{"_id":"6469ed3931472ec068078cb5","slug":"health-are-you-mentally-ill-be-careful-if-you-see-these-symptoms-experts-told-how-to-protect-2023-05-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Health: आप मानसिक रूप से बीमार तो नहीं, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान, विशेषज्ञों ने बताया कैसे करें बचाव","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Health: आप मानसिक रूप से बीमार तो नहीं, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान, विशेषज्ञों ने बताया कैसे करें बचाव
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
उपासना अरोड़ा, चेयरपर्सन, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, कौशांबी, गाजियाबाद (बाएं); सामाजिक सेवा से जुड़ीं मल्लिका नड्डा
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कहीं आप मानसिक तौर पर बीमार तो नहीं? यदि आपको भी ऑफिस में अपने सहकर्मियों से मिलने-जुलने में बहुत ज्यादा सावधानी रखने की आवश्यकता महसूस हो रही है, या आपको अपने घर-परिवार वालों की बहुत ज्यादा चिंता हो रही है तो यह मानसिक बीमारी का लक्षण हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य रूप से इस तरह का व्यवहार एक व्यक्ति का अच्छा सामाजिक व्यवहार माना जाता है, लेकिन यदि यही व्यवहार बहुत ज्यादा हो रहा है तो ऐसा व्यक्ति मानसिक तौर पर बीमार है और उसे तुरंत इलाज की आवश्यकता है। विशेषज्ञों की राय है कि कोरोना काल के बाद लोगों में इस तरह का व्यवहार ज्यादा देखने को मिल रहा है।मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का दावा है कि कोरोना काल ने लोगों के अंतर्मन पर बहुत गहराई से असर डाला है। यह असर अलग-अलग लोगों में अलग-अलग मात्रा में उनके व्यवहार में दिखाई पड़ रहा है। कोरोना काल से पूर्व ज्यादातर लोग बचत को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता देते थे, भारतीयों में यह सोच बहुत ज्यादा दिखाई देती है, लेकिन कोरोना काल ने कई लोगों में निराशा का भाव भर दिया है। अब उन्हें लगता हैे कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए बहुत बचत करने से कोई लाभ नहीं है। अब वे ज्यादा खर्च करने और खुशी प्राप्त करने को ज्यादा प्राथमिकता देने लगे हैं।
दिख रहा ये बदलाव
यशोदा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, कौशांबी की चेयरपर्सन उपासना अरोड़ा ने अमर उजाला को बताया कि लोगों की सोच में यह बदलाव कोरोना का साइड इफेक्ट कहा जा रहा है। कोरोना ने लोगों को सोच बदलकर रख दिया है। अब कई लोग बचत को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं तो कई लोग अपने लोगों के जीवन को लेकर बहुत ज्यादा चिंता करने लगे हैं। वे बार-बार फोन कर अपने प्रियजनों का हालचाल लेने लगे हैं। उन्हें यह अनजाना डर लगा रहता है कि कहीं उनके लोगों के साथ कुछ गलत तो नहीं हो गया है। ऐसे लोग अपने प्रियजनों का एक-दो बार फोन न लगने पर भी बहुत ज्यादा चिंतित हो जाते हैं। यह मानसिक बीमारी का लक्षण है।
दिव्यांगजनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहीं मल्लिका नड्डा ने बताया कि लोगों के ऑफिस व्यवहार में भी बहुत बदलाव दिखाई पड़ा है। कुछ लोग अपने सहकर्मियों से बहुत ज्यादा सावधान रहने लगे हैं। उनके साथ बैठने, छींकने, हाथ मिलाने से कतराने लगे हैं। सरकार के द्वारा मास्क लगाने की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद भी कुछ लोग अभी भी अपना मुंह मास्क से ढक कर रखते हैं। यह सावधानी नहीं, बल्कि मानसिक अस्वस्थता का लक्षण है।
सीमा पर खड़े जवानों को भी अपने व्यवहार को समय-समय पर परीक्षण करते रहने की आवश्यकता है। वे ऐसे माहौल में काम करते हैें जहां कई कारणों से उनकी चिंताएं बढ़ जाती हैं। लेकिन उन्हें भी व्यायाम, योग, ध्यान और उचित भोजन से स्वयं को सामान्य रखने की कोशिश करनी चाहिए।
डॉक्टर से सलाह लें
इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक रोगियों को चिकिसकों के पास जाने में हिचक होती है। उन्हें लगता है कि लोग उन्हें पागल समझने लगेंगे। लेकिन इस गलतफहमी को पीछे छोड़ मानसिक स्वास्थ्य विभाग, चिकिसकों और विशेषज्ञों से परामर्श करना चाहिए। केंद्र सरकार और राज्यों की स्वास्थ्य सेवाएं भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए। इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IACC) अमेरिकी संस्था USAID से मिलकर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। इसका लाभ उठाना चाहिए।
क्या करें बचाव
- यह समझें कि कोरोना काल समाप्त हो गया है और संक्रमण से बचाव एक सीमा तक उचित है, लेकिन इसको लेकर अनावश्यक रूप से बहुत ज्यादा परेशान न हों। अपने सहकर्मियोंं से बातचीत, किसी वस्तु के लेनदेन से संक्रमण के प्रति न डरें।
- अपने करीबी लोगों के स्वास्थ्य-सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंतित न रहें। सप्ताह या बहुत करीबी होने पर दिन में एक-दो बार बातचीत बहुत पर्याप्त है। इससे ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, यह समझने का प्रयास करें।
- हाथ धुलने, सेनेटाइज करने और मुंह को बहुत ज्यादा ढकने की अब आवश्यकता नहीं है। कोरोना का वायरस अब बहुत सामान्य हो चुका है। अब यह बहुत ज्यादा मारक नहीं रहा है। इसका इलाज बहुत सामान्य हो चुका है। इसलिए इसको लेकर बहुत ज्यादा चिंतित न रहें।
- व्यायाम, ध्यान और स्वस्थ भोजन कर अपने आपको सामान्य करने का प्रयास करें।
- यदि इसके बाद भी आपके मन से चिंता कम नहीं हो रही है तो किसी अच्छे मनोचिकित्सक से मिलकर परामर्श लें।