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Explainer: अरुणाचल से जम्मू-कश्मीर तक तबाही; पहाड़ों में बार-बार बादल क्यों फट रहे हैं? जानें कारण और खतरे

Wed, 01 Jul 2026 04:47 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Wed, 01 Jul 2026 04:47 PM IST
सार

अरुणाचल प्रदेश से जम्मू-कश्मीर तक लगातार हो रही भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने पहाड़ी राज्यों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। जलवायु परिवर्तन, हिमालय का भूगोल और अनियोजित विकास इन घटनाओं के खतरे और नुकसान को बढ़ा रहे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर पहाड़ों में बार-बार बादल क्यों फट रहे हैं और इस बढ़ते खतरे से कैसे बचा जा सकता है?

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From Arunachal to Jammu & Kashmir: Why Are Cloudbursts Becoming More Frequent in the Hills?
बादल फटना - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश के पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में कई इलाकों में सड़कें, पुल, फसलें और मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है। 

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ऐसे में सवाल उठता है कि बादल फटने की वैज्ञानिक परिभाषा क्या है? यह पहाड़ों में ही ज्यादा क्यों होता है? क्या इसका सटीक पूर्वानुमान संभव है? बादल फटने की घटना बड़ी त्रासदी में क्यों बदल जाती है? बादल फटने के बाद पहाड़ों में अचानक झीलें कैसे बन जाती हैं? क्या जलवायु परिवर्तन से बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं? भारत में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य कौन-से हैं? आइए जानते हैं। 

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बादल फटना क्या होता है?

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार बादल फटना एक ऐसी मौसम संबंधी घटना है, जिसमें बहुत कम समय में किसी छोटे इलाके में बेहद तेज बारिश होती है। कई बार इसके साथ ओले और गरज-चमक भी होती है। इतनी तेज बारिश से अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

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बादल फटने की घटनाएं बहुत कम होती हैं। यह आमतौर पर तब होती हैं, जब नमी से भरी हवा पहाड़ों से टकराकर तेजी से ऊपर उठती है और अचानक बहुत ज्यादा बारिश होने लगती है। कुछ मामलों में गर्म और ठंडी हवा के मिलने से भी ऐसा हो सकता है। अक्सर लोग पहाड़ों से बड़ी मात्रा में बहकर आने वाले पानी को भी बादल फटना समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग बातें हैं।

इस घटना का नाम कैसे पड़ा?

इस घटना का बादल फटना नाम इसलिए पड़ा क्योंकि पहले लोगों का मानना था कि बादल पानी से भरे गुब्बारे की तरह फट जाते हैं और सारा पानी एक साथ गिर जाता है। हालांकि, विज्ञान ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है, लेकिन यह शब्द आज भी प्रचलन में है।

कितनी बारिश होने पर उसे बादल फटना कहा जाता है?

आईएमडी के मुताबिक, अगर किसी छोटे इलाके में एक घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर या उससे ज्यादा बारिश हो जाए, तो उसे बादल फटना कहा जाता है। आमतौर पर यह बेहद तेज बारिश दो से तीन घंटे तक सीमित क्षेत्र में जारी रहती है, जिससे अचानक बाढ़ और भारी तबाही की स्थिति पैदा हो सकती है।

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पहाड़ों में बादल फटने की वजह - फोटो : Amar Ujala

बादल पहाड़ों में ही ज्यादा क्यों फटते हैं?

इसकी सबसे बड़ी वजह है हिमालय का भूगोल। मैदानी इलाकों में नमी वाली हवाएं काफी दूर तक फैल जाती हैं, लेकिन पहाड़ों में उन्हें अचानक ऊपर उठना पड़ता है। इससे बादलों में पानी तेजी से इकट्ठा होता है और बहुत छोटे इलाके में एक साथ बरस जाता है। इसी कारण उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और सिक्किम जैसे राज्यों में बादल फटने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। हालांकि यह केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं है, लेकिन सबसे अधिक संभावना वहीं रहती है।

क्या देश में बादल फटने जैसी घटनाओं की चेतावनी देने की व्यवस्था है?

देश में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चक्रवात, भारी बारिश और अन्य गंभीर मौसम घटनाओं के लिए आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया है। यह सिस्टम रडार, सैटेलाइट, मौसम केंद्रों, उच्च-रिजॉल्यूशन मौसम मॉडल और जीआईएस आधारित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम की मदद से मौसम की लगातार निगरानी करता है। रडार हर 10 मिनट और सैटेलाइट हर15 मिनट में नए आंकड़े उपलब्ध कराते हैं, जिनके आधार पर समय पर अलर्ट जारी किए जाते हैं।

आईएमडी मौसम संबंधी चेतावनियां अपनी वेबसाइट, मौसम, मेघदूत, दामिनी और रेन अलार्म जैसे मोबाइल एप, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लोगों तक पहुंचाता है। हालांकि, बादल फटना जैसी बेहद स्थानीय और अचानक होने वाली घटनाओं का सटीक समय और स्थान पहले से बताना अभी संभव नहीं है। इसलिए विभाग केवल अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी कर सकता है, लेकिन यह नहीं बता सकता कि किस जगह बादल फटेगा।

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नुकसान कितना क्यों? - फोटो : Amar Ujala

बादल फटने के बाद तबाही इतनी बड़ी क्यों हो जाती है?

बादल फटने के दौरान केवल तेज बारिश ही नहीं होती, बल्कि पहाड़ों से मिट्टी, बड़े पत्थर, पेड़, चट्टानें और गाद (सिल्ट) भी तेज बहाव के साथ नीचे आने लगते हैं। इससे पानी एक खतरनाक  मलबे के बहाव में बदल जाता है, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को नुकसान पहुंचा सकता है।

तबाही बढ़ने की मुख्य वजहें हैं

1. संकरी घाटियां और खड़ी ढलानें: पहाड़ों में पानी को फैलने की जगह नहीं मिलती, इसलिए वह बहुत तेज गति से नीचे आता है और रास्ते में आने वाले मकान, सड़कें और पुल बहा ले जाता है।

2. अस्थायी झीलों का बनना और टूटना: कई बार भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता रुक जाता है और ऊपर पानी जमा होकर अस्थायी झील बन जाती है। अगर यह प्राकृतिक बांध टूट जाए, तो अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहता है और बड़े पैमाने पर तबाही मचाता है।

3. मानव गतिविधियां: नदी-नालों पर अतिक्रमण, पहाड़ काटकर सड़क और अन्य निर्माण कार्य, मलबे का गलत तरीके से निस्तारण, जंगलों की कटाई और संकरे पुल या पुलियां पानी के बहाव को रोक देती हैं। इसके बाद जब यह रुकावट टूटती है, तो पानी और मलबा एक साथ तेजी से नीचे आता है, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ जाता है।

क्या जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही हैं बादल फटने की घटनाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में बादल फटने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इसकी एक बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है। वहीं, पहाड़ी इलाकों में बिना योजना के तेजी से हुए निर्माण कार्यों के कारण इन घटनाओं से होने वाला नुकसान भी बढ़ा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी के साथ हवा लगभग सात प्रतिशत अधिक नमी अपने भीतर रोक सकती है। जब यही अतिरिक्त नमी कम समय में एक साथ बारिश के रूप में गिरती है, तो बहुत तेज और अत्यधिक वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे बादल फटने जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

From Arunachal to Jammu & Kashmir: Why Are Cloudbursts Becoming More Frequent in the Hills?
कैसे बचें? - फोटो : Amar Ujala

जब बादल फटे तो कैसे करें बचाव?

अगर आप उस इलाके में जहां पर बादल फटा है या ऐसी आशंका है या फिर प्रशासन द्वारा पहले ही अलर्ट दिया गया है तो ऐसे में सबसे पहले उस स्थान को छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। इस काम में देरी करने से बचें और जितना जल्दी हो सके सुरक्षित स्थान पर जाएं।

इन बातों का भी रखें ध्यान:-

  • बादल फटने की स्थिति में नदियों, नालों और खुले स्थान पर जाने से बचें और न ही किसी और को जाने दें।
  • मौसम विभाग, स्थानीय अधिकारियों और प्रशासन की सलाह और चेतावनियों को ध्यान से सुनें और उन पर अमल करें।
  • जब तक हालात सामान्य न हो जाए, सुरक्षित इलाके में रहें। 

अरुणाचल प्रदेश: एक हफ्ते की बारिश और बादल फटने से 12 जिले प्रभावित

अरुणाचल प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश और 28 जून को बादल फटने के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए। राज्य के करीब 12 जिले इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। हालांकि अब बारिश थम चुकी है और मौसम साफ होने लगा है। धूप निकलने के बाद प्रशासन ने क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है, लेकिन कई इलाकों तक पहुंचना अभी भी चुनौती बना हुआ है।

जम्मू-कश्मीर: डोडा में बादल फटने से फसलें और बाग-बगीचे तबाह

उधर, जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भी भारी बारिश और बादल फटने से व्यापक नुकसान हुआ है। जिले के भलेसा के खलजुगासर इलाके में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने कृषि क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

तेज पानी के बहाव में किसानों की खड़ी फसलें बह गईं, जबकि सेब और अन्य फलदार बाग-बगीचों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई मकानों और निजी संपत्तियों को भी क्षति पहुंची है। स्थानीय लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

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