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Maharashtra: नाबालिगों के हाथ में गाड़ी की चाबी देना पड़ेगा भारी, साल भर में 1,413 अभिभावकों पर केस दर्ज

Fri, 24 Jul 2026 03:46 PM IST
सुनील मेहरोत्रा अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो, मुंबई Published by: सुनील मेहरोत्रा Updated Fri, 24 Jul 2026 03:46 PM IST
सार

महाराष्ट्र में नाबालिगों के वाहन चलाने पर पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। पिछले एक साल में 3,151 नाबालिग चालकों और 1,413 अभिभावकों पर कार्रवाई की गई। 91 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया। आरटीओ ने माता-पिता से बच्चों को वाहन न देने की अपील की है।

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Handing over vehicle to minor will prove costly Cases registered against many parents in Maharashtra past year
ड्राइविंग (प्रतिकात्मक) - फोटो : freepik

विस्तार

स्कूल और कॉलेज आने-जाने के लिए कई माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों के हाथों में दोपहिया या चारपहिया गाड़ियों की चाबी थमा रहे हैं। छुट्टी होते ही सड़कों पर रफ्तार का खेल शुरू हो जाता है। तेज रफ्तार में गाड़ी दौड़ाना, रेसिंग, स्टंट करना, एक ही बाइक पर तीन-तीन लोगों का बैठना और ट्रैफिक नियमों को तोड़ना आम बात हो गई है। बच्चों की यह लापरवाही न सिर्फ उनके खुद के लिए खतरनाक है, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे चालकों और पैदल यात्रियों की जान भी खतरे में डाल रही है। इसी लापरवाही को रोकने के लिए महाराष्ट्र पुलिस और प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
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क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में राज्य भर में 3,151 नाबालिग ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इतना ही नहीं, बच्चों को गाड़ियां देने की लापरवाही बरतने वाले 1,413 माता-पिता के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं और इस पूरे अभियान के दौरान कुल मिलाकर 91 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया है। ट्रैफिक पुलिस ने स्कूल, कॉलेज और भीड़भाड़ वाले इलाकों में खास चेकिंग अभियान चलाकर यह कार्रवाई पूरी की है।
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मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों का गाड़ी चलाना एक बड़ा अपराध है। कानून में इसके लिए बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं। अगर कोई नाबालिग गाड़ी चलाता पकड़ा जाता है, तो कार्रवाई सिर्फ बच्चे पर ही नहीं, बल्कि गाड़ी की चाबी देने वाले माता-पिता या गाड़ी के मालिक पर भी होती है। इसमें अभिभावकों को 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है और तीन साल तक की जेल भी हो सकती है। इसके अलावा गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी आरसी भी रद्द किया जा सकता है।
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अगर कोई नाबालिग हादसा कर बैठता है, तो उसका हर्जाना भी बहुत बड़ा होता है। ऐसे मामलों में इंश्योरेंस कंपनियां किसी भी तरह का मुआवजा देने से साफ मना कर देती हैं। इसका मतलब यह है कि दुर्घटना का पूरा आर्थिक बोझ सीधे माता-पिता की जेब पर आता है। इसके साथ ही किसी बेकसूर की जान जाने का खतरा भी हमेशा बना रहता है।


आरटीओ ने की अपील
महाराष्ट्र में आरटीओ ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को गाड़ियां न दें। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि बच्चों की जिद से ज्यादा उनकी सुरक्षा अहम है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को स्कूल बस या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भेजें या खुद उन्हें छोड़ें। साथ ही बच्चों को हेलमेट पहनने, तय रफ्तार में गाड़ी चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की सीख देना बेहद जरूरी है।
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