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एंटी-ड्रोन सिस्टम से मिसाइलों तक: 52 हजार करोड़ के रक्षा सौदे को मंजूरी; DAC बैठक में किन फैसलों पर लगी मुहर?
Fri, 03 Jul 2026 05:01 PM IST
प्रशांत तिवारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Fri, 03 Jul 2026 05:01 PM IST
सार
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने करीब 52,000 करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी देकर सेना, नौसेना और वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इन प्रस्तावों में एंटी-ड्रोन सिस्टम, मिसाइलें, कामिकेज़ ड्रोन, नौसैनिक निगरानी प्रणाली और हाई-एल्टीट्यूड निगरानी प्लेटफॉर्म जैसे आधुनिक रक्षा उपकरण शामिल हैं।
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DAC की बैठक में इन फैसलों पर लगी मुहर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता शुक्रवार को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में रक्षा बलों के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले विभिन्न अधिग्रहण प्रस्तावों को 'आवश्यकता की स्वीकृति' (Acceptance of Necessity-AoN) प्रदान की। यह सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी है, जिसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। परिषद ने भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से कई अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और रक्षा उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी।
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भारतीय सेना के किन खरीदों की मिली मंजूरी?
भारतीय सेना के लिए एंटी-अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम 'आकाश तरंग', मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM), मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM), वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS), टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम तथा जेट-आधारित कामिकेज़ ड्रोन सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है। 'आकाश तरंग' प्रणाली सेना की अग्रिम टुकड़ियों को दुश्मन के ड्रोन हमलों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करेगी। वहीं, MPATGM दुश्मन के बख्तरबंद और मशीनीकृत वाहनों का मुकाबला करने में पैदल सेना की क्षमता को और मजबूत बनाएगी। MRSAM प्रणाली विभिन्न प्रकार के लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों के खिलाफ मध्यम दूरी की प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराएगी।
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कैसे बेहतर होगी टैंकों की सुरक्षा?
मल्टी-स्पेक्ट्रल सेंसर से लैस V-SHORADS प्रणाली भारतीय सेना की त्वरित जवाबी कार्रवाई की क्षमता और प्रभावशीलता को बढ़ाएगी। एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम टैंकों की सुरक्षा को मजबूत करेगा और युद्ध के दौरान उनके सुरक्षित रहने की क्षमता में इजाफा करेगा। वहीं, जेट-आधारित कामिकेज़ ड्रोन बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता, अधिक मारक क्षमता, बेहतर सुरक्षा और लागत प्रभावशीलता के साथ सेना की ताकत बढ़ाएंगे।
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नौसेना के लिए खरीद में क्या?
भारतीय नौसेना के लिए मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM), नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) की खरीद तथा इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड-बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) की स्थापना को मंजूरी दी गई है। MIGM दुश्मन के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों की आवाजाही को सीमित करने में मदद करेगा। उन्नत सेंसर से लैस NSUAS समुद्री क्षेत्र में निगरानी और स्थिति संबंधी जानकारी (Situational Awareness) को बेहतर बनाएगा। वहीं, LBTF भारतीय नौसेना के जहाजों में इस्तेमाल होने वाले मोटरों और प्रोपल्शन सिस्टम के परीक्षण के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत सुविधा उपलब्ध कराएगा।
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वायुसेना के लिए बैठक कैसे रहा खास?
इस बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) समेत अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। FW-HAPS लंबी अवधि तक लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराएगा, जिससे वायुसेना की निगरानी और रणनीतिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।