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Letter to PM Modi and Shehbaz Sharif: Why did 117 people from Pakistan and India write to PM Modi and Shehbaz?
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Letter to PM Modi-Shehbaz Sharif: PAK और भारत के 117 लोगों ने PM मोदी और शहबाज को क्यों लिखी चिट्ठी?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Wed, 01 Jul 2026 05:43 PM IST
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ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को लेकर एक नई पहल सामने आई है। दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त पत्र लिखकर संवाद बहाल करने की अपील की है। इस पहल में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला और पाकिस्तान के कई पूर्व मंत्री व राजनयिक भी शामिल हैं। हालांकि इस अपील ने राजनीतिक बहस भी छेड़ दी है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इसे अनुचित बताते हुए इसकी आलोचना की है।
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच शांति और संवाद की नई पहल सामने आई है। सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से जारी संयुक्त अपील में दोनों देशों के 117 प्रमुख नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से द्विपक्षीय वार्ता फिर से शुरू करने का आग्रह किया है।
इस अपील पर भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 नागरिकों ने हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि दशकों से चली आ रही शत्रुता ने दोनों देशों के करोड़ों लोगों, खासकर युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका मानना है कि भारत और पाकिस्तान दुनिया की लगभग एक-पांचवें आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और दोनों देशों के लोग शांति, विकास और सहयोग पर आधारित भविष्य के हकदार हैं।
पत्र में दोनों सरकारों से विश्वास बहाली के कई कदम उठाने की अपील की गई है। इनमें नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की दोबारा नियुक्ति, सामान्य वीजा सेवाओं की बहाली, दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र खोलना और अटारी-वाघा सीमा को व्यापार व आवागमन के लिए फिर से शुरू करना शामिल है।
इसके अलावा, श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा और अन्य सीमा पार संपर्क परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने की मांग भी की गई है। अपील में करतारपुर साहिब कॉरिडोर को सुचारु रूप से संचालित करने, पाकिस्तान स्थित शारदा पीठ तक श्रद्धालुओं की पहुंच सुनिश्चित करने और दोनों देशों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत स्थलों की यात्रा को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है।
पत्र में जम्मू-कश्मीर सहित सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय संवाद फिर से शुरू करने की वकालत की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने वर्ष 2004 से 2007 के बीच हुए वार्ता ढांचे को आधार बनाकर आगे बढ़ने का सुझाव दिया है। साथ ही दोनों देशों की वैध सुरक्षा चिंताओं का समाधान, तनाव कम करने और विश्वास बहाली के उपायों पर भी बल दिया गया है।
इस संयुक्त अपील पर हस्ताक्षर करने वालों में भारत की ओर से महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, राज्यसभा सांसद मनोज झा और पूर्व केंद्रीय मंत्री हुमायूं कबीर शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, सांसद इस्फान्यार भंडारा और परमाणु वैज्ञानिक परवेज हुदभोय जैसे प्रमुख नाम जुड़े हैं।
हालांकि इस पहल को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इस अपील की आलोचना करते हुए क्या कहा जरा सुनिए।
फिलहाल, यह संयुक्त पत्र एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों में संवाद बनाम सख्ती की बहस को केंद्र में ले आया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देशों की सरकारें इस अपील पर कोई प्रतिक्रिया देती हैं या नहीं।
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