पाकिस्तान ने भारत में हुई आतंकी वारदातों में नहीं माना मसूद-सईद का हाथ
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के पीछे उसका ओसामा बिन लादेन और अल कायदा का सहयोगी रहना बताया गया है। पाकिस्तान और चीन तकनीकी घालमेल कर भारतीय संसद पर हमले से लेकर पुलवामा हमले तक में जैश प्रमुख का हाथ होनेे को यूएन के रिकार्ड से बाहर रखने में कामयाब रहे हैं। भारत के सुरक्षा रणनीतिकार इसको लेकर खासे असहज हैं।
इसी तरह इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के काउंटर टेरर डिपार्टमेंट (सीटीडी) की तरफ से मुंबई हमले समेत कई आतंकी वारदातों के मास्टरमाइंड लश्कर-ए-ताइबा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में भी काफी चालाकी की गई है। सईद और उसकी चार संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर में महज टेरर फंडिंग को आधार बनाया गया है। हालांकि सीटीडी के एक अधिकारी ने यह जरूर कहा कि भारत व अमेरिका ने मुंबई में सईद का हाथ होने का दावा किया है। लेकिन रिकॉर्ड में यह बात कहीं शामिल नहीं है।
भारत ने दिए हैं पाक को ठोस सबूत
उच्चपदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि पाकिस्तान को मुंबई हमले में सईद की अगुवाई में लश्कर का हाथ होने का ठोस सबूत दिया गया है। पाकिस्तान ने खुद अपनी जांच में पाया था कि मुंबई हमले की साजिश से लेकर इसके क्रियान्वयन तक के पीछे लश्कर और सईद थे।
पाकिस्तान की जांच में यह भी था कि मुंबई हमले के लिए मोहम्मद कसाब समेत दस आतंकियों को पाक जमीन पर ट्रेनिंग दी गई और इसमें इस्तेमाल डोंगी (एक तरह की नाव) व सैटेलाइट फोन जैसे उपकरण लश्कर ने ही उपलब्ध कराए थे। पाक ने यह बात भारत और अमेरिका से साथ साझा भी की थी।
चीन से भी मिल रही है शह
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान को इस मामले में चीन से शह मिल रही है। चीन का पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर आर्थिक निवेश है। ऐसे में आर्थिक परेशानियों से बुरी तरह जूझ रहे पाकिस्तान को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित चीन ही है।
पाकिस्तान के विफल राष्ट्र घोषित होने पर चीन ही सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। इसलिए उसने अजहर व सईद जैसे आतंकियों की बलि चढ़ाकर पाकिस्तान को अपनी छवि सुधारने का आदेश दिया है। लेकिन साथ ही भारत में इन दोनों आतंकियों के कारनामों को रिकॉर्ड पर न लाकर पाकिस्तान के बचाव का रास्ता भी खोल रखा है।
काली सूची के डर से कार्रवाई
माना जा रहा है कि पाक ने यह चतुराई भरी कार्रवाई आतंक के खिलाफ गठित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की काली सूची से बचने के लिए की है। एफएटीएफ की ग्रे-सूची में शामिल पाक यदि इन आतंकियों की करतूतों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मानता तो यह भारत की अहम कूटनीतिक जीत होती और तब पाकिस्तान को इन आतंकियों पर भारत के मनमुताबिक कार्रवाई भी करनी पड़ती।