फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   FCRA Bill likely referred to JPC government signals move amidst opposition from Congress and TMC

संसद में बिल पर रार : JPC में भेजा जा सकता है FCRA बिल, कांग्रेस-TMC विरोध के बीच सरकार ने दे दिए बड़े संकेत

Tue, 11 Aug 2026 06:47 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 11 Aug 2026 06:47 PM IST
सार

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजने पर विचार कर रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल इस विधेयक को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

विज्ञापन
FCRA Bill likely referred to JPC government signals move amidst opposition from Congress and TMC
गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मंगलवार को सूत्रों ने बताया कि सरकार FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को आगे की जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने पर विचार कर रही है। एक तरफ जहां कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ बीजेडी समेत कुछ दल इसे संयुक्त समिति को भेजे जाने के पक्ष में हैं। विधेयक में FCRA लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में संबंधित संगठन की संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान के लिए एक अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है। विपक्ष का आरोप है कि इसके कुछ प्रावधान अल्पसंख्यक संस्थानों और ईसाई गैर सरकारी संगठनों की वैध विदेशी फंडिंग को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि सरकार का कहना है कि कानून किसी धर्म विशेष को लक्षित नहीं करता।

विज्ञापन


बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में FCRA बिल का मुद्दा कैसे उठा?
राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक के दौरान कांग्रेस और टीएमसी जैसे दलों ने FCRA बिल का मुद्दा उठाया। हालांकि, यह बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था। इन दलों ने सरकार से पूछा कि FCRA बिल पर सदन में चर्चा कब होगी। इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि सही समय आने पर इस बारे में फैसला लिया जाएगा।
विज्ञापन


किन दलों ने बिल वापस लेने की मांग की?
कांग्रेस और TMC ने विधेयक को वापस लेने की मांग की। वहीं, BJD जैसे कुछ अन्य दलों का मानना है कि विधेयक को और गहन जांच-पड़ताल के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, DMK भी चाहती है कि इस विधेयक को वापस लिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


FCRA बिल लोकसभा में कब पेश किया गया था?
यह विधेयक इसी साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें देश में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और विदेशी फंडिंग पर सरकार की निगरानी और नियंत्रण को और मजबूत करने का प्रस्ताव किया गया है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि सरकार इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में बुधवार को लोकसभा में प्रस्ताव लाया जा सकता है।

FCRA बिल में किस तरह की नई व्यवस्था का प्रस्ताव है?
इस विधेयक का उद्देश्य एक ऐसी अथॉरिटी का गठन करना है, जो किसी संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान की प्रक्रिया संभाल सके। FCRA बिल का कड़ा विरोध कर रहे विपक्षी दलों का आरोप है कि इसके प्रावधान अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं। विपक्ष का कहना है कि विधेयक के कुछ प्रावधान ईसाई NGOs और अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण एवं शैक्षणिक संस्थानों के लिए मिलने वाली वैध विदेशी फंडिंग पर रोक लगा सकते हैं।

सरकार ने धार्मिक भेदभाव के आरोपों पर क्या कहा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। सरकार के मुताबिक, विधेयक का उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी योगदान को विनियमित करना और उससे जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करना है।

राज्यसभा की BAC बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन सी. पी. राधाकृष्णन ने की। बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, सदन के नेता जे. पी. नड्डा और विपक्ष के नेता जयराम रमेश (कांग्रेस) शामिल हुए। इनके अलावा तिरुचि शिवा (DMK) और सस्मित पात्रा (BJD) ने भी बैठक में हिस्सा लिया।


ये भी पढ़ें: घाटी में आतंकी धमकी के बाद बड़ा फैसला: 20 अगस्त तक कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की छुट्टी, स्टेडियम ड्यूटी रद्द

BAC ने दूसरे विधेयकों के लिए कितना समय तय किया?
बैठक के दौरान BAC ने ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के लिए दो घंटे और ‘ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026’ के लिए भी दो घंटे का समय तय किया। ‘द नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (संशोधन) बिल, 2026’ के लिए तीन घंटे का समय तय किया गया, जबकि ‘द केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026’ के लिए 1.5 घंटे निर्धारित किए गए। बैठक के बाद राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सदन में बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के फैसलों की घोषणा की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed