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छात्र आंदोलन पर सुनवाई: बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- AK-47 से हुई फायरिंग, दिल्ली पुलिस क्या बोली?

Tue, 18 Aug 2026 12:13 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Tue, 18 Aug 2026 12:13 PM IST
सार

छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित बर्बरता और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों पर बिहार और दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपने-अपने जवाब दाखिल किए हैं। बिहार सरकार ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से हवा में चार गोलियां चलाने की बात स्वीकार की है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है।

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'Firing with AK-47': Bihar govt admits in Supreme Court regarding student protests; what did Delhi Police say?
छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बिहार सरकार ने छात्र प्रदर्शन के दौरान एके-47 से फायरिंग की बात सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार की है। लेकिन इसके साथ ही सरकार ने दावा किया है कि इस घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ है। राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता के आरोपों वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में एक जवाबी हलफनामा दायर किया है। इसमें प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाने के लिए जरूरत से ज्यादा बल के इस्तेमाल से साफ इनकार किया गया है।
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सिवान में एके-47 और पिस्टल से फायरिंग
बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि सिवान के जेपी चौक के पास एक पुलिसकर्मी भीड़ में फंस गया था। अपनी सुरक्षा के लिए उसने एके-47 से हवा में चार राउंड फायर किए। सरकार के मुताबिक, इस फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ। हालांकि, पुलिसकर्मी को कथित गलत व्यवहार के लिए निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरकार ने यह भी बताया कि हाथी चौक के पास भीड़ को हटाने के लिए एक एएसआई ने पिस्टल से दो गोलियां चलाईं। इससे तीन प्रदर्शनकारियों को हथियार से मामूली चोटें आईं। हलफनामे में साफ किया गया कि ये तीनों एके-47 की गोली से घायल नहीं हुए थे। एके-47 के इस्तेमाल को लेकर बैलिस्टिक जांच भी चल रही है।
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69 एफआईआर औ 500 गिरफ्तारियां
बिहार सरकार ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कई जगह हिंसा हुई और पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों पर हमले किए गए। छपरा में दो बीडीओ, तीन इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए। एक बीडीओ की आंख चली गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। राज्य के मुताबिक कुल 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए। हलफनामे के अनुसार, 22 से 25 जुलाई के बीच बिहार में 69 एफआईआर दर्ज हुईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर छोड़ा गया। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 75 नाबालिगों को भी रिहा किया।

दिल्ली पुलिस ने भी दिया हलफनामा
दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में कहा कि संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड की कई परतें तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की और प्रदर्शन हिंसक हो गया। पुलिस के मुताबिक, करीब 5000 जवान तीन किलोमीटर के इलाके में 30 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ को संभाल रहे थे। पुलिस ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब 200 प्रदर्शनकारी या आम लोग घायल हुए। पुलिस का कहना है कि ऐसी स्थिति में अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप सही नहीं है, क्योंकि भीड़ में आपराधिक रिकॉर्ड वाले और असामाजिक तत्व भी शामिल थे।


नाखून वाली लाठी पर भी सफाई
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान नाखून लगी लाठी के इस्तेमाल के आरोप को भी खारिज किया। उसका कहना है कि वीडियो में ऐसी एक घटना दिखाई देती है, लेकिन वह लाठी पुलिसकर्मी के हाथ में नहीं, बल्कि एक प्रदर्शनकारी के पास थी। पुलिस ने कहा कि सामान्य लाठियों का इस्तेमाल भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अनुमत तरीका है। पुलिस ने सादे कपड़ों में तैनात अधिकारियों का भी बचाव किया। उसके मुताबिक, स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के ‘स्पॉटर्स’ भीड़ में शामिल होकर स्थिति पर नजर रख रहे थे। यह तरीका बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भी अपनाया जाता है।

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फेशियल रिकग्निशन पर पुलिस ने क्या कहा?
प्रदर्शन स्थल पर फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह केवल गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार, किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल चेहरे की पहचान के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाती। पहले मौके पर उसकी मौजूदगी की पुष्टि की जाती है। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन से जुड़े 2,873 लोगों पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में आपराधिक आरोप हैं। इन मामलों की जांच विशेष जांच दल करेगा। दोनों पुलिस बलों ने कहा है कि उनके इस्तेमाल किए गए बल की वैधता और परिस्थितियों की जांच अदालत द्वारा गठित समिति के सामने की जा सकती है और वे जांच में सहयोग करेंगे।
 
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