Maharashtra: आरक्षण के नाम पर गढ़ी जा रही हैं झूठी कहानियां? लातूर पुलिस ने किया फर्जी सुसाइड नोट का खुलासा
क्या आरक्षण और मुआवजे के लिए गढ़े जा रहे हैं फर्जी सुसाइड नोट? लातूर पुलिस ने हाल ही में ऐसे कई मामलों का खुलासा किया है, जिसमें मृतकों के नाम पर लिखे गए सुसाइड नोट असल में उनके परिजनों या परिचितों द्वारा बनाए गए थे। पुलिस जांच में हैंडराइटिंग, सीसीटीवी और फोरेंसिक जांच से यह धोखाधड़ी सामने आई है।
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महाराष्ट्र के लातूर जिले में आरक्षण की मांग को लेकर सामने आए कुछ सुसाइड नोट के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, हाल के हफ्तों में आरक्षण, सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद की मांग को लेकर सामने आए कुछ कथित सुसाइड नोट फर्जी पाए गए हैं। ये नोट असल में मृतकों ने नहीं, बल्कि उनके रिश्तेदारों या परिचितों ने लिखे थे।
मामले में लातूर के पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे ने बताया कि कई मामलों में जब पुलिस ने मृतकों की हैंडराइटिंग का मिलान किया, तो पाया कि सुसाइड नोट उनकी लिखावट से मेल नहीं खाते। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज, पूछताछ और फोरेंसिक जांच में सामने आया कि ये नोट जानबूझकर बनवाए गए थे ताकि आरक्षण के मुद्दे को उभारकर सरकार पर दबाव बनाया जा सके और मुआवजा हासिल किया जा सके।
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कई मामलों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया
मामले में खुलासा करते हुए पुलिस ने कई मामलों का उदाहरण दिया। इसमें एक मामला 26 अगस्त का है। जब अहमदपुर तालुका के बालिराम श्रीपति मुले ने जहर खा लिया था। मौके से मिले नोट में मराठा आरक्षण के समर्थन की बात लिखी थी। हालांकि जांच में सामने आया कि यह नोट उनके चचेरे भाई संभाजी उर्फ धनाजी मुले ने लिखा था।
इसी क्रम में दूसरा मामला 13 सितंबर का है। जब निलंगा तालुका के शिवाजी वल्मिक मेले की करंट लगने से मौत हुई थी। घर से मिले नोट में महादेव कोली समुदाय को जाति प्रमाण पत्र न मिलने की शिकायत थी। वहीं तीसरा मामला 14 सितंबर का है। जब चाकूर तालुका के अनिल बालिराम राठौड़ की भी करंट लगने से मौत हुई और एक और नोट सामने आया जिसमें बंजारा समुदाय को आरक्षण की मांग की गई।
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पुलिस को गुमराह करने का आरोप
मामले में पुलिस ने बताया कि ये सभी पत्र मृतकों द्वारा नहीं, बल्कि उनके परिवार या जान-पहचान वालों द्वारा लिखे गए थे। इन लोगों ने झूठे दस्तावेज बनाकर न केवल प्रशासन बल्कि समाज को भी गुमराह किया। इन मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच की जिम्मेदारी पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। साथ ही मामले में पुलिस ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर कोई झूठे सबूतों के जरिए सरकार या समाज को गुमराह करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।