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Petrol Diesel : ऊर्जा संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला; पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 किया, डीजल पर शून्य

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Fri, 27 Mar 2026 08:58 AM IST
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सार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने से देश की तेल विपणन कंपनियों पर भारी दबाव में था और उनका घाटा बढ़ रहा था। अब सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय उत्पाद शुल्क घटाने का फैसला किया है। आइए जानते हैं इस फैसले का क्या असर होगा। 

government cut petrol diesel excise duty amid enrgy crisis due to west asia conflict
पेट्रोल डीजल की कीमतें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके कारण उपजे ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दरअसल वित्त मंत्रालय द्वारा 26 मार्च को जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला किया है। सरकार के इस कदम के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी, जो पहले 13 रुपये थी, वो अब घटकर 3 रुपये रह गई है और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी, जो पहले 10 रुपये थी, वो अब शून्य हो गई है। 
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तेल कंपनियों को सरकार ने दी बड़ी राहत
यह कदम पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों से जूझ रही तेल विपणन कंपनियों, एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी, को राहत देने के लिए उठाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू होगी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सरकार ने इस संकट के बावजूद अभी तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हैं, जिससे देश में ईंधन विपणन कंपनियां दबाव में थीं।
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तेल विपणन कंपनियों का घाटा कम होगा
रेटिंग एजेंसी ICRA ने गुरुवार को जारी नोट में कहा कि यदि कच्चे तेल का औसत मूल्य 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक रहता है, तो ईंधन कंपनियों को पेट्रोल पर 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 14 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो सकता है।नइस महीने की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो बाद में घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल रह गईं। दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है।



भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का करीब आधा आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। संघर्ष बढ़ने के साथ ईरान ने इस जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया, जिससे टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई।

ये भी पढ़ें- Excise Duty Cut: ईरान में जंग के बीच भारत में उत्पाद शुल्क कटौती क्यों? पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने बताया कारण

नायरा एनर्जी ने कीमतें बढ़ाईं
नायरा एनर्जी, जो देश के 1,02,075 पेट्रोल पंपों में से 6,967 का संचालन करती है, ने बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने का फैसला किया है। उसके पंपों पर पेट्रोल 100.71 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.31 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी की संयुक्त ईंधन रिटेल कंपनी जियो-बीपी, जिसके 2,185 आउटलेट हैं, ने भारी नुकसान के बावजूद अभी तक कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है। सरकारी तेल कंपनियां, जो बाजार के करीब 90 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखती हैं, फिलहाल कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं।

क्या होता है उत्पाद शुल्क
पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक टैक्स है। इसे लगाने के पीछे मुख्य उद्देश्य राजस्व इकट्ठा करना है, जिसका उपयोग देश के विकास, बुनियादी ढांचे , रक्षा और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है।

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