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Hindi News ›   India News ›   ED takes major action: Assets worth crores seized in Rs 2,000 crore chit fund scam, 182 bank accounts frozen

ED का बड़ा एक्शन: 2,000 करोड़ के चिटफंड घोटाले में करोड़ों की संपत्ति जब्त, 182 बैंक खाते हुए फ्रीज

Tue, 11 Aug 2026 02:14 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, भुवनेश्वर।
पीटीआई, भुवनेश्वर। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 11 Aug 2026 02:14 PM IST
सार

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2,000 करोड़ रुपये के  चिटफंड घोटाले में विशाखापत्तनम और हैदराबाद में पांच ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई में 1.01 करोड़ रुपये नकद, कई दस्तावेज जब्त किए गए। साथ ही 182 बैंक खाते फ्रीज किए गए। 

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ED takes major action: Assets worth crores seized in Rs 2,000 crore chit fund scam, 182 bank accounts frozen
ईडी की बड़ी कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2,000 करोड़ रुपये के बहु-राज्यीय चिट फंड घोटाले के सिलसिले में छापेमारी के दौरान 182 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। इसके साथ ही 1 करोड़ रुपये से अधिक नकद और छह महंगी कारें जब्त की हैं। यह जानकारी अधिकारियों ने मंगलवार को दी है। 

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ईडी ने क्या बताया?
एक्स पर एक पोस्ट में, ईडी ने कहा कि उसके भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने चिट फंड घोटाले की जांच के सिलसिले में विशाखापत्तनम और हैदराबाद में वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (डब्ल्यूबीईपीएल) और उसके निदेशकों से जुड़े पांच परिसरों पर 5 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत तलाशी अभियान चलाया।

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कहां छापे मारे गए है? 
इसमें कहा गया है कि पूर्व आंध्र प्रदेश विधायक मल्ला विलाया प्रसाद, वराह रामकृष्ण सत्य सिनिवास राव अल्ला और अन्य के परिसरों पर छापे मारे गए।

क्या- क्या जब्त किया गया है? 
केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान, डब्ल्यूबीईपीएल, उसके निदेशकों और संबंधित संस्थाओं से  विभिन्न चल और अचल संपत्तियों, आपत्तिजनक सामग्री/दस्तावेजों (संपत्ति दस्तावेज, विभिन्न डिजिटल उपकरण) के साथ-साथ 1.01 करोड़ रुपये की भारतीय मुद्रा नकद बरामद कर जब्त की गई। ईडी ने डब्ल्यूबीईपीएल और उसके निदेशकों के छह महंगी लग्जरी गाड़ियों को जब्त करने के साथ-साथ 182 बैंक खातों को फ्रीज करने के आदेश भी जारी किए हैं।

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जांच कैसे शुरू हुई? 
ईडी के भुवनेश्वर कार्यालय ने ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), सीबीआई और झारखंड के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) की ओर से दायर कई एफआईआर और उसके बाद की चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की।

 ईडी ने जांच में क्या पाया?  
जांच के दौरान, केंद्रीय एजेंसी ने पाया कि डब्ल्यूबीईपीएल के निदेशकों और प्रबंध निदेशक ने विशाखापत्तनम में भूमि उपलब्ध कराने के झूठे बहाने से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के हजारों भोले-भाले निवेशकों से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी मात्रा में सार्वजनिक धन अनाधिकृत रूप से एकत्र किया है।

कंपनी ने निवेशकों को कैसे धोखा दिया? 
कंपनी ने बाद में भारत के कई राज्यों में स्थित अपनी शाखा कार्यालयों से अपना परिचालन बंद कर दिया। इस प्रकार निवेशकों को धोखा दिया। बयान में कहा गया है कि निदेशकों ने निवेशकों के धन का दुरुपयोग असंबंधित उद्देश्यों और व्यक्तिगत लाभ के लिए किया है, जमा राशि को छिपाने के लिए वित्तीय विवरणों में हेरफेर किया है और वास्तविक प्रतिफल को दबाने और वैधानिक दायित्वों से बचने के लिए अनियमित भूमि लेनदेन में संलग्न रहे हैं।

 

 

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