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Explainer: कैसे चलते ई-रिक्शा को रोक रहे लोग, कहां हुई चूक, क्या आपकी EV बाइक और कार के लिए भी खतरा हैं ये एप?

Fri, 03 Jul 2026 05:08 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Fri, 03 Jul 2026 05:08 PM IST
सार

एक मोबाइल एप ने इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा में छिपी बड़ी खामी उजागर कर दी है। सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन असली चुनौती कमजोर सुरक्षा वाले सिस्टम को सुरक्षित बनाना है। अब सवाल यह है कि क्या हमारे स्मार्ट वाहन साइबर खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं? आइए विस्तार से जानते हैं। 

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How Is This App Stopping Moving E-Rickshaws? Is Your EV Bike or Car at Risk?
इलेक्ट्रिक वाहन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इन दिनों कुछ लोग एक चीनी मोबाइल एप की मदद से बीच सड़क पर ई-रिक्शा बंद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BAT-BMS) नाम के एप का इस्तेमाल करके चलते हुए बैटरी रिक्शा को रोकते नजर आ रहे हैं। इस ट्रेंड ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मामला इतना बढ़ गया कि सरकार ने इस तरह के तीन एप तत्काल प्ले स्टोर से हटाने का आदेश दे दिया। 

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आइए जानते हैं कि क्या है आखिर क्या है यह एप? क्या यह हर ईलेक्ट्रिक गाड़ी पर काम करता है? इससे कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है? सरकार ने क्या कार्रवाई की है? आगे क्या सावधानी बरतने की जरूरत है? विशेषज्ञों की क्या राय है? 

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क्या है BAT-BMS एप?

  • BAT-BMS बैटरी मैनेजमेंट के लिए बनाया गया एक एप है। 
  • इसे चीन के शेन्जेन ग्रीनर्जी टेक्नोलॉजी ने विकसित किया है।
  • यह एप 10 से 15 मीटर की दूरी के भीतर मौजूद ब्लूटूथ-सक्षम (Bluetooth-enabled) लिथियम बैटरियों से वायरलेस तरीके से कनेक्ट हो सकता है। 
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  • कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, इसके जरिए बैटरी का वोल्टेज, तापमान और करंट जैसी जानकारियों की रियल-टाइम निगरानी की जा सकती है।
  • यह एप बैटरी के प्रदर्शन को नियंत्रित और बेहतर बनाने में भी मदद करता है, जिससे उपयोगकर्ता बैटरी को दूर से मैनेज कर सकते हैं।

किस एप से ई-रिक्शा कैसे बंद किए जा रहे हैं?

देश में इस्तेमाल होने वाले कुछ कम कीमत वाले ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक स्कूटरों में ऐसे बीएमएस लगे हैं, जिनमें सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। कई मामलों में ब्लूटूथ की डिफॉल्ट सेटिंग खुली रहती है।

ऐसी स्थिति में, वाहन के पास मौजूद कोई भी व्यक्ति बिना पासवर्ड या किसी ऑथेंटिकेशन के स्मार्टफोन के जरिए सिस्टम तक पहुंच सकता है। इसके बाद वह वाहन का पावर आउटपुट तुरंत बंद कर सकता है, जिससे ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक स्कूटर अचानक रुक जाता है।

बीते कुछ दिनों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कुछ लोग BAT-BMS एप को ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक स्कूटर से कनेक्ट करते हैं। इसके बाद वे  डिस्चार्ज स्विच बंद कर देते हैं, जिससे वाहन आगे नहीं बढ़ पाता। सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में देखा जा सकता है कि वाहन अचानक रुकने से चालक घबरा जाता है और सड़क पर खतरनाक स्थिति पैदा हो जाती है।
 

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सरकार की कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला

सरकार ने क्या कार्रवाई की है?

सरकार ने BAT-BMS, Lossigy और Epoch-li-ion एप्स को प्ले स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही ऐसे अन्य एप्स की भी पहचान की जा रही है, जिनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा है कि एप स्टोर संचालकों को ऐसे एप्स की जांच में अधिक सतर्क रहना होगा। सरकार एप स्टोर कंपनियों के साथ मिलकर ऐसा तंत्र तैयार करेगी, जिससे भविष्य में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाले एप उपलब्ध न हो सकें। सरकार का कहना है कि जिन अन्य एप्स का भी इसी तरह गलत इस्तेमाल हो रहा है, उन्हें भी ब्लॉक किया जाएगा। सरकार ने अभी आदेश दिया है। इस पर काम जारी है। हालांकि, प्लेस्टोर से एप हटने में कुछ समय लग सकता है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट? - फोटो : अमर उजाला

क्या है विशेषज्ञों की राय?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ संदीप पांडे ने बताया कि बैटरी का स्टेटस चेक करने के लिए जो सर्किट बनाई जाती है उसकी किट में ऐसे मैट्रिक्स हैं, जहां यह मुमकिम है कि हम उसे हैक कर सकते हैं। गलती यहां हुई है कि इसके ऑथेंटिकेशन को ध्यान में नहीं रखा गया और ना ही कोई पार्सवर्ड या आईडी दी गई। यानी सुरक्षा की एक परत को निर्माताओं ने नजरअंदाज कर दिया। यह कॉस्ट कटिंग के लिए अक्सर किया जाता है। 

साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने बताया कि लिथियम की जो बैटरी लगाई गई है, उसमें ब्लूटूथ इनेबल्ड ऑन है लेकिन ऑथेंटिकेशन को नजरअंदाज कर दिया गया है। अच्छी कंपनियों के बैटरी में यह ऑथेंटिकेशन मौजूद होते हैं।  टंडन ने कहा कि अब रिक्शेवालों के पास दो ही तरीके हैं, एक तो मकैनिक के पास जाकर अपनी बैटरी का ब्लूटूथ ऑफ करवा लें। दूसरे अपने फोन में इस एप को डाउनलोड करके इसे अपने फोन से कनेक्ट कर लें ताकि कोई और कनेक्ट ना कर पाए। 
 

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सुरक्षा कैसे होगी मजबूत? - फोटो : अमर उजाला

क्या इन एप्स से आपकी गाड़ियों को भी खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल कई इलेक्ट्रिक वाहन और उनकी बैटरियां स्मार्ट फीचर्स के साथ आती हैं। इनमें ब्लूटूथ, मोबाइल एप कनेक्टिविटी और बीएमएसी जैसी तकनीक का इस्तेमाल होता है। इनकी मदद से बैटरी की स्थिति, वोल्टेज, तापमान, चार्जिंग और अन्य तकनीकी जानकारी की निगरानी की जा सकती है। हालांकि, अगर ऐसे सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न हों, तो केवल वाहन को प्रभावित करने का ही नहीं, बल्कि डेटा सुरक्षा और निजता (प्राइवेसी) से जुड़े जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर सुरक्षा वाले सिस्टम में अनधिकृत व्यक्ति बैटरी से जुड़ी जानकारी तक पहुंचने या सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए कनेक्टेड वाहनों में साइबर सुरक्षा के साथ-साथ डेटा सुरक्षा भी अब एक बड़ी चिंता बनती जा रही है।

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वाहन पंजीकरण के आंकड़े - फोटो : Amar Ujala

पिछले तीन वर्षों में कितने इलेक्ट्रिक वाहनों का हुआ पंजीकरण?

2023: पूरे देश में कुल 9,79,052 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहनों का पंजीकरण हुआ।
2024: कुल 13,55,769 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहनों का पंजीकरण हुआ।
2025: कुल 16,23,181 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहनों का पंजीकरण हुआ।
2026 (29 मार्च तक): कुल 3,76,517 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहनों का पंजीकरण हुआ।
2023 से 2025 के बीच संयुक्त पंजीकरण में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई और 2025 में यह सबसे अधिक रहा।

वहीं दिल्ली में ई-रिक्शों की संख्या काफी बड़ी है। वाहन परिवहण पर उपलब्ध सरकारी पंजीकरण आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में 2,00,945 यात्री ई-रिक्शा और 45,444 ई-रिक्शा विद कार्ट पंजीकृत हैं। यानी दिल्ली में कुल 2,46,389 ई-रिक्शे और ई-कार्ट पंजीकृत हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के साथ उनकी बैटरी और बीएमएस की साइबर सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा बनती जा रही है।

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वाहन पंजीकरण के आंकड़े - फोटो : Amar Ujala

सरकार ने चीनी एप पर कब-कब कार्रवाई की?

29 जून 2020: भारत सरकार ने  पहली बार 59 चीनी मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध लगाया था। इनमें TikTok, UC Browser, ShareIt, CamScanner, WeChat, Helo, Likee, Xender और Club Factory जैसे लोकप्रिय एप शामिल थे। सरकार ने कहा था कि ये एप्स भारत की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इन पर कार्रवाई आईटी एक्ट, 2000 की धारा 69A के तहत की गई थी।

27 जुलाई 2020: केंद्र सरकार ने 47 और चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगाया। ये ज्यादातर उन 59 प्रतिबंधित एप्स के क्लोन और वेरिएंट थे, जिन्हें नए नाम या नए संस्करण के साथ उपलब्ध कराया जा रहा था।

2 सितंबर 2020: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए 118 चीनी मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन एप्स में PUBG Mobile, PUBG Mobile Lite, Baidu, WeChat Work, Tencent Weiyun, Alipay समेत कई लोकप्रिय ऐप शामिल थे।

14 फरवरी 2022: केंद्र सरकार ने 54 और चीनी मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध लगाया। इनमें Garena Free Fire, Beauty Camera, Viva Video Editor, AppLock समेत कई एप शामिल थे।

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