पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   El Nino compound global challenges Will India see less rainfall this year Why WMO issue an alert

अल नीनो बढ़ाएगा दुनिया की मुश्किलें: क्या इस साल भारत में बारिश होगी कम? WMO ने क्यों जारी किया अलर्ट

Fri, 03 Jul 2026 05:51 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 03 Jul 2026 05:51 PM IST
सार

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि जुलाई से सितंबर के बीच अल नीनो के तेजी से मजबूत होने की संभावना है। इसके कारण दुनिया भर में हीटवेव, सूखा, भारी बारिश और समुद्री हीटवेव जैसी चरम मौसम घटनाएं बढ़ सकती हैं। 

विज्ञापन
El Nino compound global challenges Will India see less rainfall this year Why WMO issue an alert
अल नीनो से भारत में कम होगी बारिश - फोटो : AI

विस्तार

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि आने वाले महीनों में ट्रॉपिकल प्रशांत (पैसिफिक) महासागर में अल नीनो की स्थिति तेजी से मजबूत होने की संभावना है। इसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में हीटवेव, सूखा, अत्यधिक बारिश और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

विज्ञापन


कब मजबूत हो सकता है अल नीनो?
WMO की मासिक 'ग्लोबल सीज़नल क्लाइमेट अपडेट' रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान अल नीनो के एक मजबूत चरण में पहुंचने की आशंका है। संगठन का कहना है कि यह बदलाव वैश्विक मौसम पर व्यापक असर डाल सकता है।
विज्ञापन


क्या है अल नीनो और ENSO?
अल नीनो, 'एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन (ENSO)' के तीन प्रमुख चरणों में से एक है। यह एक प्राकृतिक जलवायु प्रणाली है, जिसमें मध्य और पूर्वी ट्रॉपिकल पैसिफिक महासागर के समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि होती है। इसके साथ ही वायुमंडलीय परिसंचरण में भी बदलाव आता है, जिससे दुनिया भर के मौसम के पैटर्न प्रभावित होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ला नीना से कैसे अलग है अल नीनो?
जहां अल नीनो वैश्विक तापमान बढ़ाने वाला माना जाता है, वहीं इसका विपरीत चरण ला नीना आमतौर पर ठंडक लाता है। ENSO का एक तीसरा चरण न्यूट्रल (तटस्थ) भी होता है, जिसमें न तो अल नीनो और न ही ला नीना का प्रभाव प्रमुख रहता है।

WMO प्रमुख ने क्या कहा?
WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा, 'अल नीनो की स्थिति पहले ही विकसित हो चुकी है और हमारे पूर्वानुमानों के अनुसार इसके तेजी से एक मजबूत घटना में बदलने की संभावना है। इससे दुनिया के कई क्षेत्रों में सूखे और अत्यधिक बारिश की आशंका बढ़ेगी। इसके अलावा जमीन पर हीटवेव और समुद्र में मरीन हीटवेव जैसी चरम स्थितियां भी देखने को मिल सकती हैं।'

भारत में IMD पहले ही दे चुका है संकेत
12 जून को भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अल नीनो की स्थिति शुरू होने की पुष्टि करते हुए कहा था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इसके और अधिक मजबूत होने की संभावना है। आमतौर पर अल नीनो के प्रभाव से भारत में मानसूनी बारिश कम हो जाती है। यही वजह रही कि जून महीने में देशभर में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक असर मध्य भारत पर पड़ा, जहां वर्षा में 50.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

जुलाई के लिए क्या है अनुमान अनुमान?
30 जून को जारी अपने पूर्वानुमान में IMD ने कहा कि जुलाई के दौरान पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई में देशभर में दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 94 प्रतिशत वर्षा होने की सबसे अधिक संभावना है। वर्ष 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने का LPA लगभग 280.4 मिलीमीटर है।


ये भी पढ़ें:  कैसे चलते ई-रिक्शा को रोक रहे लोग, कहां हुई चूक, क्या आपकी ईवी बाइक और कार के लिए भी खतरा है ये एप?

क्या होता है LPA?
LPA यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज (Long Period Average) किसी क्षेत्र में 30 से 50 वर्षों की अवधि के दौरान किसी महीने या पूरे मौसम में हुई औसत वर्षा को कहा जाता है। इसी आधार पर यह तय किया जाता है कि मौजूदा वर्षा सामान्य, कम या अधिक है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed