडी के पास यह केस आने से पहले इसमें चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी। चार्जशीट में आरोप लगाया गया था कि 2019 से 2023 के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य के आबकारी प्रशासन में बड़े पैमाने पर आपराधिक साज़िश रची गई। इसके बाद धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार से आपराधिक आय एकत्रित की गई। 
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बिना हिसाब-किताब वाली शराब की बिक्री  
ईडी की जांच से पता चला है कि अनिल टुटेजा (रिटायर्ड आईएएस), अनवर ढेबर और अरुण पति त्रिपाठी (आईटीएस) के एक सिंडिकेट ने राज्य के शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर घोटाला किया है। उन्होंने हिसाब-किताब वाली शराब की बिक्री पर अवैध कमीशन लिया। साथ ही बिना हिसाब-किताब वाली देसी शराब की बिक्री कराई। डिस्टिलर्स से वसूले गए सालाना कमीशन और विदेशी शराब कंपनियों व एफएल-10A लाइसेंस देने के बदले वसूले गए कमीशन के ज़रिए लगभग 3000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (अपराध से प्राप्त आय) की।
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रामगोपाल को सौंपा गया अवैध कमाई का हिस्सा 
जांच में यह भी पता चला है कि अपराध से हुई कमाई का एक बड़ा हिस्सा, जो कैश के रूप में मिला था, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को सौंपा गया था। कैश को संभालने और इधर-उधर ले जाने वाले लोगों के बयान से पता चला है कि रामगोपाल अग्रवाल के कहने पर और सिंडिकेट के लोगों के ज़रिए, यह कैश रायपुर के राजीव भवन में पहुंचाया गया था। राजीव भवन में उस समय छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का दफ्तर था। जांच एजेंसी ने  अग्रवाल को पूछताछ के लिए चार समन भेजे थे। इसके बावजूद वे जांच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए। बाद में दर्ज कराए गए अपने बयान में उन्होंने ज्यादातर सवालों के टालमटोल वाले जवाब दिए।

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