Supreme Court: आज I-PAC पर ईडी की छापेमारी मामले में सुनवाई; सुप्रीम कोर्ट में CM ममता के खिलाफ ED की याचिका
सुप्रीम कोर्ट आज ईडी की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें ममता बनर्जी पर I-PAC छापे के दौरान जांच में हस्तक्षेप और सबूत हटाने के आरोप हैं। ईडी का दावा है कि जनवरी में छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और लैपटॉप, मोबाइल व दस्तावेज हटवाए।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े ईडी की याचिका पर सुनावाई करेगा। इसमें ममता पर भारतीय राजनीतिक एक्शन कमेटी (I-PAC) पर पड़े छापे के दौरान जांच में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला केंद्रीय एजेंसी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच जारी कानूनी विवाद का हिस्सा बन गया है।
क्या है मामला?
मामले की शुरुआत 8 जनवरी को हुई थी, जब ईडी ने कथित बहु-करोड़ रुपये के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के ठिकानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी का आरोप है कि छापे के दौरान ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ I-PAC कार्यालय तथा इसके संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं।
ईडी का क्या है आरोप?
ईडी ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री ने बिना अधिकार कार्रवाई में दखल देते हुए लैपटॉप, मोबाइल फोन और चुनावी डेटा से जुड़े दस्तावेज जैसे अहम सबूत वहां से हटवा दिए। इससे जांच प्रभावित हुई और एजेंसी के काम में बाधा पहुंची।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
इस मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने घटनाक्रम को बेहद असामान्य और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया था। अदालत ने यह भी चिंता जताई थी कि यदि कोई वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारी केंद्रीय एजेंसी की जांच में बाधा डालता है, तो ऐसी स्थिति में कानूनी उपाय क्या होंगे।
अब तक क्या-क्या हुआ?
ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की सीबीआई से जांच कराने, मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस महानिदेशक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि अगर केंद्रीय जांच एजेंसियों के अभियानों को शारीरिक रूप से रोका जाए तो उन्हें बेबस नहीं छोड़ा जा सकता।
वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाया है। राज्य सरकार का तर्क है कि ईडी एक सरकारी विभाग है, इसलिए वह मौलिक अधिकारों का दावा करते हुए सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकती।
राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि यह छापेमारी राजनीतिक उद्देश्य से की गई और टीएमसी को 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कमजोर करने की कोशिश है।
इसी बीच, संबंधित घटनाक्रम में I-PAC के सह-संस्थापक विनेश कुमार चंदेल को 13 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद संगठन ने पश्चिम बंगाल में अपनी गतिविधियां सीमित या अस्थायी रूप से रोक दी हैं। बाद में पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। फिलहाल वह 23 अप्रैल तक हिरासत में रहेंगे।
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