{"_id":"639d8a6ab7f0f37af23ccb37","slug":"gujarat-election-2022-result-dasada-assembly-seat-profile-and-history","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dasada Assembly Seat:यहां नोटा को मिले जीत-हार के अंतर से ज्यादा वोट, जानें किसे हुआ फायदा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Dasada Assembly Seat:यहां नोटा को मिले जीत-हार के अंतर से ज्यादा वोट, जानें किसे हुआ फायदा
Sat, 24 Dec 2022 12:24 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sat, 24 Dec 2022 12:24 PM IST
सार
Gujarat Election 2022 Result: भाजपा के पीके परमार ने कांग्रेस के नौशाद सोलंकी को 2,179 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 76,344 वोट जबकि कांग्रेस को यहां 74,165 वोट मिले। नोटा को यहां 3,147 वोट मिले जो जीत-हार के अंतर से काफी ज्यादा है।
विज्ञापन
NOTA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर आ गई। मतलब कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, इस बार सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए। एक सीट पर सपा उम्मीदवार विजयी हुए तो बाकी तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।
सुरेंद्रनगर जिले की डसादा विधानसभा सीट से भाजपा ने पीके परमार को उतारा था। उनके सामने कांग्रेस के नौशाद सोलंकी थे। भाजपा के पीके परमार ने कांग्रेस के नौशाद सोलंकी को 2,179 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 76,344 वोट जबकि कांग्रेस को यहां 74,165 वोट मिले। हालांकि, भाजपा की इस जीत के पीछे नोटा की भूमिका भी निर्णायक साबित हुई। दरअसल, नोटा को यहां 3,147 वोट मिले जो जीत-हार के अंतर से काफी ज्यादा है।
तीसरे नंबर पर आप रही
इस चुनाव में तीसरे नंबर पर आप रही, इसके प्रत्याशी अरविंदभाई सोलंकी को 10324 वोट मिले जो कुल वोट का 6.16 फीसदी रहा। यानीं, सोलंकी अपनी जमानत नहीं बचा सके। बसपा उम्मीदवार समेत छह अन्य उम्मीदवारों की भी जमानत जब्त हो गई।
विज्ञापन
2017 में कांग्रेस को मिली थी जीत
डसादा विधानसभा सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने नौशाद सोलंकी को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भाजपा के रमणलाल वोरा को महज 3728 वोटों से हराया था। यहां इस कुल दस उम्मीदवार मैदान में थे। इन दोनों के अलावा बाकी आठ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 2017 से पहले इस सीट पर लगातार दो बार 2007 और 2012 में यहां से भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, 2002 में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। वहीं, 1990, 1995 और 1998 में लगातार तीन बार डसादा सीट पर कमल खिला था।
अब तक हुए कुल चुनावों की बात करें तो। डसादा में अब तक हुए कुल 14 चुनावों में छह बार इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली है। वहीं, छह बार ही यहां से भाजपा जीतने में सफल रही है। एक-एक बार निर्दलीय और स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार यहां जीतने में सफल रहे।
विज्ञापन
सुरेंद्रनगर जिले की डसादा विधानसभा सीट से भाजपा ने पीके परमार को उतारा था। उनके सामने कांग्रेस के नौशाद सोलंकी थे। भाजपा के पीके परमार ने कांग्रेस के नौशाद सोलंकी को 2,179 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 76,344 वोट जबकि कांग्रेस को यहां 74,165 वोट मिले। हालांकि, भाजपा की इस जीत के पीछे नोटा की भूमिका भी निर्णायक साबित हुई। दरअसल, नोटा को यहां 3,147 वोट मिले जो जीत-हार के अंतर से काफी ज्यादा है।
विज्ञापन
तीसरे नंबर पर आप रही
इस चुनाव में तीसरे नंबर पर आप रही, इसके प्रत्याशी अरविंदभाई सोलंकी को 10324 वोट मिले जो कुल वोट का 6.16 फीसदी रहा। यानीं, सोलंकी अपनी जमानत नहीं बचा सके। बसपा उम्मीदवार समेत छह अन्य उम्मीदवारों की भी जमानत जब्त हो गई।
विज्ञापन
2017 में कांग्रेस को मिली थी जीत
डसादा विधानसभा सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने नौशाद सोलंकी को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भाजपा के रमणलाल वोरा को महज 3728 वोटों से हराया था। यहां इस कुल दस उम्मीदवार मैदान में थे। इन दोनों के अलावा बाकी आठ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 2017 से पहले इस सीट पर लगातार दो बार 2007 और 2012 में यहां से भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, 2002 में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। वहीं, 1990, 1995 और 1998 में लगातार तीन बार डसादा सीट पर कमल खिला था।
अब तक हुए कुल चुनावों की बात करें तो। डसादा में अब तक हुए कुल 14 चुनावों में छह बार इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली है। वहीं, छह बार ही यहां से भाजपा जीतने में सफल रही है। एक-एक बार निर्दलीय और स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार यहां जीतने में सफल रहे।