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CM हिमंत पर हेट स्पीच के आरोप: असम की अदालत में मुकदमे पर सुनवाई, गौहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस क्या बोले?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: Pavan
Updated Tue, 21 Apr 2026 12:11 PM IST
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सार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ हेट स्पीच के आरोपों पर आज गौहाटी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हालांकि, इस दौरान उनकी तरफ से एडवोकेट जनरल ने आने और मामले में कोर्ट की तरफ से जारी नोटिस का जवाब न देने पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई है।
CM हिमंत पर हेट स्पीच के आरोप
- फोटो : ANI
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विस्तार
गौहाटी हाईकोर्ट में आज असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें उन पर अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान देने का आरोप लगाया गया है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरूण देव चौधरी की बेंच कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए।
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जवाब न दाखिल होने पर चीफ जस्टिस नाराज
सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि कोर्ट ने पहले ही राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को नोटिस जारी किया था, लेकिन अब तक उनकी तरफ से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर जवाब क्यों नहीं दिया गया।
सीएम पर नोटिस के उल्लंघन का आरोप
अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी कहा कि नोटिस जारी होने के बाद भी मुख्यमंत्री ने 17 अप्रैल और 27 मार्च को फिर से विवादित बयान दिए। उन्होंने कहा कि ये बयान इतने आपत्तिजनक हैं कि उन्हें कोर्ट में पढ़ा भी नहीं जा सकता, लेकिन लिखित नोट के जरिए अदालत को दिखाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री 'मियां' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जो एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ठीक नहीं है।
कोर्ट से अंतरिम आदेश जारी करने मांग
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की कि अंतरिम आदेश जारी कर मुख्यमंत्री को ऐसे बयान देने से रोका जाए। इस पर अदालत ने राज्य सरकार की ओर से जवाब न आने पर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि कम से कम जवाब तो दाखिल किया जाना चाहिए था। राज्य सरकार के वकील ने बताया कि एडवोकेट जनरल किसी दूसरे कोर्ट में व्यस्त हैं, जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने असंतोष जताया।
28 मई को होगी मामले में अगली सुनवाई
अदालत ने निर्देश दिया कि अगली तारीख तक हर हाल में हलफनामा दाखिल किया जाए। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को भी मुख्यमंत्री के कथित बयानों से जुड़ा नोट शपथपत्र के साथ दाखिल करने की अनुमति दी गई। फिलहाल कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 28 मई को तय की है। इस मामले पर अब आगे की कार्रवाई राज्य सरकार के जवाब और पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर होगी।
यह भी पढ़ें - तमिलनाडु में मतदान वाले दिन मौसम डालेगा खलल? गर्मी का प्रकोप, अगले तीन दिनों में बारिश और तूफान का पूर्वानुमान
पवन खेड़ा भागने वाले व्यक्ति नहीं हैं- सिंघवी
वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर गौहाटी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि पवन खेड़ा भागने वाले व्यक्ति नहीं हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि पवन खेड़ा ने उन पर कई पासपोर्ट और विदेशों में संपत्ति होने के आरोप लगाए थे। इस दौरान राज्य की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह सिर्फ मानहानि का मामला नहीं है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं, इसलिए उन्हें राहत नहीं मिलनी चाहिए और उन्हें फ्लाइट रिस्क बताया गया। दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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जवाब न दाखिल होने पर चीफ जस्टिस नाराज
सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि कोर्ट ने पहले ही राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को नोटिस जारी किया था, लेकिन अब तक उनकी तरफ से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर जवाब क्यों नहीं दिया गया।
सीएम पर नोटिस के उल्लंघन का आरोप
अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी कहा कि नोटिस जारी होने के बाद भी मुख्यमंत्री ने 17 अप्रैल और 27 मार्च को फिर से विवादित बयान दिए। उन्होंने कहा कि ये बयान इतने आपत्तिजनक हैं कि उन्हें कोर्ट में पढ़ा भी नहीं जा सकता, लेकिन लिखित नोट के जरिए अदालत को दिखाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री 'मियां' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जो एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ठीक नहीं है।
कोर्ट से अंतरिम आदेश जारी करने मांग
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की कि अंतरिम आदेश जारी कर मुख्यमंत्री को ऐसे बयान देने से रोका जाए। इस पर अदालत ने राज्य सरकार की ओर से जवाब न आने पर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि कम से कम जवाब तो दाखिल किया जाना चाहिए था। राज्य सरकार के वकील ने बताया कि एडवोकेट जनरल किसी दूसरे कोर्ट में व्यस्त हैं, जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने असंतोष जताया।
28 मई को होगी मामले में अगली सुनवाई
अदालत ने निर्देश दिया कि अगली तारीख तक हर हाल में हलफनामा दाखिल किया जाए। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को भी मुख्यमंत्री के कथित बयानों से जुड़ा नोट शपथपत्र के साथ दाखिल करने की अनुमति दी गई। फिलहाल कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 28 मई को तय की है। इस मामले पर अब आगे की कार्रवाई राज्य सरकार के जवाब और पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर होगी।
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पवन खेड़ा भागने वाले व्यक्ति नहीं हैं- सिंघवी
वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर गौहाटी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि पवन खेड़ा भागने वाले व्यक्ति नहीं हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि पवन खेड़ा ने उन पर कई पासपोर्ट और विदेशों में संपत्ति होने के आरोप लगाए थे। इस दौरान राज्य की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह सिर्फ मानहानि का मामला नहीं है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं, इसलिए उन्हें राहत नहीं मिलनी चाहिए और उन्हें फ्लाइट रिस्क बताया गया। दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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