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ठाकरे का राम रक्षा आंदोलन: शिंदे बोले- सियासी सुविधा के लिए उद्धव ने ओढ़ा हिंदुत्व का चोला, और क्या-क्या कहा?
Sun, 19 Jul 2026 02:02 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 19 Jul 2026 02:02 AM IST
सार
महाराष्ट्र में हिंदुत्व की असली विरासत को लेकर जंग बेहद तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर राजनीतिक सुविधा के लिए हिंदुत्व का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिंदे ने कहा कि कांग्रेस से हाथ मिलाकर बालासाहेब के सिद्धांतों को छोड़ने वाले उद्धव अब सिर्फ अपनी पार्टी बचाने के लिए 'राम रक्षा' का ढोंग कर रहे हैं।
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एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री, महाराष्ट्र
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर करारा राजनीतिक हमला बोला। शिंदे ने कहा कि जो लोग कभी रामभक्तों पर अपमानजनक टिप्पणी करते थे और आज कांग्रेस के साथ खड़े हैं, वे अब अचानक भगवान राम और हिंदुत्व की बातें कर रहे हैं।
दरअसल, उद्धव ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित घपले को लेकर 'राम रक्षा' आंदोलन शुरू किया है। इसी सिलसिले में शनिवार को उन्होंने नागपुर के एक राम मंदिर में पूजा-आरती की। वहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ने भाजपा और एकनाथ शिंदे पर जमकर निशाना साधा था।
शिंदे ने क्या-क्या कहा?
शिंदे ने पलटवार करते हुए कहा कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का विरोध करने वालों से उद्धव ने हाथ मिला लिया है। कांग्रेस, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं के साथ गठबंधन करके उद्धव ने बहुत पहले ही हिंदुत्व का रास्ता छोड़ दिया था।
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राम रक्षा आंदोलन या पार्टी बचाने की आखिरी छटपटाहट?
उपमुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर यूबीटी गुट सच में राम रक्षा आंदोलन चलाना चाहता है, तो सबसे पहले अपने गठबंधन सहयोगियों को बुलाए। राहुल गांधी और अखिलेश यादव को इस आंदोलन में आमंत्रित करे। उसके बाद ही आरएसएस प्रमुख और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को न्योता दे।
शिंदे ने याद दिलाया कि बालासाहेब ठाकरे हमेशा 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं' का नारा बुलंद करते थे। वर्षों बाद अब अचानक उद्धव गुट को यह नारा याद आ रहा है। हिंदुत्व कोई राजनीतिक सुविधा की वस्तु नहीं है, जिसे जब चाहा उतार दिया और जब राजनीतिक लाभ दिखा, तब दोबारा पहन लिया। शिंदे ने तंज कसा कि राम रक्षा की बात करने से पहले उद्धव को अपनी पार्टी और अपनी बची-कुची विचारधारा की रक्षा करनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: क्या पूर्वोत्तर बनेगा रक्षा निर्माण का गढ़?: पूर्व सेना प्रमुख ने बताई वजह, कहा-सैनिक ही करेंगे युद्ध का फैसला
शिंदे और उद्धव की बड़ी बातें
क्या सिर्फ सियासी फायदे के लिए जाग उठी है यह राम भक्ति?
इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व की विरासत की जंग को और तेज कर दिया है। शिंदे गुट खुद को बालासाहेब के विचारों का असली वारिस बता रहा है, जबकि उद्धव खेमा भाजपा और शिंदे गठबंधन को राम मंदिर के नाम पर घेरने की कोशिश में जुटा है। नागपुर की जनसभा से शुरू हुआ यह वाकयुद्ध अब मुंबई तक पूरी तरह गरमा चुका है।
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दरअसल, उद्धव ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित घपले को लेकर 'राम रक्षा' आंदोलन शुरू किया है। इसी सिलसिले में शनिवार को उन्होंने नागपुर के एक राम मंदिर में पूजा-आरती की। वहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ने भाजपा और एकनाथ शिंदे पर जमकर निशाना साधा था।
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शिंदे ने क्या-क्या कहा?
शिंदे ने पलटवार करते हुए कहा कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का विरोध करने वालों से उद्धव ने हाथ मिला लिया है। कांग्रेस, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं के साथ गठबंधन करके उद्धव ने बहुत पहले ही हिंदुत्व का रास्ता छोड़ दिया था।
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राम रक्षा आंदोलन या पार्टी बचाने की आखिरी छटपटाहट?
उपमुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर यूबीटी गुट सच में राम रक्षा आंदोलन चलाना चाहता है, तो सबसे पहले अपने गठबंधन सहयोगियों को बुलाए। राहुल गांधी और अखिलेश यादव को इस आंदोलन में आमंत्रित करे। उसके बाद ही आरएसएस प्रमुख और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को न्योता दे।
शिंदे ने याद दिलाया कि बालासाहेब ठाकरे हमेशा 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं' का नारा बुलंद करते थे। वर्षों बाद अब अचानक उद्धव गुट को यह नारा याद आ रहा है। हिंदुत्व कोई राजनीतिक सुविधा की वस्तु नहीं है, जिसे जब चाहा उतार दिया और जब राजनीतिक लाभ दिखा, तब दोबारा पहन लिया। शिंदे ने तंज कसा कि राम रक्षा की बात करने से पहले उद्धव को अपनी पार्टी और अपनी बची-कुची विचारधारा की रक्षा करनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: क्या पूर्वोत्तर बनेगा रक्षा निर्माण का गढ़?: पूर्व सेना प्रमुख ने बताई वजह, कहा-सैनिक ही करेंगे युद्ध का फैसला
शिंदे और उद्धव की बड़ी बातें
- पितृधर्म की अनदेखी: भगवान राम ने पिता के वचन के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया, लेकिन उद्धव ने अपने ही पिता के सिद्धांतों को बीच में छोड़ दिया।
- नैतिक अधिकार खोया: शिंदे के मुताबिक, पिता के आदर्शों को छोड़ने वालों के पास भगवान राम के मूल्यों पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
- पार्टी बचाने की कोशिश: शिंदे ने दावा किया कि 'राम रक्षा' आंदोलन भगवान राम के लिए नहीं, बल्कि अपनी डूबती राजनीतिक पार्टी को बचाने का एक प्रयास है।
- उद्धव का पलटवार: नागपुर में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि मंदिर बन चुका है, अब उसे लुटेरों से बचाने के लिए एक नए आंदोलन की जरूरत है।
- फडणवीस से सवाल: उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए पूछा था कि वह मंदिर के 'लुटेरों' के साथ हैं या राम के 'रक्षकों' के साथ।
क्या सिर्फ सियासी फायदे के लिए जाग उठी है यह राम भक्ति?
इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व की विरासत की जंग को और तेज कर दिया है। शिंदे गुट खुद को बालासाहेब के विचारों का असली वारिस बता रहा है, जबकि उद्धव खेमा भाजपा और शिंदे गठबंधन को राम मंदिर के नाम पर घेरने की कोशिश में जुटा है। नागपुर की जनसभा से शुरू हुआ यह वाकयुद्ध अब मुंबई तक पूरी तरह गरमा चुका है।