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Elections 2026: पांच राज्यों के चुनाव नतीजे तय करेंगे सियासी दिशा, बंगाल-केरल में गठबंधन की अग्निपरीक्षा

हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 01 Jan 2026 07:01 AM IST
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सार

नए साल में केरल, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और पुदुचेरी के चुनाव नतीजे देश की राजनीति की दिशा तय करेंगे। बंगाल और केरल में विपक्षी इंडिया गठबंधन के घटक दल आमने-सामने होंगे।

Five State Assembly Election Results to Shape India’s Political Direction in 2026
चुनाव 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नया साल सियासी दलों खासकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के लिए चुनौतियों का साल होगा। नए साल के पूर्वार्ध में केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी और चार राज्यों केरल, तमिलनाडु, असम व पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम देश की सियासत की भावी दशा और दिशा तय करेंगे।

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केरल में वामदल, तमिलनाडु में डीएमके, पश्चिम बंगाल में टीएमसी, असम व पुदुचेरी में भाजपा की अगुवाई वाले राजग के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती होगी। भाजपा के लिए विशेष रूप से नया साल चुनौतियों और अवसरों से भरपूर होगा। पार्टी के सामने दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु में अपनी ताकत साबित करने का अवसर के साथ पश्चिम बंगाल में दशकों से कमल खिलाने की इच्छा को पूरा करने की चुनौती होगी। इसके अलावा असम में जीत की हैट्रिक लगाने और पुदुचेरी में राजग की अगुवाई वाली सरकार को बनाए रखने की भी चुनौती होगी।
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विपक्षी गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती : वर्ष 2026 में विपक्षी गठबंधन के लिए चुनौती बड़ी है। दरअसल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में असम, पश्चिम बंगाल और केरल में गठबंधन के घटक दल आमने-सामने होंगे। केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ और वाम दलों की अगुवाई वाले एलडीएफ के बीच ही मुख्य मुकाबला होगा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी टीएमसी का वाम दलों और कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के आसार नहीं दिख रहे। पुदुचेरी और तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधन की पुरानी एकता बरकरार रहेगी।

पश्चिम बंगाल पर सबकी नजर
चुनावी राज्यों में मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल पर सबकी नजरें रहेंगी। सत्तारूढ़ टीएमसी के सामने जीत का चौका लगाने की चुनौती होगी, तो मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा के लिए सत्ता हासिल करने की चुनौती रहेगी। बीते चुनाव में भाजपा सत्ता हासिल करने का सपना पूरा नहीं कर पाई थी। हालांकि इस बार टीएमसी से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद की नींव रखने, अलग पार्टी बना कर एआईएमआईएम से गठबंधन की संभावना के कारण टीएमसी को अपने मुस्लिम वोट बैंक में बिखराव का भय सता रहा है।

ढह सकता है वाम दलों का अंतिम किला
केरल में बीते चुनाव में अपनी सत्ता बरकरार रख वाम दलों के अगुवाई वाले गठबंधन एलडीएफ ने इतिहास रचा था। हालांकि इस बार कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ से एलडीएफ को कड़ी टक्कर के आसार हैं। पहले पश्चिम बंगाल और इसके बाद त्रिपुरा की सत्ता गंवा कर वाम दल गहरे संकट में है। केरल वाम दलों का अंतिम किला है।

क्या साबित करेंगे नतीजे
नतीजे केंद्र की राजनीति में राजग और विपक्षी गठबंधन की धमक साबित करेंगे। असम और पुदुचेरी में राजग की सत्ता में वापसी के साथ अगर भाजपा ने बंगाल में जीते, तो केंद्र में उसकी स्थिति और मजबूत होगी। इसी प्रकार केरल में जीत कांग्रेस के लिए सियासी टॉनिक का काम करेगी। उसके पास तब तेलंगाना, कर्नाटक के बाद एक और महत्वपूर्ण राज्य होगा। टीएमसी अगर बंगाल में जीत का चौका लगाती है तो ममता बनर्जी निर्विवाद चेहरा बन कर उभरेंगे।

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