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ED: वीडियोकॉन के संस्थापकों पर 2.03 बिलियन US डॉलर के गबन का आरोप, सुनियोजित नेटवर्क से हुई मनी लॉन्ड्रिंग
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Wed, 22 Apr 2026 05:13 PM IST
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सार
वीएन धूत और 12 अन्य लोगों के मामले में विशेष न्यायालय ने 10.02.2026 को संज्ञान लिया है। वीडियोकॉन के संस्थापकों एवं दूसरे लोगों पर 2.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर के गबन का आरोप है। सुनियोजित नेटवर्क से मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विशेष न्यायालय (पीएमएलए), राउज एवेन्यू, नई दिल्ली के समक्ष एक पूरक अभियोग शिकायत दायर की है। इसमें यूनाइटेड किंगडम के नागरिक और निवासी सचिन देव दुग्गल (53बी, लैंकेस्टर गेट, लंदन) को आरोपी बनाया गया है। यह शिकायत वीडियोकॉन ग्रुप के पूर्व सीईओ वीएन धूत के विरुद्ध दिनांक 18.12.2024 की मूल अभियोग शिकायत के क्रम में दायर की गई है। वीएन धूत और 12 अन्य लोगों के मामले में विशेष न्यायालय ने 10.02.2026 को संज्ञान लिया है। वीडियोकॉन के संस्थापकों एवं दूसरे लोगों पर 2.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर के गबन का आरोप है। सुनियोजित नेटवर्क से मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।
विदेशी संस्थाओं के माध्यम से गबन
ईडी ने सीबीआई की एफआईआर (आरसी 2172020ए0002 दिनांक 23.06.2020) के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि मेसर्स वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी मेसर्स वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग्स लिमिटेड (वीएचएचएल) ने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह से 2,773.60 मिलियन अमेरिकी डॉलर की स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (एसबीएलसी) सुविधा का लाभ उठाया था। जाहिर तौर पर यह सुविधा मोजाम्बिक, ब्राजील और इंडोनेशिया में विदेशी तेल और गैस संपत्तियों के विकास के लिए थी। जांच में पता चला है कि वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तकों द्वारा लगभग 2.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर की इन धनराशि का व्यवस्थित रूप से विदेशी संस्थाओं के एक जटिल जाल के माध्यम से गबन किया गया।
बिना ऋण समझौते के 17.32 करोड़ का ब्याज
जांच से पता चला है कि स्विस कंपनी 'एन होल्डिंग एसके' के चेयरमैन और भारतीय टेक कंपनियों नीवियो टेक्नालॉजी और इंजीनियर.एआई के वास्तविक मालिक सचिन देव दुग्गल एक सुनियोजित योजना के प्रमुख लाभार्थी थे। इसके तहत वीडियोकॉन इंडस्ट्री लिमिटेड 'वीआईएल' से धनराशि को विदेशी संस्थाओं के एक नेटवर्क के माध्यम से निकालकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी। यह योजना 2008 में शुरू हुई, जब वीआईएल ने दुग्गल के नियंत्रण वाली नीवियो टेक्नालॉजी प्राइवेट लि. को बिना किसी औपचारिक ऋण समझौते के कुल 17.32 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण देना शुरू किया। 24 मई 2011 को जल्दबाजी में एक ऋण समझौता किया गया। ठीक अगले दिन, वीडियोकॉन की एक विदेशी इकाई ने दुग्गल की स्विस कंपनी 'एन होल्डिंग एसए' में भारी मूल्य पर 37.9 लाख सीएचएफ का निवेश किया। खास बात है कि उस वक्त कंपनी घाटे में चल रही थी।
पांच संस्थाओं के जरिए 20.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर
2011 और 2014 के बीच, वीडियोकॉन ने सुनियोजित पांच संस्थाओं के विदेशी नेटवर्क के माध्यम से एनहोल्डिंग्स एसए को 37.07 लाख अमेरिकी डॉलर (20.12 करोड़ रुपये) और सीधे सचिन देव दुग्गल को व्यक्तिगत रूप से हस्तांतरित किए। मेसर्स निवियो टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वित्तीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान कंपनी को दुग्गल की स्विस कंपनी एनहोल्डिंग्स एसए से 35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह वही समय था जब वीडियोकॉन ग्रुप 'एन होल्डिंग्स एसए' में निवेश कर रहा था। इसी वर्ष नीवियो टेक्नोलॉजीज की स्वामित्व संरचना में भी परिवर्तन किया गया।
निवेश को पूरी तरह से बट्टे खाते में डाल दिया
एनहोल्डिंग्स एसए को निवियो टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की परम मूल कंपनी बनाया गया। मेसर्स निवियो क्लाउड कंप्यूटिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निवियो टेक्नोलॉजीज में शेयर रखने वाली एक मध्यवर्ती इकाई के रूप में स्थापित किया गया। इस पुनर्गठन के माध्यम से दुग्गल ने यह सुनिश्चित किया कि भारत और विदेश, दोनों में स्थित सभी कंपनियां उनके प्रत्यक्ष नियंत्रण में रहें। हालांकि, इन निधियों का अंतिम उपयोग अभी भी स्पष्ट नहीं है। 31.03.2013 को समाप्त हुए वर्ष के लिए मेसर्स एनहोल्डिंग्स एसए के वित्तीय विवरण के अनुसार, मेसर्स निवियो में किए गए निवेश को पूरी तरह से बट्टे खाते में डाल दिया गया था। पीएमएलए की धारा 50 के तहत (जनवरी 2022 से) कई बार समन जारी किए जाने के बावजूद, सचिन देव दुग्गल ईडी के समक्ष पेश होने में विफल रहे। उन्होंने जांच एजेंसी को ईमेल के माध्यम से केवल आंशिक और टालमटोल वाले दस्तावेजी दस्तावेजी दस्तावेज प्रस्तुत किए।
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विदेशी संस्थाओं के माध्यम से गबन
ईडी ने सीबीआई की एफआईआर (आरसी 2172020ए0002 दिनांक 23.06.2020) के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि मेसर्स वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी मेसर्स वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग्स लिमिटेड (वीएचएचएल) ने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह से 2,773.60 मिलियन अमेरिकी डॉलर की स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (एसबीएलसी) सुविधा का लाभ उठाया था। जाहिर तौर पर यह सुविधा मोजाम्बिक, ब्राजील और इंडोनेशिया में विदेशी तेल और गैस संपत्तियों के विकास के लिए थी। जांच में पता चला है कि वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तकों द्वारा लगभग 2.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर की इन धनराशि का व्यवस्थित रूप से विदेशी संस्थाओं के एक जटिल जाल के माध्यम से गबन किया गया।
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बिना ऋण समझौते के 17.32 करोड़ का ब्याज
जांच से पता चला है कि स्विस कंपनी 'एन होल्डिंग एसके' के चेयरमैन और भारतीय टेक कंपनियों नीवियो टेक्नालॉजी और इंजीनियर.एआई के वास्तविक मालिक सचिन देव दुग्गल एक सुनियोजित योजना के प्रमुख लाभार्थी थे। इसके तहत वीडियोकॉन इंडस्ट्री लिमिटेड 'वीआईएल' से धनराशि को विदेशी संस्थाओं के एक नेटवर्क के माध्यम से निकालकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी। यह योजना 2008 में शुरू हुई, जब वीआईएल ने दुग्गल के नियंत्रण वाली नीवियो टेक्नालॉजी प्राइवेट लि. को बिना किसी औपचारिक ऋण समझौते के कुल 17.32 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण देना शुरू किया। 24 मई 2011 को जल्दबाजी में एक ऋण समझौता किया गया। ठीक अगले दिन, वीडियोकॉन की एक विदेशी इकाई ने दुग्गल की स्विस कंपनी 'एन होल्डिंग एसए' में भारी मूल्य पर 37.9 लाख सीएचएफ का निवेश किया। खास बात है कि उस वक्त कंपनी घाटे में चल रही थी।
पांच संस्थाओं के जरिए 20.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर
2011 और 2014 के बीच, वीडियोकॉन ने सुनियोजित पांच संस्थाओं के विदेशी नेटवर्क के माध्यम से एनहोल्डिंग्स एसए को 37.07 लाख अमेरिकी डॉलर (20.12 करोड़ रुपये) और सीधे सचिन देव दुग्गल को व्यक्तिगत रूप से हस्तांतरित किए। मेसर्स निवियो टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वित्तीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान कंपनी को दुग्गल की स्विस कंपनी एनहोल्डिंग्स एसए से 35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह वही समय था जब वीडियोकॉन ग्रुप 'एन होल्डिंग्स एसए' में निवेश कर रहा था। इसी वर्ष नीवियो टेक्नोलॉजीज की स्वामित्व संरचना में भी परिवर्तन किया गया।
निवेश को पूरी तरह से बट्टे खाते में डाल दिया
एनहोल्डिंग्स एसए को निवियो टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की परम मूल कंपनी बनाया गया। मेसर्स निवियो क्लाउड कंप्यूटिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निवियो टेक्नोलॉजीज में शेयर रखने वाली एक मध्यवर्ती इकाई के रूप में स्थापित किया गया। इस पुनर्गठन के माध्यम से दुग्गल ने यह सुनिश्चित किया कि भारत और विदेश, दोनों में स्थित सभी कंपनियां उनके प्रत्यक्ष नियंत्रण में रहें। हालांकि, इन निधियों का अंतिम उपयोग अभी भी स्पष्ट नहीं है। 31.03.2013 को समाप्त हुए वर्ष के लिए मेसर्स एनहोल्डिंग्स एसए के वित्तीय विवरण के अनुसार, मेसर्स निवियो में किए गए निवेश को पूरी तरह से बट्टे खाते में डाल दिया गया था। पीएमएलए की धारा 50 के तहत (जनवरी 2022 से) कई बार समन जारी किए जाने के बावजूद, सचिन देव दुग्गल ईडी के समक्ष पेश होने में विफल रहे। उन्होंने जांच एजेंसी को ईमेल के माध्यम से केवल आंशिक और टालमटोल वाले दस्तावेजी दस्तावेजी दस्तावेज प्रस्तुत किए।

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