सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Fake suicide notes created in Latur to expose caste based reservation and gain financial benefits say police

Maharashtra: आरक्षण के नाम पर गढ़ी जा रही हैं झूठी कहानियां? लातूर पुलिस ने किया फर्जी सुसाइड नोट का खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 08 Oct 2025 01:47 AM IST
विज्ञापन
सार

क्या आरक्षण और मुआवजे के लिए गढ़े जा रहे हैं फर्जी सुसाइड नोट? लातूर पुलिस ने हाल ही में ऐसे कई मामलों का खुलासा किया है, जिसमें मृतकों के नाम पर लिखे गए सुसाइड नोट असल में उनके परिजनों या परिचितों द्वारा बनाए गए थे। पुलिस जांच में हैंडराइटिंग, सीसीटीवी और फोरेंसिक जांच से यह धोखाधड़ी सामने आई है।

Fake suicide notes created in Latur to expose caste based reservation and gain financial benefits say police
पुलिस प्रशासन - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार

महाराष्ट्र के लातूर जिले में आरक्षण की मांग को लेकर सामने आए कुछ सुसाइड नोट के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, हाल के हफ्तों में आरक्षण, सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद की मांग को लेकर सामने आए कुछ कथित सुसाइड नोट फर्जी पाए गए हैं। ये नोट असल में मृतकों ने नहीं, बल्कि उनके रिश्तेदारों या परिचितों ने लिखे थे।

Trending Videos

मामले में लातूर के पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे ने बताया कि कई मामलों में जब पुलिस ने मृतकों की हैंडराइटिंग का मिलान किया, तो पाया कि सुसाइड नोट उनकी लिखावट से मेल नहीं खाते। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज, पूछताछ और फोरेंसिक जांच में सामने आया कि ये नोट जानबूझकर बनवाए गए थे ताकि आरक्षण के मुद्दे को उभारकर सरकार पर दबाव बनाया जा सके और मुआवजा हासिल किया जा सके।

विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- PM Modi: पीएम मोदी आज करेंगे नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उदघाटन; कई अन्य परियोजनाओं की देंगे सौगात

कई मामलों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया
मामले में खुलासा करते हुए पुलिस ने कई मामलों का उदाहरण दिया। इसमें एक मामला 26 अगस्त का है। जब अहमदपुर तालुका के बालिराम श्रीपति मुले ने जहर खा लिया था। मौके से मिले नोट में मराठा आरक्षण के समर्थन की बात लिखी थी। हालांकि जांच में सामने आया कि यह नोट उनके चचेरे भाई संभाजी उर्फ धनाजी मुले ने लिखा था।

इसी क्रम में दूसरा मामला 13 सितंबर का है। जब निलंगा तालुका के शिवाजी वल्मिक मेले की करंट लगने से मौत हुई थी। घर से मिले नोट में महादेव कोली समुदाय को जाति प्रमाण पत्र न मिलने की शिकायत थी। वहीं तीसरा मामला 14 सितंबर का है। जब चाकूर तालुका के अनिल बालिराम राठौड़ की भी करंट लगने से मौत हुई और एक और नोट सामने आया जिसमें बंजारा समुदाय को आरक्षण की मांग की गई।

ये भी पढ़ें:- Maharashtra: 'हमारे लिए मराठी भाषा वोटों का नहीं, सम्मान का विषय', एकनाथ शिंदे ने शास्त्रीय दर्जे पर जताई खुशी

पुलिस को गुमराह करने का आरोप
मामले में पुलिस ने बताया कि ये सभी पत्र मृतकों द्वारा नहीं, बल्कि उनके परिवार या जान-पहचान वालों द्वारा लिखे गए थे। इन लोगों ने झूठे दस्तावेज बनाकर न केवल प्रशासन बल्कि समाज को भी गुमराह किया। इन मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच की जिम्मेदारी पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। साथ ही मामले में पुलिस ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर कोई झूठे सबूतों के जरिए सरकार या समाज को गुमराह करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed