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Railway: अब बांग्लादेश की पटरी पर दौड़ेंगे भारत में बने LHB कोच, पहली बार डिब्बों में हुए ये बदलाव
Tue, 11 Aug 2026 06:37 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 11 Aug 2026 06:37 PM IST
सार
आरसीएफ की यह खेप भारतीय रेलवे तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने में मदद कर सकती है। इससे दूसरे देशों से भी कोच और रेलवे तकनीक के नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी। बांग्लादेश के साथ रेलवे सहयोग भी इससे और मजबूत होने की उम्मीद है।
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भारत में तैयार बांग्लादेश रेलवे के कोच।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत की रेलवे तकनीक और कोच निर्माण क्षमता का एक और उदाहरण सामने आया है। पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री ने बांग्लादेश रेलवे के लिए 20 एलएचबी कोच वाली पहली रैक तैयार की है। इसमें कई नए डिजाइन और तकनीकी बदलाव किए गए हैं।
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कोच में किए गए अहम बदलाव
इस रेक में कुल 20 एलएचबी ब्रॉड गेज पैसेंजर कोच हैं। इनमें 3 एसी स्लीपर, 3 एसी चेयर कार, 12 नॉन-एसी चेयर कार और दो पावर कोच शामिल हैं। बांग्लादेश रेलवे की जरूरतों को देखते हुए कोच में कई बदलाव किए गए हैं। आरसीएफ के मुताबिक, इनमें कुछ डिजाइन फीचर पहली बार एलएचबी कोच में शामिल किए गए हैं।
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20 कोच वाली पहली रेक
दरअसल,आरसीएफ कपूरथला और बांग्लादेश रेलवे के बीच सहयोग पुराना है। इसकी शुरुआत 2015-16 में हुई थी। उस समय आरसीएफ ने बांग्लादेश रेलवे को 120 एलएचबी ब्रॉड गेज यात्री कोच की आपूर्ति की थी। इसके बाद बांग्लादेश रेलवे ने फिर आरएसीएफ पर भरोसा जताया। वर्ष 2024 में रेलवे के पीएसयू राइट्स के जरिए आरसीएफ को 200 ब्रॉड गेज पैसेंजर कोच बनाने का ऑर्डर मिला। ये कोच सात अलग-अलग वेरिएंट में तैयार किए जाने हैं।
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20 कोच वाली पहली रेक का रोलआउट भारतीय रेलवे और आरसीएफ के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है। यह सिर्फ विदेशी ऑर्डर पूरा करने तक सीमित नहीं है। इससे भारत की डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता भी सामने आती है।
आरसीएफ की यह खेप भारतीय रेलवे तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने में मदद कर सकती है। इससे दूसरे देशों से भी कोच और रेलवे तकनीक के नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी। बांग्लादेश के साथ रेलवे सहयोग भी इससे और मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही, यह उपलब्धि भारत के रेलवे निर्यात को बढ़ाने की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।